Trump Tariffs Down: US कोर्ट ने उतारा ट्रंप का टैरिफ भूत, लताड़ से निकल गई दादागीरी, भारत पर क्या होगा असर?
America: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया। ट्रंप ने इन टैरिफ को लागू करने के लिए नेशनल इमरजेंसी से जुड़े एक कानून का सहारा लिया था। अदालत के इस फैसले ने उनके उस बड़े और विवादास्पद दावे को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति की शक्तियों का व्यापक इस्तेमाल किया था। इस फैसले का असर सिर्फ अमेरिका पर ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। आइए जानते हैं भारत पर इसका क्या असर पड़ेगा।
6-3 के बहुमत से आया फैसला
जजों ने 6-3 के बहुमत से निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि रिपब्लिकन राष्ट्रपति ने 1977 के कानून का उपयोग अपनी संवैधानिक शक्ति से आगे बढ़कर किया। यह फैसला उन व्यवसायों और 12 अमेरिकी राज्यों द्वारा दायर याचिकाओं के बाद आया, जो ट्रंप के एकतरफा फैसले से प्रभावित हुए थे। इन राज्यों में अधिकांश डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले राज्य शामिल थे।

किन राज्यों और कंपनियों ने चुनौती दी
टैरिफ के खिलाफ दायर मुकदमों में तीन अलग-अलग मामले शामिल थे। यू.एस. कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट ने पांच छोटे आयातक व्यवसायों और 12 राज्यों- एरिजोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, इलिनोइस, मेन, मिनेसोटा, नेवादा, न्यू मैक्सिको, न्यूयॉर्क, ओरेगन और वरमोंट- के पक्ष में फैसला दिया। इसके अलावा, वाशिंगटन स्थित एक फेडेरल जज ने लर्निंग रिसोर्सेज नाम की एक खिलौना बनाने वाली कंपनी के पक्ष में भी फैसला सुनाया।
भारत पर बेवजह टैरिफ
हालांकि अमेरिका दशकों से व्यापार घाटे का सामना कर रहा है, ट्रंप ने इसे नेशनल इमरजेंसी घोषित करने का आधार बनाया और IEEPA का आह्वान किया। फरवरी और मार्च 2025 में उन्होंने चीन, कनाडा और मैक्सिको पर टैरिफ लगाए, यह कहते हुए कि फेंटेनाइल और अवैध दवाओं की तस्करी नेशनल इमरजेंसी है। जबकि भारत के खिलाफ ऐसे कोई तर्क नहीं मिले तो जबरन टैरिफ थोपा गया।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील और भारतीय बाजार पर क्या असर?
भारतीय बाजार के एक्सर्ट्स का कहना है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ रद्द किए जाने का असर भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर भी पड़ेगा। अब जब रेसीप्रोकल टैरिफ हट गए हैं, तो भारत को अमेरिका को होने वाले अपने कुल निर्यात के 55 प्रतिशत हिस्से पर 18 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स नहीं देना होगा और इन सामानों पर सिर्फ स्टैंडर्ड एमएफएन (Most Favoured Nation) टैरिफ ही लागू होंगे। हालांकि भारत के बाकी कुछ निर्यात पर सेक्शन 232 के तहत टैरिफ जारी रहेंगे, यानी स्टील और एल्युमीनियम पर 50 प्रतिशत और कुछ ऑटो कंपोनेंट्स पर 25 प्रतिशत टैक्स लगता रहेगा। वहीं राहत की बात यह है कि स्मार्टफोन, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और दवाइयों जैसे कुल 40 प्रतिशत निर्यात पर कोई अमेरिकी टैरिफ नहीं लगेगा। ऐसे में इस नए बदलाव को देखते हुए भारत को अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील पर दोबारा सोचने की जरूरत हो सकती है।
भारतीय एक्सपोर्टर्स का मिलेगा रिफंड?
एक्सपर्ट्स मानें तो, सुप्रीम कोर्ट के ट्रंप के टैरिफ को रद्द करने के बाद उन एक्सपोर्ट्स को पैसा वापस मिल सकता है, जिन्होंने अमेरिकी बाजारों में अपने सामान को बेचने के लिए टैरिफ के रूप में काफी पैसा अमेरिकी सरकार के खजाने में भरा है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आगे किस तरह से लागू किया जाता है, इस पर भारत सहित दुनियाभर की नजरें लगी हैं। क्योंकि इसमें शर्तों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

दिसंबर 2025 से आंकड़े छुपाने लगे थे ट्रंप
ट्रंप प्रशासन का दावा था कि इन टैरिफ से अगले 10 सालों में अमेरिका को खरबों डॉलर का राजस्व मिलेगा। हालांकि, प्रशासन ने 14 दिसंबर के बाद से टैरिफ वसूली के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए। इससे पारदर्शिता को लेकर सवाल भी उठे।
कितने पैसे बनाए टैरिफ से?
