Al Ahli hospital strike: इस्लामिक जिहाद क्या है, जिसपर लगा है गाजा में हॉस्पिटल को उड़ाने के आरोप?

Al Ahli hospital strike: इजराइल ने गाजा अस्पताल विस्फोट के लिए फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह इस्लामिक जिहाद को दोषी ठहराया है, जो कि इज़राइल की सेना और हमास के बीच 7 अक्टूबर से शुरू हुए युद्ध के बीच सबसे घातक हमला था।

इस्लामिक जिहाद ने आरोपों से इनकार किया है। इस्लामिक जिहाद ने कहा है, कि "जायोनी दुश्मन अपने झूठ गढ़कर और फिलिस्तीन में इस्लामिक जिहाद आंदोलन पर दोष मढ़कर, गाजा में बैपटिस्ट अरब नेशनल हॉस्पिटल पर बमबारी करके किए गए क्रूर नरसंहार के लिए अपनी ज़िम्मेदारी से बचने की पूरी कोशिश कर रहा है।"

Al Ahli hospital strike

हालांकि, इजराइल ने रॉकेट हमले का वीडियो जारी किया है, जिसमें गाजा से ही अस्पताल पर रॉकेट गिरते हुए देखा जा रहा है। इसके अलावा, इजराइल ने कहा है, कि वो बहुत जल्द कई ऐसे सबूत पेश करेगा, जिससे पुष्टि होगा, कि इस्लामिक जिहाद इस हमले के पीछे हैं।

फिलहाल आरोपों का दौर जारी है, लिहाजा आइये जानते हैं, कि इस्लामिक जिहाद क्या है, ये हमास से कितना अलग है और ये कितना खतरनाक है?

इस्लामिक जिहाद संगठन क्या है?

फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद (पीआईजे), हमास की तरह इजराइल से ही ऑपरेट होता है और पिछले दो-तीन सालों में इस्लामिक जिहाद ही इजराइल पर हमले करते आया है।

इस्लामिक जिहाद के पास लंबी दूरी तक मार करने वाले रॉकेट नहीं हैं और हमास ही गाजा को नियंत्रित भी करता है, लेकिन पीआईजे के पास छोटे हथियारों, मोर्टार, रॉकेट और टैंक-रोधी मिसाइलों का एक महत्वपूर्ण शस्त्रागार और अल-कुद्स ब्रिगेड नामक एक सक्रिय सशस्त्र विंग है।

फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद को इजराइल-फिलिस्तीन के बीच होने वाली शांति प्रक्रिया को भंग करने वाला माना जाताहै और ये शांति प्रक्रिया का विरोध भी करता है। ये इजरायल के साथ किसी भी तरह की बातचीत का विरोध करता है और यह हमास की तरह ही इजरायल के 'कब्जे' के खिलाफ सशस्त्र विरोध चलाता है'। इस्लामिक जिहाद को भी ईरान से समर्थन मिलता है।

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फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद का उदय

हालांकि, फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद की स्थापना 1981 में मिस्र में फिलिस्तीनी छात्रों ने की थी, जिसका मकसद इजराइल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक, गाज़ा और अब इज़राइल के अन्य क्षेत्रों को मिलाकर एक फ़िलिस्तीनी राज्य की स्थापना करना था।

इस्लामिक जिहाद, गाजा पट्टी में दो मुख्य फिलिस्तीनी समूहों में से छोटा है, और हमास की तुलना में इसके पास जिहादियों की संख्या भी कम है।

दोहा संस्थान के डायरेक्टर इब्राहिम फ्रैहाट ने कहा, कि 'हालांकि यह एक छोटा समूह है, लेकिन, इस्लामिक जिहाद बहुत कुशल और अत्यधिक संगठित है। इसके भीतर एक मजबूत अनुशासन है और अपने छोटे आकार के बावजूद इसने इज़राइल के साथ सभी टकरावों में भाग लिया है।"

कितना खतरनाक है इस्लामिक जिहाद?

