लॉन्च नहीं होतीं तो ‘कॉन्सेप्ट कारें’ बनाई क्यों जाती हैं?

कॉन्सेप्ट कारें देखने में बहुत ख़ूबसूरत लगती हैं. उन्हें देखकर लगता है कि भविष्य में गाड़ियों के डिज़ाइन पूरी तरह बदल जायेंगे.

लेकिन कार निर्माता कंपनियाँ इन कॉन्सेप्ट कारों पर लाखों डॉलर क्यों ख़र्च करती हैं, जब उन्हें ये पता होता है कि ये कारें कभी भी उत्पादन के लिए नहीं भेजी जाएंगी?

उदाहरण के तौर पर कॉन्सेप्ट कार 'डीएस एक्स ई-टेंस' को ही ले लीजिये. इस कार को फ़्रांस के लग्ज़री कार निर्माता डीएस ने हाल ही में प्रस्तुत किया है.

कंपनी ने कहा है कि ये कार साल 2035 में एक 'ड्रीम कार' होगी.

आधी खुली हुई छत, देखने में एक स्पोर्ट्स कार का डिज़ाइन और तमाम लग्ज़री फ़ीचर्स से लैस. इस कार को देखकर वाक़ई लगता है कि इसे किसी सुपरहीरो पर आधारित मैग्ज़ीन से निकाला गया है.

ऐसा नहीं है कि कंपनी ने इस कार का सिर्फ़ ढांचा तैयार किया है. कंपनी ने कार के भीतर भी पूरी मेहनत की है. इसमें कार चालक के लिए एक पर्सनल असिस्टेंट तक लगाया गया है.

कंपनी का कहना है कि "ये कार इसलिए तैयार की गई है ताकि लोगों को ये दिखाया जा सके कि वो भविष्य में कितनी ताक़तवर कारें बना सकते हैं."

कुछ बड़े प्लान

डीएस कंपनी वर्तमान में जो कारें बनाती है, उनका इस कॉन्सेप्ट कार से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है.

हालांकि कंपनी का दावा है कि इस साल के अंत तक वो एक कार लाएंगे जिसका डिज़ाइन इससे थोड़ा बहुत मिलता-जुलता होगा और उसे लॉन्च भी किया जाएगा.

डीएस कंपनी के डिज़ाइन डायरेक्टर थियेरी मेट्रोज़ कहते हैं कि "कॉन्सेप्ट कारों से कार डिज़ाइन करने की अवधारणा का विकास होता है. इस बहाने हम नई तकनीक को टेस्ट कर लेते हैं और भविष्य की कारों के लिए कुछ बड़े प्लान बना पाते हैं."

कुछ कॉन्सेप्ट कारों के बारे में ये बात सही साबित हुई है.

जैसे तीन साल पहले पॉर्श ने एक कॉन्सेप्ट कार लॉन्च की थी. इस कार के दम पर पॉर्श ने जिनेवा मोटर शो में सबसे ज़्यादा सुर्खियाँ बटोरी थीं.

कार का नाम था पॉर्श मिशन-ई जो कि एक तेज़ रफ़्तार, बड़े इंजन वाली इलेक्ट्रिक कार का मॉडल था.

पॉर्श
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हॉलीवुड में इस्तेमाल

इस कॉन्सेप्ट कार को बहुत सारे लोगों ने सराहा. लोगों की राय कार के इस मॉडल के बारे में बहुत सकारात्मक थी.

नतीजा ये हुआ कि इस जर्मन कंपनी ने मिशन-ई कॉन्सेप्ट कार का मॉडल पास किया और घोषणा कर दी कि साल 2019 के अंत में वो इस कार का उत्पादन शुरू करेंगे और कार का नाम होगा टेयकैन.

इस मौक़े को इसलिए भी अच्छा माना जा सकता है क्योंकि इसी से ये पता चलेगा कि बाज़ार इस परीक्षण को किस तरह से स्वीकार करता है और ये कार वास्तव में कितनी सफल साबित होती है.

वरना देखा यही गया कि कॉन्सेप्ट कारें लोगों के तस्वीरें खिंचवाने के काम आती हैं या फिर वो किसी बड़े प्रोग्राम में दिखाई देने से आगे नहीं बढ़ पातीं.

जैसे साल 1955 में आई 'लिंकन मरकरी फ़्यूचूरा' कार जिसे हॉलीवुड की कुछ फ़िल्मों में और बाद में टीवी सिरीज़ बैटमैन में मुख्य कार के तौर पर इस्तेमाल किया गया.

