QUAD, बुलेट ट्रेन, पीएम मोदी, मनमोहन सिंह...कैसे भारत के महान मित्र बन गये थे शिंजो आबे?

गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कई बार जापान का दौरा करने के बाद, प्रधानमंत्री के रूप में मोदी ने सितंबर 2014 में पड़ोस के बाहर अपनी पहली द्विपक्षीय यात्रा के लिए जापान को चुना।

नई दिल्ली, जुलाई 08: जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे अब हमारे बीच नहीं रहे। जापान के सार्वजनिक प्रसारक एनएचके ने शुक्रवार को शिंजो आबे की हत्या होने की पुष्टि कर दी है। सुबह एक चुनावी सभा में गोली लगने के बाद वो गंभीर घायल हो गये थे और 67 वर्षीय शिंजो आबे की स्थिति काफी गंभीर हो गई थी। पूर्व जापानी प्रधानमंत्री को बचाने की हर संभव कोशिश की गई, लेकिन आखिरकार शिंजो आबे मौत से जंग में हार गये। जापानी न्यूज प्रसारक एनएचके के मुताबिक, शिंजो आबे को एक कार्यक्रम में भाषण देते वक्त नारा प्रांत में गोली मारी गई थी, जिसके बाद उन्हें काशीहारा शहर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी मौत हो गई।

किसने की पूर्व जापानी पीएम की हत्या

किसने की पूर्व जापानी पीएम की हत्या

हत्यारे की पहचान जापानी मीडिया ने 41 वर्षीय तेत्सुया यामागामी के रूप में की, जो जापान के आत्मरक्षा बल में शामिल था। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के इतिहास में शिंजो आबे पहले वो नेता था, जो सबसे लंबे वक्त तक जापान के प्रधानमंत्री रहे। उन्होंने 2006 से 2007 तक और फिर 2012 से 2020 तक, प्रधानमंत्री पद के दो कार्यकालों में काम किया। उन्होंने अगस्त 2020 में एक पुरानी बीमारी के फिर से उभरने के बाद प्रधानमंत्री पद छोड़ने की घोषणा की थ। शिंजो आबे, जो उस समय 65 वर्ष के थे, सितंबर 2021 तक पद पर बने रहने वाले थे।

Recommended Video

    Shinzo Abe Biography: Shinzo Abe और Narendra Modi की Chemistry | वनइंडिया हिंदी | *International
    भारत के महान मित्र शिंजो आबे

    भारत के महान मित्र शिंजो आबे

    प्रधानमंत्री पद के अपने कार्याकाल के दौरान शिंजो आबे भारत के एक महान दोस्त के तौर पर उभरे और उन्होंने भारत के साथ मजबूत दोस्ती कायम करने के लिए निजी तौर पर भी काम किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी उनके विशेष संबंध थे, जो कई मौकों पर सामने आए। जब अगस्त 2020 में शिंजो आबे ने अपना पद छोड़ा, तो उस वक्त पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा था, कि "आपके खराब स्वास्थ्य के बारे में सुनकर दुख हुआ, मेरे प्रिय मित्र शिंजो आबे, हाल के वर्षों में, आपके बुद्धिमान नेतृत्व और व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के साथ, भारत-जापान साझेदारी पहले से कहीं अधिक गहरी और मजबूत हुई है। मैं आपके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना और प्रार्थना करता हूं।" वहीं, जब शुक्रवार को, जैसे ही आबे पर हमले की खबर फैली, पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि, "मेरे प्रिय मित्र शिंजो आबे पर हमले से बहुत व्यथित हूं। हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं उनके, उनके परिवार और जापान के लोगों के साथ हैं।"

    बदल गई भारत-जापान की दोस्ती

    बदल गई भारत-जापान की दोस्ती

    2006-07 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान, शिंजो आबे ने पहली बार बतौर प्रधानमंत्री भारत का दौरा किया था और भारतीय संसद को संबोधित किया था। अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान, शिंजो आबे ने लगातार तीन बार जनवरी 2014, दिसंबर 2015 और सितंबर 2017 में भारत का दौरा किया और वो पहले ऐसे जापानी प्रधानमंत्री बन गये, जिन्होंने इतनी बार भारत की यात्रा की थी। इसके साथ ही शिंजो आबे 2014 में गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि बनने वाले पहले जापानी पीएम थे। यह भारत के संबंध के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जब जनवरी 2014 में उन्होंने भारतीय गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत की यात्रा की थी, उस वक्त कांग्रेस की सरकार आने वाले महीने में चुनावी मैदान में जाने वाली थी, लिहाजा शिंजो आबे की भारत में काफी आवभगत की गई थी। वहीं, मनमोहन सिंह के अलावा मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी शिंजो आबे के साथ स्पेशल रिश्ता कायम किया।

