WhatsApp Ban: पुतिन की नहीं मानी बात तो व्हाट्सएप पर लगा ताला, भारत भी ले सकता है एक्शन?
WhatsApp Ban: रूस के कानूनों का पालन न करने की वजह से वहां की सरकार ने व्हाट्सएप को बैन कर दिया है। इस फैसले के बाद भारत में भी यह सवाल उठने लगा है कि क्या भारत सरकार भी ऐसा कदम उठा सकती है? हालांकि भारत एक संप्रभु देश है, लेकिन यहां हालात उतने सीधे और आसान नहीं हैं जितने रूस में दिख रहे हैं। साथ ही व्हाट्सएप जैसी कंपनियां भारत में डायरेक्ट कस्टमर सपोर्ट भी उपलब्ध नहीं कराती हैं।
रूस ने क्यों लगाया प्रतिबंध?
रूसी प्रतिबंध का कारण बताते हुए क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि मेटा कंपनी रूसी कानूनों का पालन करने के लिए तैयार नहीं थी। उनके मुताबिक, 'मेटा द्वारा रूसी कानून का पालन न करने वजह से यह फैसला लिया गया।'

डेटा लोकलाइजेशन बना बड़ा मुद्दा
रिपोर्ट्स के मतुबाकि, विवाद का मुख्य कारण स्थानीय डेटा को रूस में ही स्टोर करने की मांग थी। डेटा लोकलाइजेशन का यही मुद्दा भारत में भी महत्वपूर्ण रहा है। भारत सरकार ने भी मेटा और गूगल जैसी बड़ी टेक कंपनियों पर डेटा स्थानीय स्तर पर स्टोर करने का दबाव डाला है।
रूस ने दोबारा वापसी का भी रखा रास्ता
रूस ने साफ किया है कि अगर व्हाट्सएप सरकारी मांगों को मान लेता है, तो उसे दोबारा देश में काम करने की अनुमति मिल सकती है। पेसकोव ने कहा कि अगर मेटा रूसी अधिकारियों से बातचीत करता है और कानून का पालन करता है, तो समझौता संभव है।
रूस में 'मैक्स' ऐप को बढ़ावा
व्हाट्सएप के बैन के बाद रूस अपने सरकारी-समर्थित मैसेंजर ऐप 'मैक्स' को प्रमोट कर रहा है। पेसकोव ने कहा कि मैक्स एक नेशनल और डिवेलप्ड मैसेंजर है, जो नागरिकों के लिए एक विकल्प के रूप में उपलब्ध है।
मेटा ने लगाया सेंसरशिप का आरोप
दूसरी तरफ, मेटा ने रूस पर सेंसरशिप और निगरानी का आरोप लगाया। कंपनी ने एक्स पर बयान जारी कर कहा कि रूसी सरकार लोगों को सरकारी निगरानी वाले ऐप की ओर धकेल रही है।
10 करोड़ यूजर्स पर असर
मेटा के अनुसार, रूस में 100 मिलियन यानी लगभग 10 करोड़ से अधिक यूजर्स व्हाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं। कंपनी का कहना है कि उन्हें निजी और सुरक्षित संचार से दूर करना लोगों की स्वतंत्रता पर हमला है।
भारत भी रख रहा है स्थिति पर नजर
इस पूरे घटनाक्रम पर भारत भी करीब से नजर रख रहा है। भारत सरकार और व्हाट्सएप के बीच पहले भी डेटा संप्रभुता और गोपनीयता को लेकर कई बार मतभेद सामने आ चुके हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या भारत भी ईरान और रूस जैसे देशों की तरह व्हाट्सएप पर रोक लगा सकता है?
तकनीकी संप्रभुता की बहस
यह मामला एक बार फिर तकनीकी संप्रभुता (Technological Sovereignty ), बड़ी टेक कंपनियों की ताकत और सरकारों के कंट्रोल पर बहस छेड़ रहा है। भारत में भी समय-समय पर व्हाट्सएप की नीतियों को लेकर विवाद होते रहे हैं। हालांकि व्हाट्सएप और फेसबुक दोनों पर डेटा लीक करने के आरोप भी लगते रहे हैं।
भारत में सुप्रीम कोर्ट की नाराज़गी
हाल ही में व्हाट्सएप को अपनी नई गोपनीयता नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सवालों का सामना करना पड़ा था। कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए यहां तक कहा था कि जरूरत पड़ी तो ऐप पर प्रतिबंध लगाने पर भी विचार किया जा सकता है।
क्या भारत भी बैन कर सकता है?
सीधा जवाब है - हां, भारत चाहे तो व्हाट्सएप पर प्रतिबंध लगा सकता है। भारत भी एक संप्रभु राष्ट्र है और उसे अपने क्षेत्र में किस कंपनी को अनुमति देनी है, यह तय करने का अधिकार है।2020 में भारत ने टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाया था, जो आज तक लागू है। यह दिखाता है कि भारत सरकार जरूरत पड़ने पर कड़े फैसले लेने में सक्षम है।
रूस और भारत की स्थिति अलग
हालांकि दोनों देश संप्रभु हैं, लेकिन उनकी वैश्विक स्थिति अलग है। रूस और चीन अमेरिका से तनावपूर्ण रिश्तों के कारण टेक कंपनियों पर सख्ती से प्रतिबंध लगा सकते हैं। भारत के अमेरिका से रिश्ते अलग तरह के हैं।
अमेरिकी दबाव की संभावना
अगर भारत किसी बड़ी अमेरिकी टेक कंपनी पर प्रतिबंध लगाता है, तो अमेरिकी सरकार प्रतिक्रिया दे सकती है। हाल ही में जब यूरोपीय संघ ने टेक कंपनियों पर सख्ती की, तो ट्रम्प प्रशासन ने चेतावनी दी थी। भारत को भी ऐसे कूटनीतिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
भारत बड़ा बाजार, कंपनियां ज्यादा सहयोगी
भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बाजारों में से एक है। यहां अपनी मौजूदगी बनाए रखने के लिए टेक कंपनियां अक्सर सरकार की मांगों को मान लेती हैं। डेटा लोकलाइजेशन जैसे कई मामलों में कंपनियां पहले ही भारतीय नियमों का पालन कर रही हैं।
डेटा शेयरिंग में भी सहयोग
भारत अमेरिका से युद्ध की स्थिति में नहीं है। ऐसे में कानूनी मांग आने पर कंपनियां भारतीय एजेंसियों के साथ डेटा साझा करने में सहयोग करती हैं। रूस और चीन के मामलों में यह सहयोग अक्सर नहीं मिलता। सबसे बड़ा अंतर यूजर बेस का है। रूस में करीब 10 करोड़ लोग व्हाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं, जबकि भारत में यह संख्या 80 करोड़ से अधिक है। व्हाट्सएप यहां डिजिटल जीवन की लाइफलाइन बन चुका है। इन सभी तथ्यों को देखते हुए, भारत के लिए व्हाट्सएप पर प्रतिबंध लगाना संभव तो है, लेकिन यह अंतिम विकल्प होगा।
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