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1955 में आई लिंकन मरकरी फ़्यूचूरा कार
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1955 में आई लिंकन मरकरी फ़्यूचूरा कार

पेट्रोल-डीज़ल के बेहतर इंजन

कॉन्सेप्ट कार के डिज़ाइनरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये होती है कि वो कार में कुछ ऐसे बदलाव करें जिन्हें देखकर लोगों की आँखें चमक उठें.

कई दशकों तक कार निर्माताओं में इस बात को लेकर होड़ रही कि कैसे पेट्रोल-डीज़ल के बेहतर इंजन बनाये जाएं.

लेकिन अब कंपनियों की नज़र इलेक्ट्रिक इंजनों पर है. कंपनियाँ सेल्फ़ ड्राइविंग कारों पर ध्यान दे रही हैं और जो कंपनियाँ इस काम में दो क़दम आगे चल रही हैं, वो अन्य कार निर्माताओं के लिए संभावित ख़तरा बनती जा रही हैं.

जानकार मानते हैं कि जिस दिन कोई कंपनी एक सुरक्षित रोबोट कार की घोषणा कर देगी, उसी दिन परंपरागत कार बाज़ार गिर जाएगा और कार बाज़ार एक नया रूप लेगा.

विभिन्न दृष्टिकोण

फ़्रांस की कंपनी रेनॉ ने इस दिशा में बहुत तेज़ी से क़दम बढ़ाए हैं.

रेनॉ ने कॉन्सेप्ट कारों का एक पूरा बेड़ा तैयार किया है जो कि भविष्य की स्वचालित कारों की झलक देता है और इलेक्ट्रिक कारों पर विभिन्न दृष्टिकोण पेश करता है.

इस बेड़े में एक ऐसी कार भी है जो कि आपके लिविंग रूम का हिस्सा बन सकती है. ये कार एक रोबोट टैक्सी है जो कई लोगों को ले जाने के लिए तैयार की गई है.

हाल ही में आयोजित हुए पेरिस मोटर शो में रेनॉ ने ईज़ी-अल्टीमो नाम की एक कॉन्सेप्ट कार पेश की.

लकड़ी के फ़्लोर पर बनी ये कार बिना ड्राइवर के चलती है. इस कार की लंबाई काफ़ी ज़्यादा है. पेरिस मोटर शो में बहुत सारे लोगों की निगाहें इस कार पर जाकर रुकीं.

बीबीसी
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'अनिश्चित भविष्य'

रेनॉ के चीफ़ डिज़ाइनर लॉरेंस वेन डेन एकर ने अनुसार "ये कार हमारा एक सपना है. बड़े शहरों के लिए. उन ग्राहकों के लिए जो समार्ट शहरों में रहते हैं."

वो कहते हैं, "भविष्य में कारें ज़्यादा कनेक्टिड होंगी. आपका फ़ोन, घर और कार, सब आपस में जुड़े होंगे. इसका सीधा सा मतलब ये हैं कि आप सिर्फ़ एक कार नहीं चला रहे होंगे, बल्कि आप एक सेवा का लाभ उठा रहे होंगे."

लेकिन जो कारें कार निर्माता मोटर शोज़ में दिखा रहे हैं, चाहें वो दिल्ली का मोटर शो हो, पेरिस का हो या जिनेवा का, इन कारों को क्या वो वाक़ई इसी शक़्ल में सड़क पर ला पाएंगे?

ये एक ऐसा सवाल है जिसका सीधा जवाब किसी कंपनी के पास नहीं है. किसी को सीधे तौर पर ये नहीं पता है कि कार उद्योग किस दिशा में बढ़ रहा है.

लेकिन कंपनियाँ अपने डिज़ाइनरों की कल्पनाओं को बांधना नहीं चाहतीं. वो चाहती हैं कि उनके डिज़ाइनर सारे अनपेक्षित डिज़ाइन बनाएं और उन्हें दुनिया के सामने लायें.

दुनिया भर के कार निर्माता मानते हैं कि वो जिस 'अनिश्चित भविष्य' की ओर बढ़ रहे हैं, उसके लिए उन्हें अपनी तैयारी पूरी रखनी होगी.

एक जर्मन कार निर्माता ने कहा कि "कुछ नया बनाकर दिखाएंगे नहीं तो लोगों को पता कैसे चलेगा कि भविष्य की कारों पर कौन कंपनी क्या काम कर रही है."

इसलिए कॉन्सेप्ट कारें एक ऐसा सौदा हैं जो दुनिया भर के ग्राहकों की नज़र में इन कंपनियों के प्रचार का अच्छा और बड़ा साधन बन गई हैं.

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