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वुल्फ वॉरियर डिप्लोमेसी से पांडा के प्यार तक... अपनी आक्रामक विदेश नीति बदलने पर क्यों मजबूर हुआ चीन?

China Diplomacy: "बहुत संभव है, वुहान में कोरोना वायरस अमेरिका की सेना लेकर आई हो"... "अमेरिका में जातीय अल्पसंख्यकों के खिलाफ नस्लवाद अमेरिकी समाज की एक पुरानी बीमारी है"... इन दो बयानों को गौर से पढ़िए, क्योंकि ये बयान चीनी विदेश मंत्रालय पूर्व प्रवक्ता झाओ लिजियन के थे।

झाओ लिजियन को चीन की 'वुल्फ वॉरियर डिप्लोमेसी', यानि 'भेड़िया डिप्लोमेसी' का सबसे उत्साही राजनयिक माना जाता है।

chinese diploamcy panda and wolf

झाओ लिजियन के बयानों की अकसर पश्चिमी देशों में आलोचना की जाती रही है, लेकिन झाओ लिजियन के आक्रामक बयान कभी कम नहीं हुए और इसकी वजह से उनके बयान सोशल मीडिया पर अकसर सुर्खियां बटोरते रहे और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनके करीब 19 लाख फॉलोवर्स इसी वजह से बने।

कुछ साल पहले तक चीन की डिप्लोमेटिक शब्दों में नरमी होती थी, लेकिन शी जिनपिंग के शासनकाल में चीन के सुर बदलने शुरू हुए और फिर 'वुल्फ वॉरियर डिप्लोमेसी' का युग लाया गया।

लेकिन फिर अचानक, इस साल जनवरी की शुरूआत में झाओ लिजियन का दिखना कम हुआ और फिर वो चीनी विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखना बंद हो गये। झाओ लिजियन का तबादला चीनी विदेश मंत्रालय के उस डिपार्टमेंट में कर दी गई, जो भूमि और समुद्री सीमाओं का प्रबंधन करता है।

तब से, उनके बारे में बहुत कम सुना गया है, और उनके सोशल मीडिया पोस्ट भी दिखने बंद हो गये हैं।

झाओ लिजियन के ट्रांसफर से पहले, चीनी सरकार ने अपने 'भेड़िया योद्धा राजनयिकों' पर लगाम लगाने के लिए कुछ प्रयास किए थे। लेकिन, जब फ्रांस में बीजिंग के राजदूत लू शाय ने अप्रैल में एक फ्रांसीसी साक्षात्कार में सोवियत के बाद के राज्यों की संप्रभुता पर सवाल उठाया, तो कई यूरोपीय देशों में नाराजगी फैल गई, बीजिंग ने तुरंत लू और उनकी टिप्पणियों से खुद को दूर कर लिया।

नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर में चीन की विदेश नीति पढ़ाने वाले एसोसिएट प्रोफेसर चोंग जा इयान के अनुसार, फिलहाल भेड़िया योद्धाओं को एक तरफ धकेल दिया गया है।

इसी तरह एक और जानवर है, जो लंबे समय से चीनी कूटनीति के नरम पक्ष का प्रतीक रहा है।

पूरे पश्चिम के चिड़ियाघरों में रहने वाले चीनी पांडा, इस साल चीन वापस लौट आए हैं और पांडा को फिर से पश्चिम पहुंचाने की फिलहाल चीन की कोई योजना नहीं है।

रटगर्स यूनिवर्सिटी के शाओयू युआन, जो चीनी कूटनीति के विद्वान हैं, उनके अनुसार, भेड़िया योद्धाओं और पांडा का प्रस्थान, बीजिंग के राजनयिक दृष्टिकोण में बदलाव का सुझाव देता है।

उन्होंने कहा, "वे वर्तमान में कठोर और नरम कूटनीति के बीच मधुर स्थान खोजने की कोशिश कर रहे हैं।"

भेड़िया जहां चीन की आक्रामक डिप्लोमेसी का प्रतीक हैं, वहीं पांडा, चीन के 'प्यार' दिखाने का प्रतीक है।

chinese diploamcy panda and wolf

आक्रामक राष्ट्रवाद का चीन में विस्तार

वुल्फ वॉरियर डिप्लोमेसी का नाम 2017 की चीनी फिल्म वुल्फ वॉरियर 2 से लिया गया है, जो एक पूर्व चीनी सैनिक के बारे में है, जो विद्रोहियों और सरकारी बलों के बीच लड़ाई में फंसे चीनी नागरिकों को बचाने के लिए एक अज्ञात युद्धग्रस्त अफ्रीकी देश में जाने के लिए स्वेच्छा से फैसला लेता है।

एनयूएस के चोंग के अनुसार, चीन की वुल्फ वॉरियर डिप्लोमेसी का दिखना साल 2016 के हेग स्थिति मध्यस्थता कोर्ट के उस फैसले के बाद सामने आया था, जिसमें कहा गया था, कि दक्षिण चीन सागर पर चीन का दावा बिना किसी आधार के है।

वुल्फ वॉरियर डिप्लोमेसी, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का ये संकेत घरेलू और विदेशी ऑब्जर्वर्स, दोनों के लिए है। ताकि, देश के अंदर नागरिकों से लेकर दूसरे देश इस बात को गंभीरता से लें, कि पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) अपने हितों की रक्षा के लिए गंभीर है।

अलजजीरा की एक रिपोर्ट में चोंग ने कहा है, कि "यह चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) द्वारा चीनी राष्ट्रवाद की अधिक स्पष्ट भावना को बढ़ावा देने के साथ भी मेल खाता है, जिसमें मजबूत जातीय और सांस्कृतिक तत्व शामिल हैं।"

