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Iran War: 'ट्रंप को छोड़ेंगे नहीं, ऐसा हाल करेंगे दुनिया याद रखेगी', US को धमकी देने वाले Ali Larijani कौन?

Iran War Update (Ali Larijani): मिडिल ईस्ट में तनाव अब खुली जंग में बदल चुका है और हालात हर दिन और गंभीर होते जा रहे हैं। इसी बीच ईरान के वरिष्ठ नेता अली लारीजानी (Ali Larijan) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि ईरान अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला जरूर लेगा और ट्रंप को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। अली लारीजानी ने कहा, ''किसी भी कीमत पर ट्रंप को छोड़ेंगे नहीं,अमेरिका का ऐसा हाल करेंगे जो दुनिया याद रखेगी।''

अली लारीजानी ने कहा, "अमेरिका और इजरायल ने ईरान के दिल पर हमला कर उसे जख्मी किया है। हम भी उन्हें ऐसा जवाब देंगे कि वे इसे कभी भूल नहीं पाएंगे। जायोनी ताकतों और अमेरिका को अपने कदमों पर पछताना पड़ेगा। ईरान के बहादुर सैनिक अत्याचार करने वालों को कड़ा और यादगार सबक सिखाएंगे।"

Who is Ali Larijan

"ट्रंप को इसकी कीमत चुकानी होगी"

रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए ईरान के सुरक्षा प्रमुख और खामेनेई के करीबी सहयोगी अली लारीजानी ने कहा कि उनके नेता और देश के लोगों का खून व्यर्थ नहीं जाएगा। उन्होंने लिखा कि ट्रंप ने जो किया है उसके लिए उन्हें जवाब देना होगा और ईरान उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ेगा।

लारीजानी ने साफ कहा कि खामेनेई की हत्या और हजार से ज्यादा ईरानी नागरिकों की मौत कोई छोटी घटना नहीं है। ईरान इस खून का बदला लेने के लिए हर संभव कदम उठाएगा।

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ट्रंप का जवाब - "मुझे नहीं पता वह कौन है"

दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन धमकियों को गंभीरता से लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने CBS न्यूज से बातचीत में कहा कि उन्हें यह भी नहीं पता कि अली लारीजानी कौन हैं।

ट्रंप ने कहा कि उन्हें इन बयानों की कोई परवाह नहीं है और उनके मुताबिक लारीजानी पहले ही हार चुके हैं। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी और तेहरान को बिना शर्त आत्मसमर्पण करना चाहिए। ऐसे में आइए जानें कि कौन हैं अली लारीजानी।

Who is Ali Larijani: कौन हैं अली लारीजानी?

ईरान की राजनीति में अली लारीजानी एक बेहद प्रभावशाली और अनुभवी नेता माने जाते हैं। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद देश के सत्ता ढांचे में उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

  • अली लारीजानी का जन्म 3 जून 1958 को इराक के पवित्र शहर नजफ में हुआ था।
  • उनका परिवार पहले से ही आर्थिक और सामाजिक रूप से काफी प्रभावशाली माना जाता रहा है।
  • वर्ष 2009 में टाइम मैगजीन ने लारीजानी परिवार को "ईरान का कैनेडीज" कहकर संबोधित किया था।
  • उनके पिता मिर्जा हाशेम अमोली एक प्रतिष्ठित इस्लामी विद्वान थे, जिनका धार्मिक जगत में खास सम्मान था।

ईरान की सत्ता में मजबूत पकड़

  • खामेनेई की मौत के बाद देश को चलाने के लिए बनाई गई तीन सदस्यों वाली ट्रांजिशनल काउंसिल में लारीजानी भी शामिल हैं।
  • माना जा रहा है कि आने वाले समय में ईरान की सत्ता संरचना में उनकी भूमिका और भी मजबूत हो सकती है।
  • उनके परिवार के अन्य सदस्य भी ईरान की राजनीति और न्याय व्यवस्था के शीर्ष पदों पर रह चुके हैं।
  • उनके भाइयों ने ज्यूडिशियरी और असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में प्रमुख जिम्मेदारियां निभाई हैं।
  • असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स वही धार्मिक परिषद है जिसे ईरान के सुप्रीम लीडर के चयन और निगरानी का अधिकार प्राप्त है।

