अमेरिका ने किन-किन देशों को परमाणु बम बनाने से रोका? ईरान ही नहीं ये देश भी झेल चुके हैं खतरनाक तबाही
Countries Targeted by U.S. over nuclear weapons: दुनिया में सुपरपावर की हैसियत बनाए रखने की दौड़ में अमेरिका शुरुआत से ही सबसे आगे रहा है। उसकी रणनीति हमेशा सैन्य ताकत, तकनीकी प्रभुत्व और परमाणु हथियारों में अद्वितीय बढ़त रही है। इतिहास गवाह है कि जब-जब किसी देश ने परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश की, अमेरिका ने उसे एक संभावित खतरे के रूप में देखा और कई बार सीधे सैन्य कार्रवाई या राजनयिक व आर्थिक दबाव के ज़रिए रोकने की कोशिश की।
हालांकि हर बार युद्ध का रास्ता नहीं अपनाया गया, लेकिन कुछ देशों के खिलाफ अमेरिका ने खुला हमला भी किया या ऐसा करवाने में भूमिका निभाई। इस रिपोर्ट में जानिए, अब तक अमेरिका ने किन देशों पर उनके परमाणु कार्यक्रम के विरोध में कार्रवाई की, और इसके पीछे की रणनीति व प्रभाव क्या रहे।

1. इराक (Iraq) - 2003
2003 में अमेरिका ने यह दावा किया कि इराक के पास सामूहिक विनाश के हथियार (Weapons of Mass Destruction) हैं, जिनमें परमाणु हथियार भी शामिल हो सकते हैं।अमेरिका और उसके सहयोगियों ने इस आरोप के आधार पर इराक पर हमला कर दिया। अमेरिका के इस ऑपरेशन का नाम (Operation Iraqi Freedom) रखा गया। युद्ध के दौरान बड़े पैमाने पर बमबारी हुई, और देश की मुख्य सैन्य-औद्योगिक संरचनाएँ बाढ़ में आ गईं। इस सैन्य करवाई के बाद इराक में सद्दाम हुसैन की सरकार गिरा गई। बाद में जांच के बाद पाया गया की इराक में कोई सक्रिय परमाणु हथियार कार्यक्रम नहीं है। और देश आज तक अस्थिर है
2. 2003 में लीबिया (Libya) पर अटैक
लीबिया के परमाणु कार्यक्रम के चलते अमेरिका और लीबिया के बीच तनावपूर्ण संबंध थे। अमेरिका ने लीबिया पर आतंकवाद को कथित समर्थन तथा सामूहिक विनाश के हथियारों की खोज के कारण प्रतिबंध लगाये थे। अमेरिका और ब्रिटेन सहित अंतर्राष्ट्रीय दबाव के चलते, लीबिया ने 2003 में अपने परमाणु और रासायनिक हथियार कार्यक्रम को स्वयं बंद करने की घोषणा की। हालंकि 2003 में कोई हमला नहीं हुआ, लेकिन उसका असर यह हुआ और बाद में लीबिया ने आत्मसमर्पण किया। इसके बाद लीबिया ने आतंकवाद त्यागने की प्रतिज्ञा भी ली।
जिसके परिणामस्वरूप संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सितम्बर 2003 में लीबिया पर लगे प्रतिबंध हटा लिये, और बाद में अमेरिकी ने भी लगे प्रतिबंध को हटा दिया।
3. सीरिया (Syria) 2007
2007 में इज़राइल ने अमेरिका के मदद से सीरिया में मौजूद एक संदिग्ध परमाणु रिएक्टर को नष्ट करने के लिए एक गुप्त हवाई हमला किया, जिसे ऑपरेशन ऑर्चर्ड (Operation Orchard) कहा गया। इस मिशन को कभी-कभी ऑपरेशन आउटसाइड द बॉक्स के नाम से भी जाना जाता है। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य था सीरिया को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना। यह रिएक्टर सीरिया के डीर एज़-ज़ोर क्षेत्र में स्थित था, और इज़राइल को आशंका थी कि इसे उत्तर कोरिया की मदद से चुपचाप बनाया जा रहा है।
शुरुआत में इज़राइल ने इस हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की, लेकिन कुछ वर्षों बाद उन्होंने खुलकर इसकी जिम्मेदारी स्वीकार की। इस हमले में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की मदद से इज़राइली वायुसेना ने उस रिएक्टर को पूरी तरह नष्ट कर दिया। बाद में अमेरिका ने भी इस कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि इज़राइल ने परमाणु प्रसार को रोकने के लिए सही कदम उठाया। ऑपरेशन ऑर्चर्ड आज भी एक 'प्री-एम्पटिव स्ट्राइक' यानी संभावित खतरे से पहले की गई कार्रवाई का अहम उदाहरण माना जाता है, जो अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ।
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4. ईरान- Iran (2006-2025)
ईरान पर अमेरिका की कार्रवाई सबसे लंबी और जटिल रही है। इसमें विभिन्न चरणों में सैन्य, साइबर, कूटनीतिक और आर्थिक हथियारों का प्रयोग किया गया।
साइबर हमला: Stuxnet वायरस (2007-2010)
अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर एक कम्प्यूटर वायरस बनाया - जिसका नाम Stuxnet रखा गया, जिसे ईरान के नतांज़ (Natanz) परमाणु केंद्र में सेंटीफ्यूज नष्ट करने के लिए भेजा गया था। यह इतिहास का पहला साइबर हमला था जिससे वास्तविक भौतिक क्षति हुई। 2010-2020 तक ईरान के कई प्रमुख परमाणु वैज्ञानिकों की हत्याएँ हुई है। इन हत्याओं में अमेरिका और इज़राइल की खुफिया एजेंसियों की मिले होने की आशंका जताई गई। अनुमान लगाया जाता है की इन हत्याओं का मुख्या उद्देश्य ईरान को परमाणु कार्यक्रम रोकने के लिए मजबूर करना है ।
सैन्य हमला - ऑपरेशन मिडनाइट हैमर (2025)
22 जून 2025, अमेरिका ने इज़राइल के साथ मिलकर ईरान के परमाणु ठिकानों फोर्डो ,नतांज़ , इस्फहान ) पर B-2 स्टील्थ बमवर्षकों और टॉमहॉक मिसाइलों से हमला किया। यह अब तक का सबसे बड़ा गुप्त सैन्य हवाई ऑपरेशन माना गया।
अमेरिका ने अब तक सीधे तौर पर बहुत कम देशों पर परमाणु हथियार बनाने या विकसित करने के विरोध में सैन्य हमले किए हैं। लेकिन कुछ देशों पर परमाणु कार्यक्रम रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई की धमकी, साइबर अटैक, आर्थिक प्रतिबंध और विशेष ऑपरेशन (cover operations) जरूर किए गए हैं। आपको हमारी यह जानकारी कैसी लगी हमें कमेंट में ज़रूर बताएं।
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