    कैसे करीब आए भारत और जापान

    कैसे करीब आए भारत और जापान

    "जापान और भारत के बीच वैश्विक साझेदारी" की नींव साल 2001 में रखी गई थी, और दोनों देश वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के लिए साल 2005 में सहमत हुए थे, लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद शिंजो आबे ने साल 2012 से भारत के साथ संबंधों को अत्यधिक मजबूत करने के लिए कोशिशें और तेज कर दी थीं। अगस्त 2007 में, जब शिंजो आबे पहली बार प्रधानमंत्री के तौर पर भारत आए, तो उन्होंने प्रसिद्ध "दो समुद्रों का संगम" नाम से भाषण दिया दिया था और हिंद-प्रशांत की अपनी अवधारणा की नींव रखी थी। यह अवधारणा अब मुख्यधारा बन गई है और भारत-जापान संबंधों के मुख्य स्तंभों में से एक है। अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान, आबे ने रिश्ते को और आगे बढ़ाने में मदद की।

    पीएम मोदी के साथ स्पेशल रिश्ता

    पीएम मोदी के साथ स्पेशल रिश्ता

    गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कई बार जापान का दौरा करने के बाद, प्रधानमंत्री के रूप में मोदी ने सितंबर 2014 में पड़ोस के बाहर अपनी पहली द्विपक्षीय यात्रा के लिए जापान को चुना। मोदी और आबे द्विपक्षीय संबंधों को "विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी" में अपग्रेड करने पर सहमत हुए। धीरे धीरे भारत और जापान के बीच संबंध बढ़े और इसमें नागरिक परमाणु ऊर्जा से लेकर समुद्री सुरक्षा, बुलेट ट्रेन से लेकर गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे, एक्ट ईस्ट नीति से लेकर इंडो-पैसिफिक रणनीति तक के मुद्दे शामिल होते चले गये। जब पीएम मोदी 2014 में जापान गए थे, तब भी भारत-जापान परमाणु समझौता अनिश्चित था, टोक्यो एक गैर-परमाणु-प्रसार-संधि सदस्य देश के साथ एक समझौते के बारे में संवेदनशील था। लेकिन, शिंजो आबे की सरकार ने जापान में परमाणु विरोधी हॉकरों को 2016 में समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए मना लिया। यह समझौता अमेरिका और फ्रांसीसी परमाणु फर्मों के साथ भारत के सौदों के लिए महत्वपूर्ण था, जो या तो स्वामित्व में थे या जापानी फर्मों में हिस्सेदारी रखते थे।

    इंडो-पैसिफिक में रक्षा रणनीति

    इंडो-पैसिफिक में रक्षा रणनीति

    जब साल 2008 में शिंजो आबे की सरकार में भारत और जापान के बीच सुरक्षा समझौता हुआ, तो शिंजो आबे की ही पहल पर दोनों पक्षों ने विदेश और रक्षा मंत्रियों की बैठक (2+2) करने का फैसला किया, और अधिग्रहण और क्रॉस-सर्विसिंग समझौते पर बातचीत शुरू की, जो एक तरह का सैन्य रसद समर्थन समझौता था। नवंबर 2019 में भारत और जापान के बीच पहली विदेश और रक्षा मंत्रियों की बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई थी। वहीं, साल 2015 में रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण के लिए एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए थे, जो युद्ध के बाद जापान के लिए एक असामान्य समझौता था।

    'दो समुद्रों का संगम'

    'दो समुद्रों का संगम'

