डॉलर इतना मज़बूत क्यों हो रहा, दुनिया भर में मची है खलबली

डॉलर
Getty Images
डॉलर

अमेरिकी डॉलर दूसरी मुद्राओं की तुलना नें पिछले दशकों में सबसे मज़बूत स्थिति में हैं. इसका मतलब है कि डॉलर ख़रीदना महंगा हो गया है, और एक डॉलर अब पहले से ज़्यादा पाउंड, यूरो या येन ख़रीद सकता है.

इसका असर दुनिया भर के व्यापार और घरों पर पड़ रहा है.

डॉलर इंडेक्स यानी डीएक्सवाई, अमेरिकी डॉलर की दुनिया की छह दूसरी मुद्राओं से तुलना करता है. इसमें यूरो, पाउंड और येन शामिल हैं.

डीएक्सवाई 2022 में 15 प्रतिशत बढ़ा है. ये आँकड़े बताते हैं कि डॉलर पिछले 20 सालों में सबसे ऊंचाई पर है.

इतना मज़बूत क्यों है डॉलर


अमेरिका के सेंट्रल बैंक ने इस साल बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए कई बार ब्याज दर बढ़ाएं हैं.

इसका असर ये हुआ है कि उन वित्तीय उत्पादों से कमाई बढ़ गई है जो डॉलर का इस्तेमाल करते हैं. इसका एक उदाहरण अमेरिकी सरकारी बॉन्ड हैं.

बॉण्ड सरकार और कंपनियों के लिए पैसे उधार लेने का एक तरीका होते हैं, जिसके तहत भविष्य में एक ब्याज के साथ पैसे वापस करने का वादा किया जाता है.

सरकारी बॉण्ड आमतौर पर सुरक्षित माने जाते हैं.

महंगाई
Getty Images
महंगाई

हाल के दिनों में निवेशक लाखों डॉलर ख़र्च कर अमेरिकी बॉण्ड ख़रीद रहे हैं. उन्हें इन बॉण्ड्स को ख़रीदने के लिए डॉलर ख़र्च करने पड़ रहे हैं, और बढ़ती हुई डिमांड के कारण डॉलर की कीमत बढ़ी है.

जब निवेशक डॉलर ख़रीदने के लिए दूसरी मुद्राओं का इस्तेमाल करते हैं, तो उन मुद्राओं की कीमत गिरती है.

निवेशक ऐसे समय में भी डॉलर ख़रीदना चाहते हैं, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था संकट में होती है. इसकी वजह ये है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी है और इसे 'सुरक्षित जगह' समझा जाता है. इस कारण से भी क़ीमतें बढ़ती हैं.

यूरोप और एशिया की कई अर्थव्यवस्थाएं तेल की बढ़ती कीमतों के कारण मुश्किल में हैं.

अमेरिका में पिछले छह महीने में बढ़ती कीमतों का इतना ज़्यादा असर नहीं हुआ है.

पिछले तीन महीने अमेरिका की अर्थव्यवस्था भी सिकुड़ी है, लेकिन कंपनियों में नियुक्तियां हो रही हैं, इसे बढ़ते भरोसे की तरह देखा जा रहा है.

डॉलर के मुकाबले पाउंड की गिरावट
BBC
डॉलर के मुकाबले पाउंड की गिरावट

पाउंड की तुलना में मज़बूत होता डॉलर


26 सितंबर को पाउंड डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड स्तर पर गिरा, इसकी कीमत 1.03 डॉलर थी. इसके बाद से थोड़ा सुधार हुआ है.

साल की शुरुआत से अबतक पाउंड में 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. इसके बाद ब्रिटेन के वित्त मंत्री क्वासी क्वारटेंग ने 45 अरब पाउंड का टैक्स कटौती वाला एक मिनी बजट लेकर आए. इसके अलावा उन्होंने व्यापार और घरों में बिजली सब्सिडी का एलान भी किया.