पिछले कुछ सालों से फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद इजरायली सेना के साथ टकराव में प्रेरक शक्ति बन गया है।

पिछले साल अगस्त में इजराइली हवाई हमलों में इस्लामिक जिहाद के प्रमुख कमांडर तैसिर अल-जबरी की मौत हो गई है, जिसने इजराइल पर कई हमले किए थे। सीआईए की वर्ल्ड फैक्टबुक के मुताबिक, साल 2021 के अनुमानों के मुताबिक, इस संगठन के पास करीब एक हजार लड़ाके हो सकते हैं, हालांकि, अब इसके पास कई हजार लड़ाके होने का अनुमान लगाया गया है और पीआईजे की सदस्यता का पता लगाना मुश्किल है।

वहीं, हमास, जिसने 2009 से इज़राइल के साथ पांच युद्ध लड़े हैं, और PIJ दोनों को पश्चिम द्वारा "आतंकवादी संगठनों" के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। दोनों को ईरान से धन और हथियार मिलते हैं, और पीआईजे नेता ज़ियाद अल-नखला ने पिछले साल इजराइल पर किए गये हमलों के दौरान ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी से मुलाकात की थी।

कहां से मिलती है ट्रेनिंग और फंडिंग?

इस्लामिक जिहाद को प्रशिक्षण, विशेषज्ञता और धन की आपूर्ति ईरान करता है, लेकिन ये समूह अपने ज्यादातर हथियारों का निर्माण स्थानीय तौर पर ही करता है।

हालांकि, इसका बेस गाजा में है, लेकिन, इस्लामिक जिहाद का लेबनान और सीरिया में भी नेतृत्व है, जहां यह ईरानी अधिकारियों के साथ इसके घनिष्ठ संबंध हैं।

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के प्रमुख ने पिछले साल इस्लामिर जिहाद को संबोधित करते हुए उसका अंत तक साथ देने की घोषणा की थी। हालांकि, पिछले कुछ सालों में इजराइल ने इस्लामिक जिहाद के कई कमांडरों को मार गिराया है।

साल 2019 में इजरायल ने इस्लामिक जिहाद के बड़े कमांडर बहा अबू अल-अट्टा को मार गिराया था और पिछले साल इस्लामिक जिहाद के एक और कमांडर अल-जबरी को भी इजरायली सेना ने मार गिराया था।

अल-अट्टा की हत्या गाजा पट्टी में 2014 के युद्ध के बाद से इजरायली सेना द्वारा इस्लामिक जिहाद के आंकड़े की पहली हाई-प्रोफाइल हत्या थी। 50 साल का अल-जबारी इस्लामिक जिहाद की "सैन्य परिषद" का सदस्य था, जो गाजा में इस समूह की निर्णय लेने वाली संस्था थी। वह इजरायली बलों द्वारा 2021 के हमले के दौरान गाजा शहर और उत्तरी गाजा पट्टी में इस्लामिक जिहाद गतिविधियों का प्रभारी था, जब 11 दिनों की लड़ाई के दौरान गाजा में कम से कम 260 लोग मारे गए थे और इजरायल में 13 लोग मारे गए थे।

हमास जहां गाजा पट्टी को नियंत्रित करता है, वहीं इस्लामिक जिहाद की उपस्थिति वेस्ट बैंक में है, जिसपर इजराइल का नियंत्रण है।

पिछसे साल इजरायल के तत्कालीन रक्षा मंत्री बेनी गैंट्ज़ ने विदेशों में रहने वाले इस्लामिक जिहाद के नेताओं को निशाना बनाने की धमकी दी थी और उन्होंने इस्लामिक जिहाद के 19 सदस्यों को गिरफ्तार करने का भी दावा किया था।

इस्लामिक जिहाद का मकसद इजराइल के अस्तित्व को ही खत्म कर देना और पूर्ण इस्लामिक राष्ट्र की स्थापना करना है और वो लगातार इजराइल के खिलाफ हमलों को उकसाने का काम करता है।

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