UK Election Results: यूरोप में जब दक्षिणपंथी पार्टियों का बोलबाला, तो UK में क्यों आई वामपंथी पार्टी की लहर?
UK General Election 2024 Results: यूके में गुरुवार को हुए चुनाव के बाद आज नतीजे जारी हो रहे हैं और एग्जिट पोल के बाद अभी तक के आए अनुमान में वामपंथी लेबर पार्टी प्रचंड जीत हासिल करने की तरफ बढ़ रही है। एग्जिट पोल के मुताबिक, सेंटर-लेफ्ट लेबर पार्टी के 400 से ज्यादा सीटें जीतने का अनुमान लगाया गया है।
लेकिन, यूनाइटेड किंगडम में लेबर पार्टी की लहर उस वक्त देखने को मिला है, जब बाकी यूरोप में दक्षिणपंथी पार्टियों का बोलबाला है और इटली जैसे देशों में दक्षिणपंथी पार्टियां सरकार बना चुकी हैं, जबकि फ्रांस में दक्षिणपंथी सरकार के सत्ता में आने की प्रबल संभावना जताई गई है।

यूरोप में दक्षिणपंथी पार्टियों का बोलबाला
पिछले महीने हुए यूरोपीय संसद के चुनाव में कट्टर दक्षिणपंथी सांसदों की ऐतिहासिक संख्या बताती है, कि अगले कुछ सालों तक यूरोप में दक्षिणपंथी पार्टियों का ही बोलबाला होने वाला है। लेकिन, यूरोपीय संसद के परिणामों ने इतनी अराजकता पैदा कर दी, कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने देश में अचानक संसदीय चुनाव की घोषणा कर दी।
जिसके बाद फ्रांस में पहले राउंड के चुनाव में अति-दक्षिणपंथी पार्टी नेशनल रैली ने प्रचंड जीत हासिल कर ली है। फ्रांस में रविवार को दूसरे राउंड के चुनाव होने वाले हैं और माना जा रहा है, कि नेशनल रैली पार्टी बहुमत हासिल कर सकती है।
वहीं, इस हफ्ते नीदरलैंड में दक्षिणपंथी पार्टियों ने मिलकर सरकार बना ली है। इटली का नेतृत्व फासीवादी युद्धकालीन नेता बेनिटो मुसोलिनी के शासन के बाद से सबसे दक्षिणपंथी नेता कर रहे हैं। ये चुनावी जीत और सत्ता में लोकलुभावन दक्षिणपंथियों की संभावना अब यूरोपीय देशों में कोई आश्चर्य की बात नहीं है।
यूरोप में क्यों हावी हो रहा दक्षिणपंथ?
लोकलुभावनवाद में इस वृद्धि के कई कारण हैं, जो अक्सर अलग-अलग देशों के लिए अद्वितीय होते हैं। लेकिन मोटे तौर पर कहें तो, कई यूरोपीय देश सुस्त अर्थव्यवस्था, उच्च आव्रजन, कट्टरपंथ और उच्च ऊर्जा कीमतों से पीड़ित हैं, जो आंशिक रूप से कार्बन नेट जीरो के लिए चलाए गये अभियान की वजह से हैं। लोकलुभावन राजनेताओं ने अक्सर राष्ट्रीय संकटों के लिए यूरोपीय संघ को दोषी ठहराया है और यह तेजी से बढ़ रहे यूरोस्केप्टिक राष्ट्रीय प्रवचन में प्राण फूंकता है।
तो ब्रिटेन, एकमात्र ऐसा देश जहां यूरोस्केप्टिज्म ने यूरोपीय संघ की सदस्यता पर जनमत संग्रह का नेतृत्व किया, और दक्षिणपंथी हवा को रोक दिया है।
हालांकि, ब्रिटिश दक्षिणपंथी अभी भी जीवित है। तमाम चुनावी सर्वेक्षणों में जितनी बड़ी हार की उम्मीद लगाई गई थी, कंजर्वेटिव पार्टी ने उससे बेहतर प्रदर्शन किया है।
लेकिन, ऐसा भी नहीं है, कि यूके ने पूरी तरह से दक्षिणपंथ को नकार दिया है।
दक्षिणपंथी रिफॉर्म यूके पार्टी उम्मीदों से बेहतर कर रही है, जिसका नेतृत्व कंजरवेटिव पार्टी के लंबे समय से विरोधी रहे निगेल फरेज कर रहे हैं, जो शायद इन दिनों पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपनी दोस्ती के लिए सबसे ज्यादा जाने जाते हैं। इससे पहले, उन्हें ब्रिटेन की यूरोपीय संघ की सदस्यता के खिलाफ दशकों तक अभियान चलाने के बाद ब्रेक्सिट को संभव बनाने का श्रेय दिया गया था।
फरेज की अब तक की राजनीतिक सफलता बिना किसी संसदीय सीट के ही आई है। अब न सिर्फ उनकी पार्टी को सीटें मिलने का अनुमान है, बल्कि लेबर नेता कीर स्टारमर को संसद में चुनौती देने के लिए उनके 12 सहयोगियों को भी सीट मिलने का अनुमान है। हालांकि यह स्टारमर के अनुमानित तीन अंकों के बहुमत की तुलना में छोटी बात लग सकती है, फरेज निस्संदेह कंजर्वेटिव पार्टी की भविष्य की दिशा पर बहस को प्रभावित करेंगे, और कंजर्वेटिव पार्टी को और ज्यादा दक्षिणपंथ की तरफ खीचेंगे।
वहीं, लेबर पार्टी की जीत की एक बड़ी वजह कंजर्वेटिव पार्टी का लगातार 14 सालों से सत्ता में रहना था और इसके खिलाफ एंटी-इनकमबेंसी काफी ज्यादा बढ़ गई थी। वहीं, आर्थिक मोर्चे पर कंजर्वेटिव पार्टी के प्रदर्शन से ब्रिटेनवासी काफी ज्यादा नाराज थे, लिहाजा ये नहीं कहा जा सकता, कि यूके ने दक्षिणपंथी विचारधारा को खारिज कर दिया है, बल्कि अभी इतना ही कहा जा सकता है, कि दक्षिणपंथी हवा को फिलहाल के लिए थामा जरूर गया है।












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