उन्होंने इशारा किया कि और भी टैक्स कटौती हो सकती है. कई निवेशकों ने ब्रिटेन के बॉण्ड और दूसरे ऐसेट बेच दिए क्योंकि उन्हें डर है कि वित्त मंत्री के उठाए कदम से सरकारी उधारी बहुत अधिक बढ़ सकती है. इस कारण भी पाउंड की कीमत गिरी.

क्या दुनिया भर में महंगाई बेक़ाबू हो चुकी है?- दुनिया जहान

डॉलर के मुकाबले पाउंड की गिरावट
BBC
डॉलर के मुकाबले पाउंड की गिरावट

मज़बूत डॉलर का कमज़ोर मुद्राओं पर क्या असर होता है?


पाउंड की तरह जापान के येन की कीमत भी डॉलर के मुकाबले 20 प्रतिशत गिरी, और यूरो 15 प्रतिशत.

कमज़ोर मुद्रा वाले देशों को मज़बूत डॉलर से फ़ायदा होता है क्योंकि उनके लिए सामान और सर्विस बेचना सस्ता हो जाता है. इससे निर्यात बढ़ता है.

हालांकि इसका मतलब ये भी है कि अमेरिका से निर्यात महंगा हो जाता है. तेल की कीमत अमेरिकी डॉलर में तय होती है, इसलिए कई देशों में तेल महंगा हो गया है.

विदेशी शेयर बाज़ारों में हो रही गिरावट क्या मंदी शुरू होने के संकेत हैं?

तेल
BBC
तेल

उदाहरण के लिए ब्रिटेन में साल की शुरुआत में एक लीटर पेट्रोल की औसत कीमत 1.46 पाउंड थी जो कि बढ़कर औसतन 1.67 हो गई है, मतलब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी. जुलाई में ये 1.91 डॉलर के साथ ये कीमत अपने चरम पर थी.

सरकारें और कंपनियां कई बार अमेरिकी डॉलर में उधार लेते हैं, क्योंकि आमतौर पर इसकी कीमत उनकी अपनी मुद्रा की तुलना में स्थिर होती है.

डॉलर की कीमत बढ़ती है तो स्थानीय करेंसी में कर्ज़ चुकाना मुश्किल हो जाता है.

अर्जेंटीना की सरकार पर मज़बूत डॉलर का बुरा प्रभाव पड़ा है. उसने अस्थायी तौर पर सामानों के आयात पर बैन लगा दिया है. उसने ये क़दम अपने सुरक्षित मुद्रा भंडार को बचाने के लिए किया गया है.

डॉलर के मुकाबले पाउंड की गिरावट
BBC
डॉलर के मुकाबले पाउंड की गिरावट

दूसरे देश क्या कदम उठा रहे हैं?


दुनिया के कई देश ब्याज दरें बढ़ाकर अपनी मुद्रा का मूल्य बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. ब्रिटेन ने अभी तक दर 2% बढ़ाया है.

ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक, बैंक ऑफ़ इंग्लैंड का कहना है कि ब्याज दर और बढ़ सकते हैं. कई जानकारों का कहना है कि ब्याज दर 6% तक जा सकते हैं.

यूरोपियन सेंट्रल बैंक ने ब्याज दर 1.25% बढ़ाया है. ब्याज दर बढ़ाने से बढ़ती कीमतों को कम करने में मदद मिलती है, लेकिन साथ ही आम लोगों और व्यापारियों के लिए कर्ज़ लेना महंगा हो जाता है.

इससे महंगाई कम करने में मदद मिलती है लेकिन कंपनियों का मुनाफ़ा कम होने का डर होता है और लोगों की नौकरियाँ जा सकती हैं.

परिवार ख़र्चों में कटौती करने लगते हैं. इससे मंदी में जाने का डर होता है यानी अर्थव्यवस्था सिकुड़ती है.

लेकिन हाल के दिनों में पाउंड की कीमतें कम होने से पहले बैंक ऑफ़ इंग्लैंड ने ब्रिटेन के मंदी में जाने की चेतावनी दी थी.

ये भी पढ़ें:

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+