अब डॉक्टर, इंजीनियर बन गए हैं आतंकी संगठनों की पहली पसंद!
वाशिंगटन। आज से कुछ वर्षों पहले एक दौर था जब लोग मानते थे कि शिक्षा वह हथियार बन सकती है जिसकी मदद से दुनिया में बढ़ते आतंकवाद का सफाया किया जा सकता है। लेकिन बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुए आतंकी हमले ने इस बात को फिर से साफ कर दिया है कि आज अच्छे खासे परिवारों के ऐसे लोग भी आतंक की दुनिया में आज रहे हैं जिनके पास उच्च शिक्षा है।

62 प्रतिशत आतंकी शिक्षित
अमेरिका पर 9/11 हुए हमले में शामिल दो तिहाई आतंकी शिक्षित थे। ग्लास्गो का भारतीय मूल का आरोपी कफील अहमद भी एक इंजीनियर था। हाल ही में ब्रिटिश डॉक्टरों की हत्या की साजिश का पता लगाने वाले जांचकर्ताओं को इस
सच का पता वला था कि मॉड्यूल में शामिल ज्यादातर लोग डॉक्टर थे।
कई सर्वे पिछले कई दिनों में हुए हैं और इन सभी में एक ही बात सामने आई है कि आज करीब 62 प्रतिशत आतंकी ऐसे हैं जिनके पास अच्छी-खासी क्वालिफिकेशन है और जिनका फैमिली बैकग्राउंड भी काफी अच्छा है।
कैसे और कब होता है चरमपंथ की ओर झुकाव
वर्तमान समय में आतंकी अपने संगठन में भर्ती के लिए इंजीनियरों को प्राथमिकता दे रहे हैं। उनका मानना है कि इंजीनियरों के पास तकनीकी दक्षता होती है और यह उनके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
यूनाइटेड किंगडम में तैयार 'रैडिक्लाइजेशन ऑफ मुस्लिम,' इस टाइटल वाले डॉक्यूमेंट्स में कहा गया था कि 21 वर्ष की उम्र में कोई भी मुसलमान युवक चरमपंथी सोच की ओर आकर्षित होता है।
16 से 34 वर्ष की उम्र खतरनाक
वहीं इस डॉक्यूमेंट में यह भी कहा गया था कि 16 से 34 वर्ष की उम्र वाले मुसलमान युवक चरमपंथ के लिहाज से काफी संवेदनशील होते हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि दो वजहों से युवकों में चरमपंथ की ओर झुकाव बढ़ता है।
पढ़े-लिखे युवकों में यह धारणा है कि पश्चिमी देशों की नीतियों की वजह से इस्लाम खतरे में है। इसके अलावा अपने किसी करीबी की मौत भी उन्हें चरमपंथ की ओर से लेकर जाती है।
शिक्षित और अशिक्षित आतंकी में अंतर
इस डॉक्यूमेंट के मुताबिक 10 प्रतिशत युवकों ने आतंकवाद की राह अपनी जिंदगी में आई मुश्किलों की वजह से चुनी थी। उनका क्रिमिनल रिकॉर्ड्स से कोई ताल्लकु नहीं था। वहीं इस बात का पता भी चला था कि करीब दो तिहाई मुसलमान कैदी जो कि धार्मिक नहीं थे उन्हें जेल में चरमपंथी बनाया गया।
इसके अलावा जो आतंकी पढ़े-लिखे होंगे उन्हें दुनियाभर में मौजूद राजनीतिक मुद्दों की समझ काफी बेहतरी से होगी। वहीं अशिक्षित आतंकी विचारधारा की वजह पैसे और दूसरी चीजों से ज्यादा लगाव रखते हैं।
कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ एक मिथ है कि राह से भटके हुए युवा ही आतंकी बनते हैं। आज आतंकवाद की राह से जुड़ने वाले युवाओं को मालूम होता है कि वे क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं।
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