    शिंजो आबे के कार्यकाल के दौरान, भारत और जापान इंडो-पैसिफिक आर्किटेक्चर में काफी करीब आ गए। वहीं, शिंजो आबे ने अपने 2007 के भाषण में 'दो समुद्रों के संगम' के अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट किया था और फिर उन्होंने क्वाड के गठन की पहली बार बात की थी, लेकिन उस वक्त क्वाड को लेकर बात आगे नहीं बढ़ सकी और गठन होने के बाद भी क्वाड निष्क्रीय पड़ा रहा। लेकिन, लेकिन अक्टूबर 2017 में, जैसे ही प्रशांत, हिंद महासागर और डोकलाम में भारत की सीमाओं में चीनी आक्रामकता बढ़ी, तो वो शिंजो आबे ही थे, जिन्होंने क्वाड के पुनर्जीवित करने का विचार रखा और नवंबर 2017 में एक नये जोश के साथ भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के शीर्ष नेता क्वाड के मंच पर साथ आए, जिसने चीन को पहली बार गंभीर चुनौती दी और अब क्वाड से चीन कितना घबराता है, ये समय समय पर देखने को मिलता रहता है।

    चीन के साथ गतिरोध में भारत के साथ रहे

    चीन के साथ गतिरोध में भारत के साथ रहे

    2013 से, भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच चार बार सार्वजनिक रूप से ज्ञात सीमा-गतिरोध हो चुके हैं और अप्रैल 2013, सितंबर 2014, जून-अगस्त 2017, और मई 2020 में चार बार दोनों देशों के सैनिक आपस में टकरा चुके हैं। लेकिन,शिंजो आबे ने हमेशा भारत का साथ दिया और उन्होंने चीन की आलोचना की। डोकलाम संकट और मौजूदा गतिरोध के दौरान जापान ने यथास्थिति को बदलने के लिए चीन के खिलाफ आक्रामक बयान दिए।

    इन्फ्रास्ट्रक्चर में सहयोग

    इन्फ्रास्ट्रक्चर में सहयोग

    2015 में जब शिंजो आबे ने भारत की यात्रा की थी, उस दौरान भारत ने शिंकानसेन प्रणाली (बुलेट ट्रेन) शुरू करने का फैसला किया। वहीं, शिंजो आबे के नेतृत्व में, भारत और जापान ने भी एक्ट ईस्ट फोरम का गठन किया और पूर्वोत्तर में परियोजनाओं में साथ मिलकर काम करने का फैसला लिया, जिन पर चीन की नजर है। बीजिंग के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए दोनों देशों ने मालदीव और श्रीलंका में संयुक्त परियोजनाओं की भी योजना बनाई और श्रीलंका में भारत और जापान मिलकर अपनी परियोजना चला भी रहा है।

    एक ऐसा नेता, जिसे भारत हमेशा याद करेगा

    एक ऐसा नेता, जिसे भारत हमेशा याद करेगा

    शिंजो आबे भारत के लिए एक मूल्यवान जी -7 नेता थे, जो रणनीतिक, आर्थिक और राजनीतिक डिलिवरेबल्स पर केंद्रित थे, और भारत के घरेलू विकास से विचलित नहीं हुए और उन्होंने हमेशा नई दिल्ली का साथ दिया, एक विश्वसनीय दोस्त की तरह। जब पीएम मोदी ने शिंजो आबे के कार्यकाल में जापान का दौरा किया था, तो शिंजो आबे उन्हें अपने पैतृक घर ले गये थे और काफी गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया था। शिंजो आबे के पैतृक घर जाने वाले पीएम मोदी पहले वैश्विक नेता था और पीएम मोदी के अलावा कोई और वैश्विक नेता कभी भी शिंजो आबे के घर नहीं गया है। वहीं, शिंजो आबे ने जब भारत की यात्रा की थी, तो अहमदाबाद में रैली निकाली गई थी। शिंजो आबे दिसंबर 2020 में भी भारत की यात्रा करने वाले थे, लेकिन सीएए की वजह से चल रहे विरोध प्रदर्शन की वजह से उनकी यात्रा रद्द हो गई थी और उसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री पद ही छोड़ दिया था। भारत सरकार ने जनवरी 2021 में शिजो आबे के लिए देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण की घोषणा की थी। शिंजो आबे के साथ पीएम मोदी की आखिरी मुलाकात इस साल 24 मई को हुई थी, जब प्रधानमंत्री ने उनसे टोक्यो में क्वाड शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात की थी।

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+