क्रांतिकारी एलीट से गहरे रिश्ते

  • 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से लारीजानी के रिश्ते ईरान के क्रांतिकारी नेतृत्व से काफी करीबी रहे हैं।
  • मात्र 20 वर्ष की उम्र में उन्होंने फरीदेह मोताहारी से विवाह किया था।
  • फरीदेह, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के संस्थापक अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी के करीबी सहयोगी मोर्तेजा मोताहारी की बेटी हैं।

राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव

  • अली लारीजानी एक ईरानी राजनेता होने के साथ-साथ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व सैन्य अधिकारी भी रह चुके हैं।
  • वह वर्ष 2025 से ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव के पद पर कार्य कर रहे हैं।
  • इससे पहले वह 2008 से 2020 तक ईरान की संसद (मजलिस) के अध्यक्ष रहे।
  • 2005 से 2007 के बीच भी उन्होंने सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव के रूप में जिम्मेदारी निभाई थी।
  • 2024 के ईरानी राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने अपनी उम्मीदवारी पेश की थी, लेकिन बाद में उन्हें चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया।

शिक्षा और अकादमिक उपलब्धियां

  • धार्मिक परिवार में पले-बढ़े होने के बावजूद लारीजानी ने आधुनिक शिक्षा के क्षेत्र में भी उच्च स्तर की पढ़ाई की।
  • उन्होंने 1979 में शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी से गणित और कंप्यूटर साइंस में बैचलर डिग्री हासिल की।
  • इसके बाद तेहरान यूनिवर्सिटी से पश्चिमी दर्शन (वेस्टर्न फिलॉसफी) में मास्टर और पीएचडी पूरी की।
  • उनकी डॉक्टरेट थीसिस जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट के विचारों पर आधारित थी।

परिवार और अगली पीढ़ी

उनकी बेटी फतेमेह ने तेहरान यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने अमेरिका के ओहियो स्थित क्लीवलैंड स्टेट यूनिवर्सिटी से विशेष प्रशिक्षण (स्पेशलाइजेशन) हासिल किया।

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अली लारीजानी ने पड़ोसी देशों को भी दी चेतावनी

लारीजानी ने सिर्फ अमेरिका को ही नहीं बल्कि ईरान के पड़ोसी देशों को भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर किसी देश की जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमले के लिए किया गया तो तेहरान खुद कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

उनका कहना था कि जब दुश्मन क्षेत्र में मौजूद सैन्य ठिकानों से हमला करता है तो ईरान भी वहीं से जवाब देता है और आगे भी ऐसा ही करेगा।

"कुछ अमेरिकी सैनिक हमारे कब्जे में"

एक और बड़ा दावा करते हुए लारीजानी ने कहा कि ईरान ने कुछ अमेरिकी सैनिकों को पकड़ लिया है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।

सरकारी टीवी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि ईरान ट्रंप को कभी नहीं छोड़ेगा और उन्हें अपने फैसले की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

अमेरिका और इजरायल पर बड़ा आरोप

लारीजानी ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल की असली योजना ईरान को तोड़ना और इस्लामी गणराज्य की व्यवस्था को खत्म करना है। उनके मुताबिक वॉशिंगटन यह सोच रहा था कि वह वेनेजुएला जैसा मॉडल ईरान में लागू कर देगा।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी नेतृत्व को पश्चिम एशिया की राजनीति और ईरान के समाज की समझ ही नहीं है। उन्हें लगा था कि एक सैन्य हमला करके सब कुछ खत्म कर दिया जाएगा, लेकिन अब हालात उल्टे पड़ गए हैं।

खामेनेई की मौत के बाद भड़की जंग

दरअसल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर बड़े हवाई हमले किए थे। इन हमलों में 86 वर्षीय सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद पूरे मध्य पूर्व में युद्ध जैसी स्थिति बन गई।

हमलों के जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले शुरू कर दिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक ईरान में एक हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जबकि इजरायल में भी कई लोगों की मौत हुई है। इस संघर्ष में कम से कम छह अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की खबर है।

अमेरिका-इजरायल का तर्क

डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि यह हमला इसलिए किया गया क्योंकि ईरान उनके लिए बड़ा खतरा बन गया था।

ट्रंप का दावा है कि अगर अमेरिका ने पहले कार्रवाई नहीं की होती तो ईरान इजरायल पर हमला कर सकता था और इससे हालात और भी खराब हो जाते।

हालांकि इस युद्ध के बाद पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ गई है और दुनिया की निगाहें अब इस टकराव के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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