ओबामा की अपील, नाजुक मौकों पर भी आवाज उठाएं मुसलमान नेता
अंटाल्या। टर्की के अंटाल्या में सोमवार को जी-20 समिट का समापन हो गया है। इस समिट के आखिरी दिन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मीडिया को एड्रेस किया। उन्होंने इस दौरान 'आईएसआईएस को एक शैतान' करार दिया है। साथ ही ओबामा ने दुनिया भर के मुस्लिम नेताओं से एक अपील भी की है।

प्रतिक्रिया देने में असफल
राष्ट्रपति ओबामा ने दुनिया के मुस्लिम नेताओं से खुद के अंदर झांकने की अपील की है। ओबामा ने यहां पर साफ कर दिया कि ज्यादातर मुस्लिम शांतिप्रिय होते हैं लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आता है कि उन शांत मुसलमानों का एक समूह नाजुक मौकों पर प्रतिक्रिया देने में क्यों असफल रह जाता है।
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बच्चों को विकृत सोच का शिकार न होने दें
ओबामा ने कहा, 'एक तरफ तो बात होती है कि गैर-मुसलमान लोग रुढ़िवादी सोच के नहीं हो सकते हैं। वहीं मुझे यह भी लगता है कि मुसलमान समुदाय के लिए आज एक वक्त आ गया है जहां उन्हें कुछ सोचने की जरूरत है।'
ओबामा ने कहा कि उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे बच्चे इस विकृत धारणा से ग्रसित न होने पाएं जहां वे मासूम लोगों को मारें और फिर उसे धर्म के आधार पर सही करार दिया जाने लगे।
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खुद से पूछें सवाल
ओबामा यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा, 'कुछ हद तक इसके खिलाफ मुसलमान समुदाय के अंदर से ही आवाजें उठनी चाहिए। समुदाय के लोग खुद से सवाल पूछें कि आखिर ऐसा क्या हो रहा है कि लोग चरमपंथ की ओर जा रहे हैं।'
ओबामा ने कहा कि मुस्लिम नेताओं की ओर से ही सिर्फ बयान आते हैं कि वे हिंसा में यकीन नहीं रखते हैं और कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है।
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इस्लाम को आतंकवाद से न जोड़ें
ओबामा ने इसके साथ ही यह भी कहा है कि जो लोग पेरिस आतंकी हमलों को इस्लाम से जोड़कर देख रहे हैं उनकी सोच पुरानी हो चुकी है और पूरी तरह से गलत हैं।
ओबामा के मुताबिक अगर इस बात को 'आतंकवाद' के बजाया सिर्फ मुसलमानों से जोड़कर देखा जाएगा तो समस्या और बढ़ेगी। लोग ज्यादा से ज्यादा आतंकी संगठनों में शामिल होंगे और यह एक नई समस्या बनेगी।












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