अब दुनिया पर वही राज करेगा जिसके पास होगा कोरोना का पहला वैक्सीन

अब दुनिया पर वही राज करेगा जिसके पास होगा कोरोना का पहला वैक्सीन

दुनिया में पहले दबदबा बनाने का जरिया था एटम बम। लेकिन अब दुनिया में उसी देश की धाक जमेगी जो सबसे पहले बनाएगा कोरोना वैक्सीन। अगर दुनिया पर राज करना है तो सबसे पहले कोरोना वैक्सीन की खोज जरूरी है। संसार के अरबों-खरबों लोग जिंदगी बचाने के लिए इस वैक्सीन की प्रतीक्षा में टकटकी लगाये बैठे हैं। कोरोना वैक्सीन अब केवल दवा मात्र नहीं है बल्कि महाशक्ति बनने की योग्यता भी है। इसके व्यापार से एक नये साम्राज्य का विस्तार होगा। इस होड़ में दुनिया भर के प्रमुख देश शामिल हो गये हैं। विश्व में करीब 80 विशेषज्ञ समूह कोरोना वैक्सीन बनाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। अमेरिका, चीन, रूस, इटली, इजरायल, इंग्लैंड और भारत समेत कई देश इस दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं। इटली और इजरायल ने तो वैक्सीन बनाने का दावा भी कर दिया है लेकिन इसकी प्रमाणिकता और प्रभावशीलता कई स्तरों के परीक्षण के बाद तय होगी। भारत के पास भी यह मौका है कि वह संसार में अपनी वैज्ञानिक योग्यता को साबित करे।

चीन और अमेरिका में होड़

चीन और अमेरिका में होड़

कोरोना वैक्सीन की होड़ में अगर अमेरिका पिछड़ गया तो उसके सिर से महाशक्ति का ताज छीन सकता है। अब एटम बमों की धौंस किसी काम की नहीं। दुनिया के 10 देश परमाणु शक्ति से लैस हो चुके हैं। अमेरिका इस बात से चिंतित है कि कहीं चीन न सबसे पहले ये वैक्सीन बना ले। 1961 में जब तत्कालीन सोवियत संघ (रूस) ने सबसे पहले मानव को अंतरिक्ष में भेजने का कीर्तिमान बनाया था तब अमेरिका के आत्मविश्वास को जोर का झटका लगा था। अब कोरोना वैक्सीन के मामले में वह चीन से पीछे नहीं रहना चाहता। डोनाल्ड ट्रंप ने कोरना वैक्सीन की खोज में अपनी सारी ताकत झोंक दी है। उन्होंने सरकारी एजेंसियों, शोध संस्थानों, दवा कंपनियों और सेना को सम्मिलत रूप से इस अभियान शामिल कर लिया है। ट्रंप के इस अभियान को ऑपरेशन वार्प स्पीड का नाम दिया गया है।

बराबरी की लड़ाई

बराबरी की लड़ाई

चीन और अमेरिका अभी इस मामले में बराबरी पर हैं। दोनों देशों ने मार्च में कोरोना वैक्सीन बनाने का दावा किया था। दोनों देशों ने 17 मार्च को पहली बार इस वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया था। अमेरिका का कहना है कि इस वैक्सीन का इंसानों पर परीक्षण किया गया है। यदि यह सफल होता है तो इसको बाजार में उतारने में करीब डेढ़ साल का वक्त लग सकता है। दूसरी तरफ चीन ने जो वैक्सीन बनाया है उसका परीक्षण वुहान में ही किया गया है। जिन लोगों पर इसका ट्रायल किया गया है वे डॉक्टरों की निगरानी में हैं। ये सभी लोग छह माह तक डॉक्टरों की निगरानी में रहेंगे। उनके शरीर में हो रहे बदलावों के अध्ययन के बाद इसको अंतिम रूप दिया जाएगा। सभी तरह से सुरक्षित होने के बाद ही इसे बाजार में लाया जाएगा।

इंलैंड, रूस, फ्रांस और जर्मनी

इंलैंड, रूस, फ्रांस और जर्मनी

इंलैंड, रूस, फ्रांस और जर्मनी भी दुनिया के प्रमुख राष्ट्र हैं। इंग्लैंड ने कभी व्यापार के जरिये ही दुनिया के हर कोने में शासन किया था। वह भी सबसे पहले वैक्सीन बनाने के लिए बेचैन है। इंग्लैंड के स्वास्थ्य मंत्री मैट हैंकॉक ने हाल में कहा था कि अगर ग्रेट ब्रिटेन ने सबसे पहले कोरोना वैक्सीन बना ली तो एक बार फिर उसका दुनिया में दबदबा हो जाएगा। ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 23 अप्रैल से इंसानों पर कोरोना वैक्सीन का परीक्षण शुरू कर दिया है। ब्रिटेन को भरोसा है कि सबसे पहले वही कोरोना का कारगर वैक्सीन तैयार करने में कामयाब होगा। रूस में कोरोना वैक्सीन की खोज के लिए चार परियोजनाएं चल रही हैं। साइबेरिया की गुप्त प्रयोगशाला ‘वेक्टर' में उसकी सबसे प्रमुख परियोजना चल रही है। अभी इसका जानवरों पर परीक्षण चल रहा है। जर्मनी में पॉल-एहरलिक इंस्टीट्यूट कोरोना वैक्सीन प्रोजेक्ट की नियमक संस्था है। उसने जर्मन दवा कंपनी वायोनटेक और अमेरिकी दवा कंपनी फाइजर द्वारा विकसित एक वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल की मंजूरी दे दी है। फ्रांस की सेनोफी पाश्चर कंपनी दुनिया की बड़ा दवा कंपनियों के साथ मिल कर इस परियोजना पर काम कर रही है। अब तो इटली और इजरायल ने भी वैक्सीन बना लेने का दावा किया है।

भारत में कोरोना वैक्सीन की तैयारी

भारत में कोरोना वैक्सीन की तैयारी

अब भारत ने भी कोरोना वैक्सीन बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) ने भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड के साथ मिल कर इस प्रोजेक्ट को शुरू किया है। पुणे का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी इन दोनों संस्थाओं को वैक्सीन की खोज में सहयोग करेगा। पुणे की संस्था में वायरस को आइसोलेट कर रखा गया है जिसका एक स्ट्रेन भारत बायोट्क को ट्रांसफर किया गया है। भारत बायोटेक हैदराबाद की कंपनी है जो एशिया पैसफिक रीजन में सबसे बड़ी दवा उत्पादक कंपनी है। भारतीय वैज्ञानिक कृष्णा ऐल्ला इसके संस्थापक हैं। भारत बायोटेक दुनिया की पहली कंपनी है जिसने जीका वायरस वैक्सीन पेटेंट के लिए आवेदन दिया है।

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