क्या है मालदीव में शुरू हुआ 'इंडिया आउट' कैंपेन, जानिए किस वजह से वहां हो रहा भारत का विरोध
माले, 23 दिसंबर। भारत और मालदीव में हमेशा के अच्छे पड़ोसी संबंध रहे हैं, लेकिन बीते कुछ वर्षों में चीन की बढ़ती गतिविधियों के चलते रणनीतिक रूप से भारत से मालदीव दूर होता जा रहा है। हाल ही में सोशल मीडिया पर मालदीव से कई वीडियो सामने आई हैं, जिसमें लोग 'इंडिया आउट' की टी-शर्ट पहने भारत सरकार के खिलाफ विरोध जताते नजर आ रहे हैं। आखिर क्या है 'इंडिया आउट' कैंपेन, क्या है भारत सरकार के प्रति मालदीव के लोगों की नाराजगी? आइए जानते हैं।

मालदीव क्यों है भारत से नाराज?
आपको बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब मालदीव में भारतीय सेना और भारत सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं। ऐसा ही विरोध साल 2012 में हुआ था जिसके बाद भारतीय एयरपोर्ट ऑपरेटर जीएमआर को उस वर्ष मालदीव छोड़ भारत लौटना पड़ा था। दरअसल, मालदीव के लोग वहां मौजूद भारतीय सैनिकों और उपकरणों को अपने देश से निकालने के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसकी शुरुआत 2018 में हुई थी।

कैसे शुरू हुआ भारत विरोधी कैंपेन?
तत्कालीन राष्ट्रपति राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने भारत से अपने दो हेलिकॉप्टरों और एक डॉर्नियर एयरक्राफ्ट ले जाने को कहा था, जिसके बाद 'इंडिया आउट' कैंपेन ने जोर पकड़ा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मालदीव में सैन्य अधिकारी और एयरक्राफ्ट की तैनाती भारत द्वारा वहां खोजी और राहत बचाव अभियान के लिए तैनात किए गए है। वहीं मालदीव का कहना है कि अगर भारत ने उन उपकरणों को गिफ्ट में दिया है तो इसका इस्तेमाल भी स्थानीय लोगों द्वारा की किया जाना चाहिए।

मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति ने लगाई आग
पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की इस बात ने इतना तूल पकड़ा कि लोग सड़कों पर उतरने लगे। अब अब्दुल्ला यामीन के ही नेतृत्व में मालदीव में भारत विरोधी अभियान चलाया जा रहा है। उनकी मांग है कि मालदीव से भारत की मौजूदगी खत्म होनी चाहिए। वहीं, प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ मालदीव (पीपीएम) और उससे जुड़ी पार्टियों का भी कहना है कि भारत को मालदीव के मामलों में दखल नहीं देना चाहिए। इस बीच कई पूर्व मंत्रियों और नेताओं के बयान ने आग में घी डालने का काम किया है।

विरोध प्रदर्शन को हवा दे रहे पूर्व राष्ट्रपति और मंत्री
उन्हीं में से एक मालदीव के पूर्व मंत्री ने अपने एक ट्वीट में कहा, 'मैं भारतीय व्यंजनों, उत्पादों, दवाइयों को बेहद पसंद करता हूं लेकिन अपनी जमीन पर भारतीय सैनिकों को नहीं।' एक अन्य पूर्व मंत्री अहमद तौफीक ने कहा, 'मालदीव के लोग भारतीय सैनिकों के प्रति अपने गुस्से का इजहार कर रहे हैं।' मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस विरोध प्रदर्शन को मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की पार्टी पीपीएम से भी हवा दी जा रही है।

कैंपेन से मालदीव सरकार चिंतित
वहीं मालदीव की वर्तमान सरकार अपने यहां हो रहे भारत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से चिंतित है। 19 दिसबंर को वहां के विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया था कि भारत के खिलाफ फैलाए जा रहे झूठ और नफरत को लेकर मालदीव सरकार चिंतित है। भारत हमारा सबसे करीबी द्विपक्षीय साझेदार है, लेकिन कुछ समूह और नेता संबंधों को खराब करने के लिए प्रॉपेगैंडा फैला रहे हैं। बता दें कि इस बीच मालदीव में चीन की भी दिलचस्पी बढ़ी है।
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