ऋषि सुनक को ब्रिटेन के पीएम पद की रेस में चुनौती देने वाली लिज़ ट्रस कौन हैं?
लिज़ ट्रस ने अपने स्कूल के दिनों में एक नाटक में मारग्रेट थैचर का किरदार निभाया था जो ब्रिटेन की मशहूर प्रधानमंत्री थीं. लेकिन अब उनकी नज़र असल ज़िंदगी में प्रधानमंत्री बनने की राह पर है.
ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री की दौड़ में अंतिम दो उम्मीदवारों का फ़ैसला हो गया है. बोरिस जॉनसन की जगह पीएम पद पर अब या तो ऋषि सुनक काबिज़ होंगे या लिज़ ट्रस बैठेंगी.
बुधवार को कंज़रवेटिव सांसदों के बीच अंतिम दौर के मतदान में यह फ़ैसला हुआ. पाँचवें दौर के मतदान में ऋषि सुनक को सबसे अधिक 137 वोट मिले हैं, जबकि लिज़ ट्रस को 113 वोट मिले.
अब पार्टी के 1.6 लाख सदस्य पोस्टल बैलेट से मतदान करेंगे. 5 सितंबर को ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री के नाम का एलान होगा.
बीते साल, 46 साल की उम्र में लिज़ ट्रस ब्रिटेन की दूसरी महिला विदेश मंत्री बनीं. इससे 15 साल पहले लेबर की मारग्रेट बैकेट विदेश मंत्री बनी थीं.
हालांकि ब्रिटिश संसद में, तुलनात्मक तौर पर उनका अनुभव बहुत अधिक नहीं हैं लेकिन उन्होंने इस कम समय में ही कई अलग-अलग पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं. वह कई हाई-प्रोफ़ाइल पदों पर रही हैं.
ए-लिस्ट उम्मीदवार
लिज़ ट्रस का जन्म साल 1975 में, ऑक्सफ़ोर्ड में हुआ. ट्रस के अभिभावकों के बारे में जो जानकारी प्राप्त है, उसके मुताबिक़, उनके पिता गणित के प्रोफ़ेसर और मां नर्स रही हैं.
जब लिज़ चार साल की थीं, उसी समय वह स्कॉटलैंड में पैस्ले चली गईं थीं. इसके बाद साल 1983 में उनके एक अभिनय में उनकी राजनेता बनने की इच्छा नज़र आ गई थी. उन्होंने अपने स्कूल के एक नाटक में मारग्रेट थैचर का रोल प्ले किया था.
इसके बाद उनका परिवार लीड्स चला गया, जहां उन्होंने स्टेट सेकेंडरी स्कूल से आगे की तालीम हासिल की.
बीबीसी रेडियो 4 के प्रोफाइल से बात करते हुए, उनके छोटे भाई ने बताया कि उनका परिवार क्लूडो और मोनोपॉली जैसे बोर्ड गेम खेला करता था.
उनके भाई ने बताया कि लिज़ ट्रस को हारना पसंद नहीं है और खेलने के दौरान जब उन्हें लग जाता था कि वो हारने वाली हैं, तो वह खेल छोड़कर गायब हो जाती थीं.
ट्रस ने ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से उच्च-शिक्षा हासिल की है. उन्होंने दर्शनशास्त्र, राजनीति और अर्थशास्त्र की है. वो इसके साथ-साथ राजनीति में भी सक्रिय रहीं.
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शुरुआती दौर में वह में लिबरल डेमोक्रेट्स के साथ रहीं और बाद में कंज़रवेटिव्स पार्टी के लिए सक्रिय रहते हुए काम किया.
इसके बाद उन्होंने शेल और केबल एंड वायरलेस के लिए अकाउंटेंट के तौर पर काम भी किया. लेकिन वो हमेशा से संसद ही जाना चाहती थीं.
