कौन हैं Ali Larijani? खामेनेई के करीबी के मारे जाने के दावे से हलचल! मौत के पहले कर चुका है कांड!
Ali Larijani Profile : ईरान की राजनीति इस समय बड़े उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजराइल हमले में मौत के बाद सत्ता को लेकर नई हलचल शुरू हो गई है। इसी बीच इजरायली मीडिया ने एक और बड़ा दावा किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायल की सेना ने ईरान के सुरक्षा प्रमुख और अली लारीजानी (Ali Larijani) को रात में किए गए एयरस्ट्राइक में निशाना बनाया। शुरुआती खबरों में उनके मारे जाने की बात कही जा रही है, हालांकि ईरान की ओर से अभी तक इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि इसी हमले में बासिज अर्धसैनिक बल के कमांडर गुलामरेजा सुलेमानी (Gholamreza Soleimani) को भी निशाना बनाया गया।
खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजताबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) को नया सुप्रीम लीडर चुना गया है। हालांकि ईरान की सत्ता की अंदरूनी राजनीति में अली लारीजानी का नाम एक अहम 'पावर ब्रोकर' के तौर पर सामने आ रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं कौन हैं अली लारीजानी।

🟡 क्यों अचानक सुर्खियों में आए अली लारीजानी? (Ali Larijani Power Broker in Iran)
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अली लारीजानी का बयान सामने आया था, जिसमें उन्होंने साफ कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर उस पर युद्ध थोपा गया तो जवाब जरूर देगा। इसे अमेरिका और इजरायल के लिए सख्त चेतावनी के तौर पर देखा गया।
खामेनेई की मौत के बाद लारीजानी ने एक अस्थायी नेतृत्व परिषद बनाए जाने की बात कही। यही बयान उन्हें सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया के केंद्र में ले आया। लंबे समय से सत्ता का हिस्सा रहे लारीजानी को अब एक 'प्रैगमैटिक' यानी व्यवहारिक नेता के रूप में देखा जा रहा है, जो अलग-अलग गुटों के बीच संतुलन साध सकते हैं।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक खामनेई की मौत के बाद अनुभवी राजनेता अली लारीजानी ईरान में सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बनकर उभरे हैं। लारीजानी ने 1 मार्च, 2026 को घोषणा की कि अब एक 'अस्थायी नेतृत्व परिषद' (Temporary Leadership Council) ईरान का शासन चलाएगी। उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है जो परमाणु वार्ता से लेकर क्षेत्रीय संबंधों और आंतरिक विद्रोह को दबाने तक के सभी अहम पोर्टफोलियो संभाल रहे हैं।
लारीजानी ने अमेरिका और इजरायल को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान इन हमलों का बदला लेगा और "यहूदी अपराधियों और बेशर्म अमेरिकियों" को उनके किए पर पछतावा होगा। उन्होंने कसम खाई कि ईरान के सैनिक इन "अत्याचारी राक्षसों" को कभी न भूलने वाला सबक सिखाएंगे।

🟡 कौन हैं अली लारीजानी? (Who is Ali Larijani Biography)
अली लारीजानी ईरान की राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा हैं। उनका जन्म 1958 में इराक के नजफ शहर में हुआ, लेकिन बचपन में ही उनका परिवार ईरान आ गया। वे एक प्रतिष्ठित धार्मिक परिवार से आते हैं।
उन्होंने तेहरान विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में पीएचडी की। शुरुआत में वे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी Islamic Revolutionary Guard Corps के शुरुआती सदस्यों में रहे। बाद में सक्रिय राजनीति में आए और कई अहम पदों पर काम किया।
वे 1994 से 2004 तक ईरान के सरकारी प्रसारण नेटवर्क Islamic Republic of Iran Broadcasting के प्रमुख रहे। इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा और परमाणु वार्ताओं में उनकी भूमिका बढ़ती गई।
🟡 अली लारीजानी परिवार और पृष्ठभूमि ( Ali Larijani Family )
लारीजानी का परिवार ईरान के प्रभावशाली धार्मिक परिवारों में गिना जाता है। उनके भाई न्यायपालिका और विदेश मंत्रालय में बड़े पदों पर रह चुके हैं। उनकी एक बेटी अमेरिका की एमोरी यूनिवर्सिटी में मेडिकल टीचिंग से जुड़ी थीं, लेकिन हालिया प्रदर्शनों के बाद हुए विरोध के चलते उन्हें पद छोड़ना पड़ा।
🟡 अली लारीजानीपरमाणु वार्ताओं से लेकर संसद तक (Ali Larijani Nuclear Negotiations Role)
अली लारीजानी 2005 से 2007 तक ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार रहे। उस दौर में उन्होंने यूरोपीय प्रस्तावों की तुलना "मोती के बदले टॉफी" से की थी, जिससे उनकी सख्त लेकिन कूटनीतिक छवि बनी।
2008 से 2020 तक वे संसद के स्पीकर रहे। इसी दौरान 2015 में ईरान और छह विश्व शक्तियों के बीच परमाणु समझौता हुआ, जिसे Joint Comprehensive Plan of Action के नाम से जाना जाता है। लारीजानी ने इस समझौते का समर्थन किया था।
हालांकि 2018 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इस समझौते से अमेरिका को बाहर कर लिया। इसके बाद क्षेत्रीय तनाव फिर बढ़ गया।

