NeoCov वायरस को WHO ने बताया संभावित खतरा, जानिए जानलेवा वायरस को लेकर हर जानकारी

वुहान के वैज्ञानिकों ने इस वायरस की खोज की है, लिहाजा विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस खोज के लिए वुहान के वैज्ञानिकों का आभार जताया है।

नई दिल्ली, जनवरी 29: चीन के वुहान प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों ने एक और नियोकोव वायरस के बारे में पता लगाया है और चीन के वैज्ञानिकों ने कहा है कि, नियोकोव वायरस कोरोना वायरस की तुलना में काफी ज्यादा खतरनाक है और इससे संक्रमित तीन में से एक मरीज की मौत हो सकती है। जिसके बाद बूरी दुनिया में इस नये वायरस को लेकर टेंशन है। ऐसे में इस वायरस को लेकर डब्ल्यूएचओ ने क्या कहा है और क्या वास्तव में इस वायरस को लेकर अभी लोगों को डरने की जरूरत है...आईये नियोकोव वायरस को लेकर हर सवालों के जवाब समझते हैं।

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    क्या है नियोकोव वायरस?

    क्या है नियोकोव वायरस?

    नियोकोल वायरस के बारे में चीन के वुहान शहर के वैज्ञानिकों ने पता लगाया है और वैज्ञनिकों ने कहा है कि, ये वायरस चमगादड़ों से इंसानों में फैलने की क्षमता रखता है। हालांकि, अभी तक जो रिसर्च हुआ है, उसमें कहा गया है कि, फिलहाल नियोकोव वायरस में इंसानों में फैलने की क्षमता नहीं है, लेकिन अगर ये वायरस अपना सिर्फ एक वेरिएंट बनाता है, तो फिर ये वायरस चमगादड़ों से इंसानों में फैल जाएगा। प्रयोगशाला में रिसर्च के दौरान पता चला कि, नियोकोव वायरस, कोरोना वायरस की तुलना में और भी तेजी से फैलने की क्षमता रखता है और ये वायरस दक्षिण अफ्रीका के चमगादड़ों में मिला है। वुहान के वैज्ञानिकों ने रिसर्च में पाया है कि, कोरोना वायरस की ही तरह ये वायरस भी इंसान के कोशिकाओं में दाखिल होता है।

    म्यूटेशन के बाद ही होगा खतरनाक

    म्यूटेशन के बाद ही होगा खतरनाक

    वैज्ञानिकों ने कहा है कि, अभी इस वायरस को लेकर चिंता करने की बात सिर्फ इतनी है, कि ये वायरस इंसानों के बीच मौजूद है, लेकिन म्यूटेशन के बाद ही ये इंसानों के शरीर में दाखिल हो सकता है। रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि, इंसानी कोशिकाओं में दाखिल होने के लिए इस वायरस को केवल एक म्यूटेशन की ही जरूरत है और उसके बाद ये वायरस काफी ज्यादा जानलेवा बन जाएगा और इससे संक्रमित तीन में से एक मरीज की मौत हो सकती है। यानि, इस वायरस को लेकर चिंता करने की बात जरूर है।

    डब्ल्ब्यूएचओ ने नियोकोव पर क्या कहा?

    डब्ल्ब्यूएचओ ने नियोकोव पर क्या कहा?

    वुहान के वैज्ञानिकों ने इस वायरस की खोज की है, लिहाजा विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस खोज के लिए वुहान के वैज्ञानिकों का आभार जताया है, लेकिन डब्ल्यूएचओ ने फिलहाल कहा है कि, इस वायरस को लेकर अभी और भी ज्यादा स्टडी की जरूरत है। डब्ल्ब्यूएचओ ने कहा कि, "क्या अध्ययन में पाया गया वायरस मनुष्यों के लिए एक जोखिम पैदा करेगा, इसके लिए आगे और रिसर्च की आवश्यकता होगी," डब्ल्यूएचओ ने रूसी समाचार एजेंसी टास को बताया कि, डब्ल्यूएचओ वुहान के वैज्ञानिकों की नई खोज से अवगत है और इस पर प्रतिक्रिया देने के लिए विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन, खाद्य और कृषि संगठन के संपर्क में है।

    नियोकोव किस तरह का वायरस है?

    नियोकोव किस तरह का वायरस है?

    NeoCoV एक शब्द है जिसका इस्तेमाल MERS-CoV से जुड़े एक वायरस प्रकार के संदर्भ में किया जा रहा है। MERS-CoV एक विशालकाय कोरोनावायरस परिवार से संबंधित है और सात ज्ञात कोरोनावायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित कर सकता है। MERS-CoV ने 2010 के दशक के दौरान सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और दक्षिण कोरिया में बड़े प्रकोप का कारण बना था। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, MERS-CoV संक्रमण वाले लगभग 35% रोगियों की मृत्यु हो चुकी है। और NeoCoV इस विशेष कोरोनावायरस का एक संभावित रूप है।

    नियोकोव का रिसर्च पेपर क्या कहता है?

    नियोकोव का रिसर्च पेपर क्या कहता है?

    1. NeoCoV अभी तक खोजा गया MERS-CoV का निकटतम रिश्तेदार है और चमगादड़ में पाया जाता है


    2. NeoCoV संक्रमण पैदा करने के लिए कुछ प्रकार के बैट ACE2 (एक प्रकार की कोशिका जिसे जीव विज्ञान में रिसेप्टर्स कहा जाता है) का कुशलतापूर्वक उपयोग कर सकता है।

    3. नियोकोव से संक्रमित मरीजों में काफी तेज बुखार होने के साथ साथ सांस लेने में परेशानी हो सकती है। हालांकि, अभी तक पूरी तरह से नहीं माना गया है कि, ये वायरस चमगादड़ों से ही आया है, लेकिन जीनोम सिक्वेंसिंग में अभी तक इसके चमगादड़ों से ही उत्पत्ति को मजबूत तथ्य माना गया है और चमगादड़ों से ये वायरस ऊंटों में फैल गया था।

    फ्लोरोना, डेल्टाक्रॉन, ओमिक्रॉन बीए.2, नियोकोव

    फ्लोरोना, डेल्टाक्रॉन, ओमिक्रॉन बीए.2, नियोकोव

    हाल के कुछ दिनों में, फ्लोरोना, डेल्टाक्रॉन जैसे शब्द कोविड महामारी के दौरान शब्दावली का हिस्सा बन गए हैं, क्योंकि वैज्ञानिक SARS-CoV-2 के नए रूपों पर नजर रखने में लगे हुए हैं। हालांकि, फ्लोरोना और डेल्टाक्रॉन वास्तविक रूप नहीं हैं। जबकि फ्लोरोना, फ्लू और कोरोनावायरस का एक मेल है। वहीं, डेल्टाक्रोन वेरिएंट... डेल्टा और ओमिक्रॉन वेरिएंट का मेल है और डेल्टाक्रॉन पहले कभी अस्तित्व में नहीं था और यह दोनों वेरिएंट के मिलने से ही बना है। वहीं, Omicron BA.2 Omicron का एक उप-स्ट्रेन है, जो कि इस वक्त महामारी के ग्राफ को और तेजी से बढ़ा रहा है। वहीं, अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा और ओमिक्रॉन को डब्ल्यूएचओ चिंताजनक वेरिएंट ठहरा चुका है वहीं, NeoCov, SARS-CoV-2 नहीं है, बल्कि ये एक अलग वायरस है।

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