साल 2001 और 2005 के आम-चुनावों में हेम्सवर्थ और काडर-वैली से कंज़रवेटिव पार्टी की उम्मीदवार थीं. हालांकि वह दोनों में से कोई भी सीट जीतने में कामयाब नहीं हो सकीं लेकिन साल 2006 में ग्रीनिच की काउंसलर चुनी गईं.
साल 2008 से उन्होंने राइट-ऑफ़-सेंटर रिफ़ॉर्म थिंक टैंक के उप-निदेशक के तौर पर काम करना शुरू किया.
वह कंज़रवेटिव नेता डेविड कैमरन की पसंद वाले उम्मीदवारों की "ए-लिस्ट" का भी हिस्सा रहीं. इसके बाद वह साल 2010 में, टोरी पार्टी की सुरक्षित दक्षिण पश्चिम नॉरफ़ॉक सीट से 13,140-वोट बहुमत के साथ विजयी रहीं और सांसद चुनी गईं.
संसद में रहते हुए उन्होंने 'ब्रिटैनिया-अनचेन्ड' नाम की किताब का सह-लेखन भी किया.
साल 2012 में, सांसद बनने के दो साल बाद वह तात्कालिक सरकार का हिस्सा बनीं. वह सरकार में बतौर शिक्षा मंत्री शामिल हुईं.
चीज़ स्पीच को लेकर चर्चा में आईं
स्कूलों में नए सुधार को लेकर उनके और लिब डेम के उप-प्रधानमंत्री निक क्लेग के बीच काफी विवाद भी हुआ लेकिन कैमरन ने उन्हें साल 2014 में पर्यावरण मंत्री के रूप पदोन्नत किया.
इसके बाद साल 2015 में वह एक बार फिर चर्चा में आईं.
साल 2015 में कंज़रवेटिव कॉन्फ्रेंस में पनीर के आयात करने पर भाषण देने के लिए उनका मज़ाक उड़ाया गया था. लेकिन ट्रोलर्स की टिप्पणियों के बावजूद वो आगे ही बढ़ती रहीं.
ब्रेक्ज़िट यानी यूरोपीय संघ से अलग होने के लिए हुए जनमत संग्रह में उन्होंने यूरोपीय संघ में बने रहने का समर्थन किया था. उस समय उन्होंने कहा था कि ब्रेक्ज़िट "एक त्रासदी" होगा.
हालांकि, बाद में उन्होंने अपने विचार बदल दिए थे.
साल 2016 में, वह थेरेसा मे के नेतृत्व वाली सरकार में जस्टिस सेक्रेटरी (न्याय मंत्री) बनीं. उसी के अगले साल वह वित्त मंत्रालय में मुख्य सचिव बनीं.
साल 2019 में बोरिस जॉनसन ने प्रधानमंत्री बनने के बाद, ट्रस को अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री का कार्यभार सौंपा.
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विदेश मंत्री के रूप में उन्होंने उत्तरी आयरलैंड प्रोटोकॉल की उलझी हुई समस्या को हल करने की मांग की. उनके इस कदम की यूरोपीय-संघ ने काफी आलोचना की थी.
उन्होंने ईरान में गिरफ़्तार हुए दो ब्रिटिश-ईरानी नागरिकों, नाज़नीन ज़गारी-रैटक्लिफ और अनुशेह अशूरी की रिहाई भी सुनिश्चित की.
रूस के यूक्रेन पर आक्रमण को लेकर भी वह सक्रिय रही हैं. उन्होंने हमेशा इस पर सख़्त रवैया ही अपनाया. उन्होंने अपने एक बयान में कहा था कि रूसी सेनाओं को देश से बाहर खदेड़ दिया जाना चाहिए.
ब्रिटेन के जिन लोगों ने निजी तौर पर यूक्रेन जाकर युद्ध में शामिल होने की इच्छा जताई थी, उनका समर्थन करने पर भी ट्रस को काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था.
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