Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Mark Carney: 'बैंक ऑफ इंग्लैंड' से कनाडा के नए प्रधानमंत्री तक, कौन हैं पीएम मार्क कार्नी, जानिए पूरी प्रोफाइल

Mark Carney: कनाडा के जाने-माने अर्थशास्त्री और बैंक ऑफ इंग्लैंड के पूर्व गवर्नर मार्क जोसेफ कार्नी ने एक बार फिर कनाडाई लोगों का भरोसा जीतने में कामयाब रहें और पीएम दौड़ के रेस जीत गए। उन्होंने पिछले ही महीने कनाडा के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी उसके बाद कनाडा में अचानक से आम चुनाव की घोषणा हो गई।

उसके बाद 28 अप्रैल को हुए आम चुनाव में कार्नी ने लिबरल पार्टी को ऐतिहासिक चौथी जीत दिलाई। दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने वाले मार्क कार्नी कौन हैं? प्राइवेट बैंकर से कनाडा के पीएम बनने तक का सफर विस्तार से समझिए...

Mark-Carney

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्क कार्नी जिन्हें बैंक ऑफ इंग्लैंड के 300 सौ साल पूराने इतिहास में पहले गैर-ब्रिटिश गवर्नर के रूप में जाना जाता है। वैसे तो मार्क कार्नी का राजनीति में कोई खास अनुभव नहीं रहा है, फिर भी उन्होंने मार्च 2025 की शुरुआत में लिबरल पार्टी के नेतृत्व के चुनाव लड़ा और जस्टिन ट्रूडो को हटा कर प्रधानमंत्री बनें।

Mark Carney: स्कॉलरशिप से अर्थशास्त्री बनने तक का सफर

कनाडा के फोर्ट स्मिथ में 16 मार्च 1965 को जन्में कार्नी जाने-माने अर्थशास्त्री हैं। उनके तीन दादा-दादी आयरलैंड के काउंटी मेयो से थे, जिसके चलते वे आयरिश और कनाडाई दोनों नागरिकताएं रखते हैं। 2018 में उन्होंने ब्रिटिश नागरिकता भी प्राप्त की थी, लेकिन अब उन्होंने यह घोषणा की है कि वे ब्रिटिश और आयरिश नागरिकता छोड़ देंगे, क्योंकि वे मानते हैं कि एक प्रधानमंत्री को केवल कनाडाई नागरिकता ही होनी चाहिए।

हाई स्कूल प्रिंसिपल के बेटे मार्क कार्नी ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप पर पढ़ाई की इसके बाद उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में पीएचडी की डिग्री लिया। उनका रिसर्च डोमेस्टिक कंपटीशन और नेशल कंपटीशन के बीच संबंध पर केंद्रित था। आज के दौर में देखा जाए तो कार्नी का ये रिसर्च एक ऐसा मुद्दा है जो आज अमेरिकी टैरिफ वॉर के बीच बेहद प्रासंगिक हो गया है।

Mark Carney: फॉरवर्ड गाइडेंस नीति का ऐतिहासिक फैसला

मार्क कार्नी ने 2003 में प्राइवेट सेक्टर छोड़कर बैंक ऑफ कनाडा में डिप्टी गवर्नर के रूप में काम करना शुरू किया। 2007 में जब उन्हें बैंक ऑफ कनाडा का गवर्नर नियुक्त किया गया उस समय वैश्विक बाजारों में मंदी का दौर चल रहा था।

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, उस कठिन समय में उनकी बाजार नीतियों और नेतृत्व को सराहा गया, जिसने कनाडा को सबसे बुरे आर्थिक संकट से बचाने में मदद की। उन्होंने ब्याज दरों में कटौती और 'फॉरवर्ड गाइडेंस' नीति लागू कर बाजार में निवेश को प्रोत्साहित किया।

2013 में, वे बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर बने और कई महत्वपूर्ण सुधार किए। उन्होंने ब्याज दर बैठकों की संख्या घटाना और निर्णयों के साथ मिनट्स प्रकाशित करना। ब्रेक्जिट जनमत संग्रह के समय उन्होंने देश को भरोसा दिलाने के लिए सीधे जनता से संवाद किया, जिसे वे अपने करियर का 'सबसे कठिन दिन' बताते हैं।

