कहीं कुलभूषण जाधव जैसा ना हो जाए हाल.. क्या कहते हैं कतर में फांसी की सजा पाए नौसेना के पूर्व अफसरों के बैचमेट

Indian Navy Officials case Qatar: इंसाफ की प्रक्रिया को पूरी तरह से दरकिनार तक कतर में भारतीय नौसेना के आठ पूर्व अधिकारियों को मौत की सजा सुनाए जाने की खबर ने उनके परिवार और दोस्तों के बीच सदमे की लहर फैला दी है। भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारियों को किसी दूसरे देश में मिली फांसी की यह घटना, आधुनिक भारत के इतिहास में "आश्चर्यजनक" और है।

लेकिन, भारतीय नौसेना के इन पूर्व अधिकारियों के साथ ट्रेनिंग करने वाले उनके बैचमेट्स और पूर्व अधिकारियों की पत्नियों ने उनकी सुरक्षित घर वापसी के लिए एक भावुक अभियान चलाना शुरू किया है और वो दुनिया से अपनी बात कर रहे हैं, कि कैसे पूर्व अधिकारियों को फंसाया गया है।

Indian Navy Officials qatar

कतर में जिन नौसेना के पूर्व अधिकारियों को फांसी की सजा दी गई है, उनके नाम कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कमांडर अमित नागपाल, कमांडर पूर्णेंदु तिवारी, कमांडर सुगुनकर पाकला, कमांडर संजीव गुप्ता और नाविक रागेश हैं।

जिन पूर्व भारतीय अधिकारियों को फांसी की सजा मिली है, उनमें एक पूर्व अधिकारि के माता-पिता को अभी तक जानकारी नहीं दी गई है, कि उनके बेटे को कतर की एक अदालत में फांसी की सजा सुनाई गई है।

यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय नौसेना के पूर्व एविएटर कमांडर केपी संजीव कुमार ने कहा, कि "हमारे पास आशा ही है।"

उन्होंने कहा, कि "वे पिछले साल 30 अगस्त से कैद में हैं। आरोपों को सार्वजनिक नहीं किया गया है और जो आरोप उनके खिलाफ लगाए गये हैं, उन्हें उनके परिवारों को दिखाया भी नहीं गया है। छह आरोपों में से तीन हटा दिए गए।" केपी संजीव कुमार ने कतर के अपारदर्शी न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

केपी संजीव कुमार एक भावुक ब्लॉग में कहते हैं, कि "मुझे डर है, कि अगर हम तत्परता से आगे नहीं बढ़े तो यह मामला कुलभूषण जाधव (एक और निंदनीय मामला, जिस मामले की जांच ठंडी पड़ गई है) की तरह हो सकता है।"

वहीं, फांसी की सजा पाए अमित नागपाल के साथ काम कर चुके केपी संजीव कुमार कहते हैं, कि "हम अमित नागपाल को नैगी कहकर बुलाते हैं। वह एक काफी सज्जन व्यक्ति और उच्च चरित्र वाले व्यक्ति हैं।" उन्होंने कहा, कि "एनडीए में पढ़ाई के दिनों से हम दोस्त रहे हैं और कोच्चि में हमने एक साथ ट्रेनिंग ली है। वह कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध विशेषज्ञ हैं और रेडियो साइलेंस को समझने में माहिर हैं।"

लेकिन, केपी संजीव कुमार आगे अफसोस जताते हुए कहते हैं, कि "ये चरित्र प्रमाण पत्र अचानक मौत की सजा में कैसे बदल गए?" मौत की सजा पाने वाले इन सात अधिकारियों और एक नाविक का भारतीय नौसेना में बेदाग सर्विस रिकॉर्ड रहा है और उन्होंने कई संवेदनशील पोस्टिंग पर काम किया है।

यूरेशियन टाइम्स ने एक अन्य अधिकारी पी सुगुनाकर के दोस्तों से बात की, जो सैनिक स्कूल कोरुकोंडा के पूर्व शिक्षक के बेटे हैं। उसके माता-पिता अपने बेटे को मिली फांसी की सजा से बेखबर हैं।