जबकि, पिछले दशकों के चीनी राजनयिक काफी सतर्क और नौकरशाही राजनयिक लहजे के लिए जाने जाते थे, वे शायद ही कभी विदेशी मीडिया से जुड़ते थे या सोशल मीडिया पर पोस्ट करते थे, लेकिन 'भेड़िया योद्धा' राजनयिकों ने बेशर्मी से विदेशी आलोचना से बीजिंग का बचाव किया है और सक्रिय रूप से पश्चिमी देशों पर निजी हमले शुरू किए।

चीन के 'भेड़िया योद्धा' राजनयिकों ने खुलेआम पश्चिम को 'चीन के प्रति दुष्ट भावना का शिकार' बताया।

हालांकि, भेड़िया योद्धा कूटनीति अपेक्षाकृत हाल की घटना है, लेकिन पांडा कूटनीति काफी ज्यादा स्थापित रही है।

1950 के दशक में, जब चीन की नई राजनीति ऊपर उठ रही थी, उस वक्त से चीन ने पांडा डिप्लोमेसी को आगे बढ़ाया।

1970 के दशक में संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की चीन की ऐतिहासिक यात्रा के साथ चीन की पांडा डिप्लोमेसी की शुरूआत हुई, जब पश्चिमी देशों में चीन को पहली बार अपनाया गया था।

अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा के बाद, तत्कालीन चीनी नेता माओत्से तुंग ने अमेरिका को उपहार के रूप में दो पांडा दिए। दो साल बाद, यूनाइटेड किंगडम को भी दो पांडा दिए गए।

चोंग ने बताया, कि "पांडा ने उस समय पीआरसी पर एक दोस्ताना और स्नेहपूर्ण दृष्टिकोण प्रदान किया, जब कोरियाई युद्ध और सांस्कृतिक क्रांति से उपजी पीआरसी की नकारात्मक धारणाएं अपेक्षाकृत काफी ताजा थीं।"

1980 के दशक से, बीजिंग ने दुनिया भर के देशों के साथ मित्रता के संकेत के रूप में ऋण देने के साथ साथ गिफ्ट के तौर पर पांडा दिए।

2023 तक बीजिंग ने 20 विभिन्न देशों में लगभग 26 चिड़ियाघरों को पांडा गिफ्ट में दिए थे।

chinese diploamcy panda and wolf

'राजनयिक थर्मामीटर'

चोंग के अनुसार, लेकिन बीजिंग की जानवरों वाली ये कूटनीति, कई मायनों में अपनी उपयोगिता खो चुकी है।

एसोसिएट प्रोफेसर चोंग ने कहा, कि पांडा के संदर्भ में, चीन की जो सुंदर और मैत्रीपूर्ण छवि वे व्यक्त करना चाहते थे, उसे दशकों से बाहरी दुनिया ने और करीब से देखा और चीन को लेकर दुनिया का नजरिया और ज्यादा बदल गया।

रटगर्स विश्वविद्यालय के युआन का मानना है, कि पांडा पश्चिमी चिड़ियाघरों को छोड़कर नए चिड़ियाघरों में जा रहे हैं, जो चीन और यूरोप तथा उत्तरी अमेरिका के देशों के बीच मौजूदा ख़राब संबंधों का संकेत है।

युआन ने कहा, "पांडा कुछ मायनों में कूटनीतिक थर्मामीटर हैं।"

उन्होंने कहा, कि "यह बीजिंग के लिए यह संकेत देने का एक तरीका हो सकता है, कि वह द्विपक्षीय संबंधों के विकास के तरीके से संतुष्ट नहीं है।"

अब स्थिति ये बन गई है, कि अगर चीन किसी देश से नाराज है, तो वो उस देश से अपना पांडा वापस मांग लेता है।

आक्रामकता को शांत कर रहा है चीन?

चीनी सरकार ऑस्ट्रेलिया और लिथुआनिया दोनों के साथ संबंध सामान्य कर रही है।

नवंबर में सैन फ्रांसिस्को में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से मुलाकात के बाद से बीजिंग ने भी अमेरिका के साथ अधिक सौहार्दपूर्ण रुख अपनाया है।

विशेषज्ञों का कहना है, कि बीजिंग का कूटनीतिक बदलाव उस आर्थिक स्थिति से भी जुड़ी है, जिसका वह वर्तमान में सामना कर रहा है। कोविड संकट के बाद चीन अपनी खराब आर्थिक अर्थव्यवस्था से जूझ रहा है और विदेशी निवेशक काफी तेजी से बीजिंग से अपना निवेश बाहर ले जा रहे हैं।

चीन की कम्युनिस्ट सरकार विकास के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रही है। बेरोजगारी दर को सरकार ने अब प्रकाशित करना बंद कर दिया है, जो जून में 21.3 प्रतिशत तक पहुंच गई और चीन ने 2023 की जुलाई-सितंबर अवधि में अपना पहला प्रत्यक्ष विदेशी निवेश घाटा दर्ज किया।

लिहाजा, अब चीन अपनी आक्रामकता को शांत रखते हुए देशों से संबंध सामान्य करना चाहता है, ताकि आर्थिक मोर्चे पर स्थिरता लाई जाए, क्योंकि चीन को अब पता चल गया है, कि वो सिर्फ अपने दम पर जिंदा नहीं रह सकता है।

लिहाजा, वुल्फ वॉरियर डिप्लोमेट्स अभी फ्रेम से बाहर कर दिए गये हैं और अब नाराजगी जताने का जिम्मा भी पांडा को ही दे दिया गया है।

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