Who is Neal Katyal: भारतीय मूल के वकील नील कात्याल कौन? कोर्ट में ट्रंप का टैरिफ गुरूर किया चकनाचूर, कितनी फीस
Neal Katyal Donald Trump Tariff: अमेरिका में टैरिफ को लेकर छिड़ा सियासी घमासान अब कानूनी जंग में तब्दील हो चुका है, जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपनी व्यापार नीति पर सुप्रीम कोर्ट से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है। 6-3 के बहुमत से आए इस ऐतिहासिक फैसले ने ट्रंप के उन टैरिफ को अवैध करार दिया, जो उन्होंने 'इमरजेंसी' कानून का हवाला देकर लगाए थे। लेकिन इस पूरी अदालती लड़ाई के पीछे जिस शख्स का दिमाग और दलीलें सबसे प्रभावी रहीं, वे हैं भारतीय मूल के दिग्गज वकील नील कात्याल।
कात्याल ने अदालत में यह साबित कर दिया कि राष्ट्रपति की शक्तियां कानून से ऊपर नहीं हैं और वे संसद के व्यापारिक अधिकारों का मनमाना इस्तेमाल नहीं कर सकते। ओबामा प्रशासन में सॉलिसिटर जनरल रहे कात्याल ने एक बार फिर व्हाइट हाउस की नीतियों को कानूनी मोर्चे पर 'चित' कर सुर्खियां बटोर ली हैं। आइए जानते हैं कौन हैं नील कात्याल, जिन्होंने अपनी कानूनी सूझबूझ से ट्रंप प्रशासन की रणनीति की हवा निकाल दी।

Who is Neal Katyal: कौन हैं नील कात्याल?
नील कात्याल का जन्म शिकागो में हुआ था और वे एक भारतीय अप्रवासी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता इंजीनियर और मां डॉक्टर हैं। नील ने डार्टमाउथ कॉलेज और येल लॉ स्कूल जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं से पढ़ाई की। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के जज स्टीफन ब्रेयर के लिए क्लर्क के रूप में काम किया, जहां उन्होंने कानूनी दांव-पेंचों को करीब से समझा। आज वे दुनिया के सबसे प्रभावशाली वकीलों में गिने जाते हैं।
Indian American Lawyer Neal Katyal: ट्रंप से पुरानी 'कानूनी' दुश्मनी
यह पहली बार नहीं है जब नील कात्याल और डोनाल्ड ट्रंप आमने-सामने हैं। कात्याल ने 2017 में ट्रंप के विवादित 'ट्रैवल बैन' को भी अदालत में चुनौती दी थी। उन्होंने ट्रंप के खिलाफ 'Impeach: The Case Against Donald Trump' नाम की किताब भी लिखी है। ताज़ा मामले में उन्होंने दलील दी कि व्यापार को कंट्रोल करने की शक्ति भले ही संसद के पास हो, लेकिन राष्ट्रपति इसका इस्तेमाल अपनी मनमर्जी से नहीं कर सकते। उनकी इस दलील ने ट्रंप के टैरिफ प्लान की हवा निकाल दी।
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Trump Tariff Supreme Court: ओबामा प्रशासन में बड़ा कद
नील कात्याल की काबिलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन्हें 2010 में अमेरिका का 'कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल' नियुक्त किया था। इस पद पर रहते हुए उन्होंने अमेरिकी सरकार का पक्ष सुप्रीम कोर्ट और अपीलीय अदालतों में मजबूती से रखा। वे संवैधानिक मामलों और जटिल अपीलीय मुकदमों के माहिर माने जाते हैं। वर्तमान में वे जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं और एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म में पार्टनर के रूप में काम कर रहे हैं।
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Neal Katyal legal fees: दुनिया के सबसे महंगे वकीलों में शुमार
भारतीय-अमेरिकी वकील नील कात्याल की गिनती दुनिया के सबसे महंगे और प्रभावशाली वकीलों में होती है। 'रॉयटर्स' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी कानूनी फीस $3,250 (लगभग ₹2.7 लाख) प्रति घंटा तक पहुंच चुकी है। संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ कात्याल को उनकी असाधारण कानूनी सूझबूझ के लिए 2017 और 2023 में 'लिटिगेटर ऑफ द ईयर' चुना गया। फोर्ब्स की टॉप 200 वकीलों की सूची में शामिल कात्याल ने ट्रंप के टैरिफ जैसे बड़े मामलों को चुनौती देकर अपनी साख और मजबूत की है।
50 से ज्यादा केस में ऐतिहासिक जीत
कात्याल का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद शानदार है। उन्होंने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में 50 से अधिक मामलों की पैरवी की है। उन्होंने न केवल 1965 के वोटिंग राइट्स एक्ट का बचाव किया, बल्कि जॉर्ज फ्लॉयड मर्डर केस में विशेष अभियोजक (Prosecutor) के तौर पर भी भूमिका निभाई। उनकी कानूनी समझ इतनी गहरी है कि वे जटिल से जटिल मुद्दे को कोर्ट के सामने सरल भाषा में रखने के लिए जाने जाते हैं। इसी वजह से उन्हें 'लिटिगेटर ऑफ द ईयर' जैसे सम्मान मिले हैं।
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कई अवॉर्ड्स से हो चुके हैं सम्मानित
नील कात्याल की सफलता की गूंज पूरी दुनिया में है। उन्हें अमेरिकी न्याय विभाग के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'एडमंड रैंडॉल्फ अवॉर्ड' से सम्मानित किया जा चुका है। 'द अमेरिकन लॉयर' ने उन्हें दो बार साल का सर्वश्रेष्ठ वकील चुना, वहीं फोर्ब्स ने 2024 और 2025 में उन्हें अमेरिका के टॉप 200 वकीलों की सूची में शामिल किया। वे न केवल भारतीय समुदाय के लिए गौरव हैं, बल्कि अमेरिका के कानूनी ढांचे को बनाए रखने में एक मजबूत स्तंभ की तरह काम कर रहे हैं।












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