Mark Carney का ट्रंप से सीधा टकराव

  • अपने वित्तीय करियर के दौरान कार्नी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी निपटना सीखा। ट्रंप के कनाडा पर लगाए गए भारी टैरिफ और 'कनाडा को 51वां राज्य' बनाने जैसी विवादास्पद टिप्पणियों पर कार्नी ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी।
  • उन्होंने ट्रंप की तुलना हैरी पॉटर के खलनायक वोल्डेमॉर्ट से करते हुए कहा, "मैं इन अपमानजनक टिप्पणियों को दोहराना भी नहीं चाहता।"
  • कार्नी ने कहा है कि जब तक अमेरिका सम्मान नहीं दिखाता और मुक्त एवं निष्पक्ष व्यापार के लिए विश्वसनीय प्रतिबद्धताएं नहीं करता, तब तक कनाडा जवाबी टैरिफ जारी रखेगा।

Mark Carneyका राजनीति में कदम

लिबरल पार्टी पिछले एक दशक से उन्हें राजनीति में लाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन कार्नी ने हमेशा इससे इनकार किया था। एक बार तो उन्होंने मजाक में कहा था, "क्यों न मैं सर्कस का जोकर बन जाऊं?" हालात तब बदले जब जनवरी में जस्टिन ट्रूडो ने अपने वित्त मंत्री क्रिस्टिया फ्रीलैंड के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया।

कार्नी ने वैश्विक व्यापार संकट और ट्रंप की बाजार नीतियों पर अपने एक्सपीरियंस के कारण कनाडा के पीएम नेतृत्व की दौड़ में आगेग रहे और भारी बहुमत से जीते।

हालांकि, विपक्षी कंजरवेटिव पार्टी ने उन पर ब्रुकफील्ड एसेट मैनेजमेंट का मुख्यालय टोरंटो से न्यूयॉर्क स्थानांतरित करने में भूमिका निभाने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही, उनके वित्तीय संपत्तियों को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की जा रही है, हालांकि वे कह चुके हैं कि उनकी संपत्तियां एक ब्लाइंड ट्रस्ट में रखी गई हैं और वे सभी नियमों का पालन कर रहे हैं।

Mark Carney के वो महत्वपूर्ण निर्णय

  • कार्नी पर्यावरणीय स्थिरता के प्रबल समर्थक माने जाते हैं। वे 2019 में संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन के विशेष दूत बने और 2021 में ग्लासगो फाइनेंशियल अलायंस फॉर नेट जीरो की शुरुआत की।
  • प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने कनाडा की विवादास्पद कार्बन टैक्स नीति को 1 अप्रैल से समाप्त करने का आदेश दिया, हालांकि वे अतीत में इसी तरह की नीतियों के समर्थक रहे हैं। उन्होंने कनाडा को "स्वच्छ और पारंपरिक ऊर्जा महाशक्ति" बनाने की योजना पेश की है, और प्रमुख परियोजनाओं के अनुमोदन में तेजी लाने की वकालत की है।
  • कार्नी ने कहा है कि उनका सबसे बड़ा मिशन कनाडा की अर्थव्यवस्था को विकास की पटरी पर बनाए रखना होगा, भले ही अमेरिका के साथ व्यापार में गिरावट आए।
  • आज कनाडा में चल रहे वोटिंग काउंट के परिणा को देखना काफी दिलचस्प होगा कि क्या कनाडाई जनता उनके अनुभव और वादों पर भरोसा जताती है या फिर सत्ता में बदलाव का मन बनाती है।

PM Modi ने दी कार्नी को बधाई

पीएम मोदी ने मार्क कार्नी के कनाडा के प्रधानमंत्री चुने जाने पर बधाई दिया।

PM मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट लिखते हुए कहा "भारत और कनाडा साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता और लोगों के बीच जीवंत संबंधों से बंधे हैं। मैं हमारी साझेदारी को मजबूत करने और हमारे लोगों के लिए अधिक से अधिक अवसरों को खोलने के लिए आपके साथ काम करने के लिए उत्सुक हूं।"

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+