चीन ने क्यों कहा जापान के साथ आना भारत की गलती
बीजिंग। पिछले हफ्ते जब से संयुक्त राष्ट्र की ओर से सिक्योरिटी काउंसिल में बदलाव की दस्तावेजों को मंजूर किया गया है, तब से लगता है कि दुनिया के कई देश भारत से नाराज हैं। इनमें से ही एक नाम है चीन का और चीन अब इस बात को पचा नहीं पा रहा है कि सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का एक रास्ता इस नए घटनाक्रम के साथ खुल गया है।

चीन ने अपनी हताशा अपनी मीडिया के जरिए निकाली है। चीन ने कहा है कि स्थायी सदस्यता के लिए जापान की मदद लेना भारत की सबसे बड़ी गलती थी।
चीन कभी नहीं करेगा भारत का समर्थन
शंघाई इंस्टीट्यूट्स फॉर इंटरनेशनल स्टडीज में रिसर्चर लिउ जोंगी ने ग्लोबल टाइम्स अखबार में इससे जुड़ा एक आर्टिकल लिखा है। उन्होंने इसमें लिखा है कि भारत के राजनेता, विदेश मामलों के जानकार और मीडिया भी चीन को भारत की राह का सबसे बड़ा रोड़ा मानते हैं।
आर्टिकल के मुताबिक, यूएनएससी में स्थायी सदस्यता के लिए बीजिंग ने कभी नई दिल्ली का समर्थन नहीं किया है। इसके चलते भारत अपने पड़ोसी देश पर दबाव डालने की हर संभव कोशिश कर रहा है।
लिउ के मुताबिक, भारत की सबसे बड़ी गलती यह है कि वह जापान, जर्मनी और ब्राजील का साथ ले रहा है। क्षेत्र में इन तीनों देशों के विरोधी भी हैं। जापान यदि स्थायी सदस्यता के लिए दावा करता है तो चीन और द. कोरिया विरोध करेंगे।
सुरक्षा परिषद स्थायी सदस्यता पर एक कदम और आगे इस आर्टिकल में आगे लिखा है कि सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए आवाज तेज होती जा रही है। इस मामले में G4 देश (ब्राजील, भारत, जर्मनी और जापान) सबसे ज्यादा सक्रिय हैं। इस पर बहस की मंजूरी मिल गई है, लेकिन अभी बहुत वक्त लगेगा।
क्या कहा अमेरिका ने
अमेरिका ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार की प्रक्रिया के मुद्दे पर भारत के साथ उसका मतभेद है, लेकिन साथ ही कहा है कि वह सिक्योरिटी काउंसिल के स्थाई सदस्य के रूप में भारत को शामिल करने के प्रति वचनबद्ध है।
दक्षिण और मध्य एशिया मामलों की अमेरिकी विदेश उपमंत्री निशा देसाई बिस्वाल ने बताया, (अमेरिका) राष्ट्रपति (ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत का अनुमोदन करने वाले बयान) एक बार नहीं बल्कि अनेक अवसरों पर दिए हैं। कोई भी भारत को शामिल करने पर समर्थन करने की वचनबद्धता से हट नहीं रहा है।












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