सुगुनकर के बहनोई के कल्याण चक्रवर्ती ने कहा, कि "हम सभी इस खबर से व्यथित, टूटे हुए और तबाह हो गए हैं। उनकी पत्नी वैजयंती और उनके बेटे और बेटी सदमे में हैं और बीमार हैं। वे डर में जी रहे हैं। उन्हें नहीं पता, कि क्या करना है और सबसे बुरी बात यह है, कि वे नहीं जानते कि उसने क्या किया है।"

उनके परिवार ने कहा, कि शिक्षकों के बेटे, सुगुनाकर 18 साल की उम्र में ही नौसेना में शामिल हो गए और नौसेना इंजीनियरिंग कोर में काम किया। उन्होंने नेवल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से बीटेक (मैकेनिकल) की उपाधि प्राप्त की और डिफेंस सर्विसेज कॉलेज, वेलिंगटन से रक्षा और रणनीतिक अध्ययन में एमएससी भी की।

वह नवंबर 2013 में रिटायर्ड हो गये और दोहा स्थित अल दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज में शामिल होने से पहले कुछ महीनों तक हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड के लिए भी काम किया।

भारत-कतर रक्षा सहयोग

जासूसी का आरोप लगने और बाद में मौत की सजा सुनाए जाने से पहले आठ नौसैनिकों ने कतर की कंपनी अल दहरा के लिए काम किया था। रक्षा क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और कतर के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद, ये फर्म कतर सशस्त्र बल अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान करने में शामिल थी।

अगस्त 2022 में गिरफ्तारी के बाद, दोहा स्थित दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज कंपनी अब बंद कर दी गई है, और सभी कर्मचारियों की नौकरी भी खत्म हो गई है।

वहीं, जिस बात ने भारतीय विदेश मंत्रालय को चौंका दिया है, वह यह है, कि कतर, जो आज सबसे धनी अरब देशों में से एक है, उसके पारंपरिक रूप से भारत के साथ मधुर और सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं। कतर ने इन सभी पूर्व नौसैनिकों को एकांत कारावास में रखा हुआ है और उन्हें 3 अक्टूबर 2022 को कांसुलर पहुंच दी गई। इसके बाद उन्हें डबल ऑक्यूपेंसी सेल में रखा गया और उन्हें भारत में अपने परिवार के सदस्यों को कॉल करने की अनुमति दी गई।

कमांडर (सेवानिवृत्त) पूर्णेंदु तिवारी, जो हिरासत में लिए गए भारतीयों में से हैं, उन्होंने अल दहरा के मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में कार्य किया और नौसेना में सेवा करते हुए कई युद्धपोतों की कमान संभाली। दोषी ठहराए गए बाकी लोगों में कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर सुगुनाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल और नाविक रहेश शामिल हैं।

जासूसी के आरोप में विदेशी जेलों में भारतीय

कुलभूषण जाधव पाकिस्तान की कैद में बंद एक और रिटायर्ड भारतीय नौसैनिक अधिकारी हैं, जो मौत की सजा का सामना कर रहे हैं। 2016 में पाकिस्तान ने उनकी गिरफ्तारी की घोषणा की थी।

पाकिस्तानियों ने उन्हें ईरान की सीमा पर पकड़ने का दावा किया था। उन्हें जासूसी के आरोप में दोषी ठहराया गया और मौत की सजा सुनाई गई। जाधव और भारत सरकार ने जासूसी के पाकिस्तानी आरोपों से साफ इनकार किया है।

इसके अलावा, सरबजीत सिंह एक भारतीय नागरिक थे, जिन्हें पाकिस्तान की एक अदालत ने जासूसी के आरोप में मौत की सजा दी थी। हालांकि, बाद में जेल में उनके ऊपर जानलेवा हमला किया गया, जिनमें उनकी मौत हो गई। सरबजीत सिंह को 1991 में पाकिस्तान ने उस वक्त पकड़ा था, जब वो धोखे से पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश कर गये थे। पाकिस्तान ने उनके खिलाफ एक बम विस्फोट में शामिल होने का आरोप लगाया और फिर मौत की सजा सुना दी।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने बताया, कि सरबजीत सिंह के परिवार ने दावा किया, कि वह नशे की हालत में पाकिस्तान में घुस गये था और निर्दोष थे।

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