🟡सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में वापसी (SNSC Leadership)
पिछले साल ईरान और इजरायल के बीच 12 दिन चले हवाई संघर्ष के बाद लारीजानी को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का सचिव बनाया गया। यह वही संस्था है जो देश की सुरक्षा नीति तय करती है।
उनकी ओमान यात्रा को खास माना गया, जहां वे अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने ओमान टीवी को दिए इंटरव्यू में कहा था कि परमाणु मुद्दा सुलझाया जा सकता है, बशर्ते अमेरिका की चिंता सिर्फ हथियारों तक सीमित हो।
वे हाल के महीनों में मॉस्को भी कई बार गए और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) से मुलाकात की। चीन के साथ 25 साल के सहयोग समझौते को आगे बढ़ाने में भी उनकी भूमिका रही।
🟡 प्रदर्शनों पर सख्त रुख और अमेरिकी प्रतिबंध (US Sanctions Controversy)
जनवरी में ईरान में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान लारीजानी की भूमिका विवादों में रही। अमेरिका ने उन पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्ती बरतने का आरोप लगाते हुए प्रतिबंध लगाए। अमेरिकी ट्रेजरी के मुताबिक वे दमनात्मक कार्रवाई के अग्रिम मोर्चे पर थे।
हालांकि लारीजानी ने आर्थिक परेशानियों को लेकर हो रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के प्रति सहानुभूति जताई, लेकिन कथित सशस्त्र और अलगाववादी समूहों को 'शहरी अर्ध-आतंकवादी' बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर देश को तोड़ने की कोशिश हुई तो कड़ा जवाब दिया जाएगा।
🟡 लारीजानी क्या बन सकते हैं ईरान के सुप्रीम लीडर? (Succession Debate)
ईरान में सुप्रीम लीडर का चयन असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स करती है। परंपरागत रूप से यह पद किसी वरिष्ठ धार्मिक विद्वान को मिलता है। लारीजानी मौलवी नहीं हैं, इसलिए उनकी दावेदारी को लेकर बहस है। फिर भी, सत्ता प्रतिष्ठान में उनकी गहरी पैठ, खामेनेई से करीबी संबंध और अलग-अलग गुटों से संवाद की क्षमता उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है।
खामनेई ने अपनी मौत या हमले की स्थिति के लिए पहले से ही लारीजानी को देश के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी थी। हालांकि लारीजानी खुद 'सुप्रीम लीडर' (सर्वोच्च नेता) नहीं बन सकते क्योंकि वे एक वरिष्ठ शिया मौलवी नहीं हैं, लेकिन वे उस 'किंगमेकर' की भूमिका में हैं जो तय करेगा कि अगला सर्वोच्च नेता कौन होगा। उत्तराधिकार की दौड़ में खामनेई के बेटे मोजतबा खामनेई और संस्थापक के पोते हसन खुमैनी जैसे नाम चर्चा में हैं, लेकिन लारीजानी की अध्यक्षता वाली परिषद ही अंतिम फैसला लेगी।
वे 2005 में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ चुके हैं। 2021 और 2024 में भी कोशिश की, लेकिन गार्जियन काउंसिल ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बावजूद वे सत्ता के गलियारों में प्रभावशाली बने रहे।
ईरान की राजनीति इस वक्त अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। खामेनेई की मौत, बेटे मोजतबा की नियुक्ति और लारीजानी की सक्रियता-ये सब संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिन निर्णायक होंगे।
लारीजानी खुद कह चुके हैं कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम खत्म नहीं किया जा सकता, क्योंकि तकनीक एक बार विकसित हो जाए तो उसे मिटाया नहीं जा सकता। यह बयान उनके आत्मविश्वास और रणनीतिक सोच को दिखाता है।
क्या वे खुद सुप्रीम लीडर बनेंगे या पर्दे के पीछे रहकर सत्ता की डोर संभालेंगे-यह आने वाला समय बताएगा। लेकिन इतना तय है कि खामेनेई के बाद ईरान की सत्ता संरचना में अगर कोई नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है, तो वह अली लारीजानी ही हैं।
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