Trump Tariff Strikes Down Reason: कोर्ट से ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ क्यों रद्द? Toy कंपनी ने बिगाड़ा खेल?- समझें
Donald Trump Tariff Strikes Down Reason: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के दूसरे कार्यकाल में लगाए गए स्वीपिंग ग्लोबल टैरिफ को 6-3 के बहुमत से रद्द कर दिया। यह फैसला ट्रंप की आक्रामक ट्रेड पॉलिसी के लिए बड़ा झटका है, जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता पैदा की थी।
ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट (IEEPA) का सहारा लेकर कांग्रेस (US संसद) की मंजूरी बिना ही कनाडा, भारत समेत ज्यादातर ट्रेडिंग पार्टनर्स पर टैरिफ थोपे थे। लेकिन कोर्ट ने इसे सत्ता का दुरुपयोग माना। इसमें एक एजुकेशनल टॉय कंपनी की भूमिका अहम रही, जिसने ट्रंप के टैरिफ 'खेल' को बिगाड़ दिया। आइए 4 पॉइंट्स में पूरा मामला समझते हैं...

1. What Is Trump Tariff Plan: क्या था ट्रंप का प्लान?
ट्रंप ने अप्रैल 2025 में 'ट्रेड डेफिसिट' को नेशनल इमरजेंसी बताकर IEEPA के तहत ग्लोबल टैरिफ लगाए थे। इसमें 100 से ज्यादा देशों से इम्पोर्ट पर 50% तक टैरिफ था (भारत पर हाल में 25% घटाया गया, आगे 18% होने वाला था)। ट्रंप का दावा था कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी और ट्रेड घाटा कम होगा। लेकिन यह पॉलिसी सहयोगी देशों को अलग कर रही थी और अर्थव्यवस्था में अराजकता पैदा कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे 6-3 से रद्द कर दिया, जिसमें चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने कहा कि राष्ट्रपति को ऐसी 'असाधारण पावर' के लिए कांग्रेस (US संसद) की स्पष्ट मंजूरी जरूरी है, जो ट्रंप के पास नहीं थी।
2. मुख्य वजह: IEEPA का दुरुपयोग और US संसद की पावर
अमेरिकी संविधान टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार कांग्रेस (US संसद) को देता है, राष्ट्रपति को नहीं। ट्रंप ने IEEPA (मूल रूप से शत्रु देशों पर सैंक्शन के लिए) का इस्तेमाल कर कांग्रेस को बायपास किया था। कोर्ट ने इसे 'अभूतपूर्व दुरुपयोग' बताया। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इससे $133-175 बिलियन (₹11-14 लाख करोड़) से ज्यादा टैरिफ कलेक्ट हुए थे, जो अब रिफंड हो सकते हैं। जस्टिस ब्रेट कावानाह ने डिसेंट में कहा कि टैरिफ 'नीतिगत रूप से सही या गलत हो सकते हैं, लेकिन कानूनी रूप से वैध हैं', लेकिन बहुमत ने इसे खारिज कर दिया।
3. Toy Company Spoil Donald Trump Game: टॉय कंपनी ने कैसे बिगाड़ा खेल?
इलिनॉय-बेस्ड एजुकेशनल टॉय कंपनी लर्निंग रिसोर्सेज इंक. (Learning Resources, Inc.) ने ट्रंप के खिलाफ प्रमुख केस फाइल किया था (Learning Resources, Inc. v. Trump)। कंपनी का तर्क था कि टैरिफ से इम्पोर्ट कॉस्ट बढ़ी, जो सत्ता का दुरुपयोग है। यह कंपनी एजुकेशनल टॉय बनाती है और ट्रंप के टैरिफ से बुरी तरह प्रभावित हुई थी। उनके अलावा 12 राज्य (एरिजोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, इलिनोइस, मेन, मिनेसोटा, नेवादा, न्यू मैक्सिको, न्यूयॉर्क, ओरेगन और वरमोंट) और अन्य बिजनेस (जैसे प्लंबिंग, वाइन इम्पोर्टर) ने भी चैलेंज किया। कोर्ट ने इसी केस में फैसला सुनाया, जिससे ट्रंप की पॉलिसी का 'खेल' बिगड़ गया। कंपनी अब रिफंड की मांग कर सकती है, जैसे कॉस्टको जैसी अन्य फर्म्स कर रही हैं।
4. क्या होगा असर? ट्रंप की आगे की प्लानिंग
यह फैसला ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी के मूल को हिलाता है, जिससे वैश्विक सहयोगी राहत महसूस करेंगे। रिफंड प्रोसेस 'जटिल और अस्त-व्यस्त' होगी, लेकिन कंपनियां (जैसे टॉय फर्म्स) अब कोर्ट में क्लेम कर सकती हैं। ट्रंप ने 'गेम टू' प्लान का ऐलान किया है - वे अन्य कानूनों (जैसे नेशनल सिक्योरिटी या अनफेयर ट्रेड एक्ट) से कुछ टैरिफ बचाने की कोशिश करेंगे, लेकिन IEEPA जैसा लचीलापन नहीं मिलेगा। अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता कम होगी, लेकिन ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति पर सवाल उठेंगे।
यह फैसला ट्रंप के लिए राजनीतिक झटका है, लेकिन वैश्विक ट्रेड के लिए राहत। आगे ट्रंप प्रशासन वैकल्पिक रास्ते तलाश रहा है।












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