'7 शिखर बताएंगे सनातन की कहानी', जानें अबू धाबी के पहले हिंदू मंदिर की खासियत?
Abu Dhabi Hindu Temple Specialty: 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अब भारतवासियों और सनातम प्रेमियों के लिए एक और गर्व करने वाला पल नजदीक है। अबू धाबी में पहले हिन्दू मंदिर का उद्घाटन 14 फरवरी को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होने वाला है। ये मंदिर पश्चिमी एशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर होगा।
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अबू धाबी में पहला हिंदू मंदिर बनकर तैयार है। अब लोगों को बस उद्घाटन का इंतजार है, क्योंकि 14 फरवरी को मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा और उद्घाटन के बाद 18 फरवरी से मंदिर के दरवाजे आम लोगों के लिए खोल दिए जाएंगे।

ऐसे में अबू धाबी में बने भव्य हिंदू मंदिर, जिसका नाम बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर है। आइए जानते हैं इसकी क्या खासियत है ?
मंदिर निर्माण में 700 करोड़ रुपये की लागत
रेगिस्तान में बना यह हिंदू मंदिर पश्चिमी एशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है। इस मंदिर के निर्माण में लगभग 700 करोड़ रुपये की लागत लगी है। इस मंदिर का नाम बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर है, क्योंकि इसका निर्माण बीएपीएस संस्था के नेतृतव में हुआ है। 27 एकड़ में बने इस मंदिर की जमीन को यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने दान में दिया था।
भारतीय मंदिर कारीगरों ने बनाया मंदिर
बीएपीएस स्वामी नारायण मंदिर को भारत के मंदिर कारीगरों ने बनाया है। इस मंदिर में 7 शिखर को भी बनाया गया है, जिसके हर शिखर पर देवी-देवताओं की उपस्थिति को दर्शाया गया है।
राजस्थान के गुलाबी बलुआ पत्थर से मंदिर का निर्माण
इस्लामिक देश में बने इस मंदिर के निर्माण में जहां राजस्थान के गुलाबी पत्थरों इस्तेमाल किया गया है, वहीं इटली के संगमरमर का भी मंदिर में इस्तेमाल हुआ है। यूएई में पड़ने वाली भीषण गर्मी भी यहां लगे पत्थरों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा पाएगी।
'BAPS स्वामी नारायण' एशिया का सबसे बड़ा मंदिर
ये मंदिर एशिया का सबसे बड़ा मंदिर होगा। जिसकी ऊंचाई 108 फीट, लंबाई 79.86 मीटिर और चौड़ाई 54.86 मीटर बताई जा रही है। इतना ही नहीं इस मंदिर के निर्माण में 18 लाख ईंटों का भी प्रयोग किया गया है।
बारीक नक्काशी से सजाईं गईं दीवारें
मंदिर के बाहरी हिस्से में जो नक्काशी की गई, उसने मंदिर की खूबसूरती को कई गुना बढ़ाने का काम किया है। इसी के साथ मंदिर के प्रांगण में 96 घंटियां लगाई गई हैं, साथ ही साथ मंदिर के भीतरी भाग में जो पत्थरों पर रामायण, महाभारत समेत हिंदू धर्मग्रंथों और पौराणिक कथाओं का जिस सुंदरता के साथ नक्काशी के जरिए वर्णन किया गया है, उसका कोई जवाब नहीं है।












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