अमेरिका में अवैध अप्रवासियों को लेकर इमरजेंसी, भारत में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ कब आपातकाल?
India-Bangladesh News: डोनाल्ड ट्रंप ने शपथ ग्रहण के ठीक बाद ही अमेरिका में आव्रजन और शरण पर कड़े नए प्रतिबंधों की घोषणा करते हुए कहा, कि वह अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर सेना भेजेंगे और जन्मजात नागरिकता को समाप्त करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने साफ कर दिया, कि देश में अवैध करीके से रह रहे तमाम लोगों को बाहर निकाला जाएगा।
जिसके बाद सवाल उठने लगे हैं, कि जब अमेरिका अवैध लोगों को देश से बाहर निकाल रहा है, और जब पाकिस्तान ने भी देश में अवैध दस्तावेजों के साथ रहने वाले अफगानों को बाहर निकाल चुका है, तो फिर भारत ऐसा क्यों नहीं कर रहा है। आखिर नाक में दम करने वाले अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ भारत कब आपातकाल लगाएगा और उन्हें कब देश से बाहर निकालेगा?

डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिणी सीमा पर राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की और ओवल ऑफिस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए साफ कर दिया, कि अमेरिका में जन्मे किसी भी व्यक्ति को जन्मजात अमेरिकी नागरिक नहीं माना जाएगा, जबकि बांग्लादेश अभी भी भारत को अकड़ दिखा रहा है।
सरहद पर बांग्लादेश की अकड़ देखिए (Bangladeshi immigrants in india)
बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार ने दावा किया है, कि बांग्लादेश ने BSF के सीमा पर बाड़बंदी की कोशिश को रोक दिया है। बांग्लादेशी अखबार ने लिखा है, कि बांग्लादेश सीमा रक्षक बल (BGB) ने कल भारतीय सीमा सुरक्षा बल (BSF) को जॉयपुरहाट पंचबीबी उपजिला में ऊचना सीमा क्षेत्र में कंटीले तारों की बाड़ लगाने से रोक दिया। बीजीबी के एक अधिकारी के हवाले से समाचार पत्र को बताया है, कि बीएसएफ ने सीमा समझौतों का उल्लंघन करते हुए इंटरनेशनल ज़ीरो प्वाइंट के 30 गज के भीतर बाड़ लगाने की कोशिश की, इसलिए इस कोशिश को नाकाम कर दिया गया।
अखबार ने स्थानीय सूत्रों के हवाले से दावा किया है, कि चकगोपाल कैंप के बीएसएफ कर्मियों ने घने कोहरे के बीच सुबह-सुबह बाड़ लगाने का काम शुरू किया था। यह काम भारतीय सीमा के अंदर सिर्फ 25 से 30 गज की दूरी पर, बांग्लादेशी भूमि के सामने किया जा रहा था, जो 20-बीजीबी हाटखोला सीमा चौकी (बीओपी) के अधिकार क्षेत्र में है।
20 बीजीबी बटालियन के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल नाहिद नवाज ने इस अखबार को बताया, कि इस गतिविधि को देखते ही बीजीबी कर्मियों ने हस्तक्षेप किया, जिसके बाद बीएसएफ को अपनी सामग्री वापस लेनी पड़ी और साइट को छोड़ना पड़ा।
जिसके बाद भारत के इंटरनेशनल रिलेशन एक्सपर्ट ब्रह्मा चेलानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है, कि "भारत में अवैध रूप से बसे बांग्लादेशियों की संख्या, अमेरिका में अवैध रूप से बसे विदेशियों से कहीं ज्यादा है। बांग्लादेश के साथ भारत की लगभग एक तिहाई सीमा पर बाड़ भी नहीं लगी है। जबकि ट्रंप ने मेक्सिको के साथ सीमा पर राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की है, बांग्लादेश ने फिर से सीमा के भारतीय हिस्से पर भारतीय बाड़ लगाने के काम को रोक दिया है, यह दावा करते हुए कि यह सीमा समझौतों का "उल्लंघन" है।"
लिहाजा, सवाल ये उठ रहे हैं, कि जब अमेरिका ऐसा कर सकता है, जब पाकिस्तान ऐसा कर सकता है, तो फिर भारत, इन अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है? आखिर भारत इन्हें देश से बाहर क्यों नहीं निकाल रहा है, जबकि ये घुसपैठिये कई तरह के अपराध में शामिल हो रहे हैं। पिछले दिनों बॉलीवुड एक्टर सैफ अली खान पर किए गये जानलेवा हमले में भी बांग्लादेशी घुसपैठिये का ही हाथ था।
भारत में बांग्लादेशी घुसपैठियों का जाल
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि भारत में बांग्लादेशी घुसपैठियों की अवैध एंट्री करवाने और उन्हें फर्जी दस्तावेजों के साथ जाली नागरिकता देने के लिए एक नेटवर्क काम करता है।
मुंबई पुलिस ने जांच के दौरान कहा है, कि चूंकि बांग्लादेशी, चाहे वे अवैध हों या वैध अप्रवासी, अक्सर शहर में प्रचलित दर से कम पैसे में काम करने को तैयार रहते हैं, इसलिए उन्हें कई बार असत्यापित स्रोतों के माध्यम से मजदूर, आभूषण कारीगर, घरेलू सहायक और ऐसे अन्य कामगारों के रूप में आसानी से काम पर रखा जाता है।
क्राइम ब्रांच के सूत्रों के हवाले से टीओआई ने लिखा है, कि अवैध रूप से देश में प्रवेश करने वाले बांग्लादेशी आम तौर पर मालदा, 24 परगना, मुर्शिदाबाद, दिनेशपुर और चपली नवाबगंज जैसे क्षेत्रों से ऐसा करते हैं। यहां आने के बाद, अवैध अप्रवासी कथित तौर पर एजेंटों की मदद से फर्जी आधार कार्ड प्राप्त करने के लिए 2,000 से 10,000 रुपये का भुगतान करते हैं। ये दस्तावेज उन्हें देश के किसी भी हिस्से में बसने में सक्षम बनाते हैं। एजेंट कमीशन के लिए उन्हें नौकरी दिलाने में मदद करते हैं।
एक अधिकारी ने कहा, "भारत में एक बहुत बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है जो इन अवैध अप्रवासियों को यहां बसने में मदद करता है।"
अधिकारी ने कहा, कि "वे अपने खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने से डरते नहीं हैं, क्योंकि इससे उनके लंबे समय तक यहां रहने की गारंटी मिलती है। जब तक मामले में फैसला नहीं आ जाता, उन्हें निर्वासित नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, वे कुछ ही दिनों में जमानत हासिल कर लेते हैं और सामान्य जीवन जीना जारी रखते हैं।"
नियमित निर्वासन अभियान के बावजूद, अवैध अप्रवासियों की संख्या बढ़ती जा रही है और नई पहचान के साथ ये घुसपैठिये देश में फिर से घुस आते हैं। उनमें से कई को नौकरानी, रसोइया, मछली विक्रेता, दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम मिल जाता है और कुछ तो देह व्यापार में भी उतर जाते हैं। स्थिति तो यहां तक पहुंच गई है, कई अवैध बांग्लादेशी घुसैठियों ने अब वोट डालना भी शुरू कर दिया है।
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