बराक ओबामा की आंखों में खटक रहा है पुतिन का भारत दौरा
वाशिंगटन। यूक्रेन संकट के बाद पश्चिमी देशों का नजरिया रूस के लिए क्या है, इस बात को बताने की जरूरत नहीं है। रूस पर तमाम तरीके के आर्थिक प्रतिबंध तक लगा दिए गए हैं।

अमेरिका और रूस की दूरियां
वहीं रूस और भारत की दोस्ती के बारे में भी पूरी दुनिया को काफी अच्छे से मालूम है। अब भारत और रूस के बीच करीबियों से अमेरिका खफा हो गया है। आपको बता दें कि रूस और अमेरिका दोनों ही कोल्ड वॉर के प्रतिद्वन्दी हैं। अब जबकि अमेरिका, भारत के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत बनाने की ओर बढ़ा रहा है तो उसका पुराना प्रतिद्वन्द्वी शायद उसकी आंखों में खटकने लगा है।
ओबामा की यात्रा पर कोई असर नहीं
वाशिंगटन से शुक्रवार को खबर आई है कि भारत और रूस के बीच सामान्य संबंधों को लेकर अमेरिका नाखुश है, लेकिन इसका राष्ट्रपति बराक ओबामा की आगामी भारत यात्रा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
अमेरिका की विदेश विभाग की प्रवक्ता जेन साकी से जब पूछा गया कि क्या रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के दौरान हुई संधियों के कारण ओबामा भारत दौरे की योजना रद्द कर देंगे, इस पर उन्होंने कहा कि नहीं, भारत महत्वपूर्ण साझेदार है।
गौरतलब है कि भारत की ओर से ओबामा को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है। वह यह सम्मान पाने वाले तथा कार्यकाल के दौरान भारत की दो बार यात्रा करने वाले अमेरिका के पहले राष्ट्रपति होंगे। साकी ने कहा, "बेशक, हमारे आर्थिक संबंध महत्वपूर्ण है, जिसे हम आगे जारी रखना चाहते हैं।"
हालांकि, साकी ने सहयोगियों और साझेदार देशों को आगाह करते हुए कहा कि यूक्रेन में रूस के साथ हस्तक्षेप के वक्त उसके साथ पूर्ववत संबंध बरकरार रखने का यह उचित समय नहीं है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका को यह जानकारी प्राप्त हुई है कि भारत और रूस ने तेल खोज, आधारभूत संरचनाओं, रक्षा और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में समझौते किए हैं।
अमेरिका से पहले यूक्रेन की ओर से भी इस बात को लेकर नाराजगी जाहिर की जा चुकी है कि संकट के दौर के बीच ही भारत आखिर क्यों रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन को इतनी तवज्जो दे रहा है।
आखिर क्या है अमेरिका की समस्या
रूस इस समय बुरे हालातों से गुजर रहा है लेकिन उसका आत्मविश्वास कम नहीं हुआ है। ब्लादीमिर पुतिन यूक्रेन संकट की वजह से पिछले दिनों ऑस्ट्रेलिया में आयोजित जी-20 समिट को बीच में छोड़कर अपने देश वापस लौट गए थे।
रूस जो पूरी दुनिया में अलग-थलग पड़ चुका है, उसे अपने पुराने दोस्त भारत पर काफी भरोसा है। अमेरिका जो भारत के साथ रक्षा क्षेत्र में कई अहम डील को और आगे ले जाना चाहता है कहीं न कहीं इस बात से थोड़ा परेशान है कि कहीं भारत इस क्षेत्र में फिर से रूस की ओर न आकर्षित हो जाए।
हालांकि भारत और रूस पहले से ही इस क्षेत्र में काफी करीब हैं और देश में रक्षा क्षेत्र का 70 प्रतिशत यानी सबसे बड़ा हिस्सा रूस पर निर्भर है।
मोदी ने भी गुरुवार को साफ कर दिया था कि रूस रक्षा क्षेत्र में भारत का सबसे विश्वसनीय साझीदार रहा है। भारत और रूस के बीच जो रिश्ता है उसकी तुलना किसी से भी नहीं की जा सकती है।
साथ ही भारत कभी भी अपने इस पुराने दोस्त का साथ नहीं छोड़ सकता है। नरेंद्र मोदी इस समय दुनिया के मजबूत नेताओं में से एक हैं और ऐसे में उनका यह भरोसा ही शायद अमेरिका को खटकने लगा है।












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