कौन हैं डोनाल्ड लू, जिनके ऊपर इमरान खान ने लगाया है, धमकी भरी चिट्ठी भेजकर सरकार गिराने का आरोप
इमरान खान ने कहा कि, अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू ने वॉशिंगटन में पाकिस्तान के राजदूत असद मजीद के साथ एक बैठक की थी...
इस्लामाबाद, अप्रैल 04: पाकिस्तान नेशनल असेंबली के डिप्टी स्पीकर ने इमरान खान की सरकार को गिराने में अमेरिका का हाथ मानते हुए अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग कराने से इनकार कर दिया और फिर इमरान खान की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने नेशनल असेंबली को भंग कर दिया। इस बीच इमरान खान ने उस अमेरिकी अधिकारी के नाम खुलासा कर दिया है, जिसपर धमकी भरी चिट्ठी भेजने का आरोप लगा है।

डोनाल्ड लू है अधिकारी का नाम
रविवार को नेशनल असेंबली के डिप्टी स्पीकर द्वारा विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को 'ट्रैश' करने के कुछ घंटों बाद प्रधानमंत्री इमरान खान ने उस अमेरिकी राजनयिक के नाम का खुलासा किया, जिसने कथित तौर पर पाकिस्तान को "धमकी भरी चिट्ठी" भेजी थी। पूर्व सांसदों के साथ एक बैठक के दौरान, पीएम इमरान खान ने नाम का खुलासा किया कि, अमेरिका से जो धमकी भरा संदेश मिला था, वह अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री मंत्री, जो अमेरिका के लिए एशियाई मामलों को देखते हैं, उनके द्वारा भेजा गया था और उनका नाम डोनाल्ड लू है।

पाकिस्तानी राजदूत से हुई थी मुलाकात
इमरान खान ने कहा कि, अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू ने वॉशिंगटन में पाकिस्तान के राजदूत असद मजीद के साथ एक बैठक की थी, जिसमें दोनों देशों के राजनयिकों ने एक दूसरे को नोट दिया था। इमरान खान ने आरोप लगाया है कि, इसी दौरान डोनाल्ड लू ने पाकिस्तानी राजनयिक को इमरान सरकार को गिराने की धमकी दी थी और कहा था कि, अगर इमरान खान को प्रधानमंत्री के पद से नहीं हटाया जाता है, तो फिर पाकिस्तान को इसके अंजाम भुगतने होंगे।

डोनाल्ड लू ने आरोपों से किया इनकार
आपको बता दें कि, जिस अधिकारी पर इमरान खान ने पाकिस्तान की आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने और इमरान सरकार के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया है, वो इस वक्त भारत का दौरा खत्म कर वापस अमेरिका लौटे हैं और हिंदुस्तान टाइम्स ने उनसे इमरान खान द्वारा लगाए गये आरोपों को लेकर सवाल पूछा है। डोनाल्ड लू ने इंटरव्यू के दौरान 'धमकी वाले संदेश' भेजने की बात से साफ तौर पर इनकार कर दिया है। हालांकि उन्होंने इमरान खान द्वारा लगाए गये आरोपों पर भी बोलने से मना कर दिया। वहीं, शीर्ष अमेरिकी अधिकारी ने कहा था कि अमेरिका पाकिस्तान की स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है और "हम पाकिस्तान की संवैधानिक प्रक्रिया और कानून के शासन का सम्मान और समर्थन करते हैं।"

इमरान खान के आरोपों में कितना दम?
31 मार्च को, पीएम इमरान खान ने दावा किया था, कि उन्हें एक 'देश' से उनकी सरकार के खिलाफ धमकी भरा पत्र मिला है। उन्होंने साजिश के पीछे अमेरिका का हाथ बताया। इमरान खान ने सीधे तौर पर "यूनाइटेड स्टेट्स ..." का नाम लिया, हालांकि, उन्होंने फिर अपने आप को संभालते हुए कहा कि "एक विदेशी देश" ने एक "धमकी देने वाला ज्ञापन" भेजा था जो पाकिस्तानी राष्ट्र के खिलाफ था। हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग और व्हाइट हाउस ने मिलकर इमरान खान के उस आरोप को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी सरकार को गिराने के प्रयास के लिए विदेशी शक्तियों को जिम्मेदार ठहराया था। व्हाइट हाउस ने इमरान खान के भाषण के बाद प्रतिक्रिया दी थी, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर अमेरिकी सरकार का नाम लिया था।

कौन हैं डोनाल्ड लू?
आपको बता दें कि, डोनाल्ड लू 15 सितंबर 2021 को दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के ब्यूरो के लिए अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री बने। इस असाइनमेंट से पहले, डोनाल्ड लू ने 2018 से 2021 तक किर्गिज़ गणराज्य में अमेरिकी राजदूत के तौर पर और 2015-2018 के बीच अल्बानिया में अमेरिकी राजदूत के तौर पर काम किया था। अल्बानिया में अपनी पोस्टिंग से पहले, डोनाल्ड लू ने पश्चिम अफ्रीका में इबोला संकट पर अमेरिका की तरफ से इबोला रिस्पांस टीम के डिप्टी कॉर्डिनेटर के तौर पर काय किया था। डोनाल्ड लू एक विदेश सेवा अधिकारी हैं, जिनके पास अमेरिकी सरकार में काम करने का 30 सालों से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने भारत में मिशन के उप प्रमुख (डीसीएम) (2010-2013), चार्जे डी'अफेयर्स (2009-2010) और अजरबैजान में डीसीएम (2007-2009) और किर्गिस्तान में डीसीएम (2003-2006) के रूप में काम किया है।

माने जाते हैं अमेरिका के बड़े अधिकारी
डोनाल्ड लू को इससे पहले अपने करियर में उन्हें मध्य एशियाई और दक्षिण काकेशस मामलों के कार्यालय, यूरोपीय मामलों के बतौर उपनिवेशक (2001-2003), भारत में पॉलिटिकल ऑफिसर (1997-2000), भारत में राजदूत के विशेष सहायक (1996-1997), त्बिलिसी, जॉर्जिया में कांसुलर अधिकारी (1994-1996), और, पाकिस्तान में राजनीतिक अधिकारी पेशावर (1992-1994) के तौर पर काम किया है। इसके साथ ही उन्होंने 1988-1990 तक पश्चिम अफ्रीका के सिएरा लियोन में एक पीस कॉर्प्स स्वयंसेवक के रूप में भी काम किया है।












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