पेन-व्हार्टन बजट मॉडल के अर्थशास्त्रियों ने 20 फरवरी, 2026 को अनुमान लगाया कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट (IEEPA) के तहत ट्रंप के टैरिफ से 175 बिलियन डॉलर से अधिक की राशि पहले ही वसूली जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह रकम वापस करनी पड़ेगी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर से 15 दिसंबर तक जो टैरिफ वसूले गए, वे ट्रंप द्वारा लगाए गए कुल राजस्व का लगभग एक-तिहाई हिस्सा थे। IEEPA कानून राष्ट्रपति को नेशनल इमरजेंसी की स्थिति में व्यापार को 'रेगुलेट' करने की अनुमति देता है।
संविधान बड़ा या राष्ट्रपति
अमेरिकी संविधान के मुताबिक कर और टैरिफ लगाने का अधिकार कांग्रेस के पास होता है, राष्ट्रपति के पास नहीं। लेकिन ट्रंप ने कांग्रेस की मंजूरी के बिना IEEPA कानून का उपयोग करते हुए लगभग हर बड़े अमेरिकी व्यापारिक साझेदार पर टैरिफ लगा दिए। हालांकि, उन्होंने कुछ अन्य कानूनों के तहत भी अतिरिक्त टैरिफ लगाए थे, जो इस मामले में विवाद का हिस्सा नहीं थे।
IEEPA का इस्तेमाल करने वाले पहले राष्ट्रपति
ट्रंप पहले ऐसे राष्ट्रपति बने जिन्होंने IEEPA का उपयोग टैरिफ लगाने के लिए किया। अपने दूसरे कार्यकाल में उन्होंने कार्यकारी शक्तियों को कई क्षेत्रों में आक्रामक रूप से आगे बढ़ाया। इसमें इमीग्रेशन नीति, संघीय एजेंसियों के अधिकारियों की बर्खास्तगी, घरेलू सैन्य तैनाती और विदेशों में सैन्य अभियान जैसे मुद्दे शामिल थे।
अब क्या कर सकते हैं ट्रंप?
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट और अन्य अधिकारियों ने कहा कि सरकार अन्य कानूनी रास्तों का इस्तेमाल करके अधिकतम टैरिफ को बनाए रखने की कोशिश करेगी। एक प्रावधान ऐसा है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे की स्थिति में आयातित वस्तुओं पर टैरिफ लगाने की इजाजत देता है। बेसेंट की बात का मतलब ये है कि भले ही सुप्रीम कोर्ट ने उनके इरादों पर नकेल कस दी हो, लेकिन वे अभी भी दूसरे रास्तों से कई देशों पर ज्यादा से ज्यादा टैरिफ थोपने की कोशिश जारी रखेंगे
जिस कानून के तहत लगाया 'टैरिफ', उसमें जिक्र ही नहीं
IEEPA कानून में 'टैरिफ' शब्द का सीधा उल्लेख नहीं है। ट्रंप के न्याय विभाग ने दलील दी थी कि आयात को रेगुलेट करने का अधिकार टैरिफ लगाने की परमीशन देता है। कांग्रेस के बजट कार्यालय ने अनुमान लगाया है कि अगर सभी मौजूदा टैरिफ, जिनमें IEEPA आधारित शुल्क भी शामिल हैं, जारी रहते हैं, तो वे अगले दशक में हर साल लगभग 300 बिलियन डॉलर ला सकते हैं।
राजनीतिक मामलों में भी टैरिफ का इस्तेमाल
ट्रंप ने टैरिफ का इस्तेमाल रियायतें हासिल करने, व्यापार समझौतों पर फिर से बातचीत करने और गैर-व्यापारिक राजनीतिक मामलों पर नाराजगी जताने के लिए भी किया। इनमें ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो पर मुकदमा, रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में भारत द्वारा रूसी तेल खरीद, और कनाडा के ओंटारियो प्रांत का एंटी-टैरिफ विज्ञापन शामिल थे।
किसने बनाया था IEEPA कानून?
28 दिसंबर 1977 के दिन IEEPA को कांग्रेस ने पारित किया था और तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने इस पर हस्ताक्षर किए थे। इस कानून को बनाते समय कांग्रेस ने पहले के कानूनों की तुलना में राष्ट्रपति की शक्तियों पर अतिरिक्त सीमाएं भी लगाई थीं।
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