‘हिन्दुओं को मुसलमान बनाने के लिए 1,000 सालों तक करेंगे इंतजार’, पुराने ट्वीट पर घिरे पाकिस्तानी PM काकर
पाकिस्तान का धार्मिक अल्पसंख्यकों विशेषकर हिंदुओं पर अत्याचार और भेदभाव करने का दागदार इतिहास रहा है, वर्तमान में वहां कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवर उल हक काकर का शासन है। अब पाकिस्तान के कार्यवाहक पीएम की एक्स पर एक पुरानी पोस्ट वायरल हो गई है।
पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवार उल-हक-काकर ने साल 2020 में ट्विटर पर लिखा था कि सभी हिंदुओं को इस्लाम कबूल कर लेना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने लिखा था कि सभी हिंदुओं को इस्लाम में परिवर्तित होने के लिए राजी करने के लिए मुसलमान एक सहस्राब्दी यानी कि हजार सालों तक इंतजार करने के लिए तैयार हैं।

काकर ने यह बात एक भारतीय एक्स यूजर के जवाब में लिखी, जिसने कहा था कि मोहम्मद अली जिन्ना काफिर थे। काकर ने 25 सितंबर 2020 को जब ये टिप्पणी की थी जब संयुक्त राष्ट्र महासभा (उंगा) का सत्र चल रहा था। दुनिया उस समय कोविड-19 महामारी से जूझ रही थी।
उंगा सत्र के दौरान भारत का प्रतिनिधिदल उस वक्त वॉकआउट कर गया जब पाकिस्तान के तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने संबोधन में भारत को लेकर उलूलजुलूल बोलना शुरू कर दिया।
एक भारतीय जर्नलिस्ट ने जब इस बात की जानकारी एक ट्वीट के जरिये दी तो काकर ने अजब-गजब तरीके से जवाब देना शुरू किया। पीएम काकर ने लिखा, 'हॉल से जाने के बजाय अगर भारतीय कश्मीर से निकलेंगे तो दक्षिण एशिया में शांति आएगी।'
काकर ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, ' धरती पर दुनिया की कोई भी ताकत पाकिस्तान को मिटा नहीं सकती है।' उन्होंने आगे लिखा, ' हम इंतजार कर रहे हैं कि सभी हिंदू इस्लाम के सच को समझें और हम इसके लिए एक सदी तक इंतजार करेंगे, हमें कोई जल्दी नहीं है।' एक ट्वीट में तो उन्होंने यहां तक लिख दिया कि पाकिस्तान संघ के सपने को साकार करने में बाधक है।
अब उनके इस ट्वीट के लिए उनकी आलोचना भी खूब हो रही है। अब उनके इस ट्वीट के लिए उनकी आलोचना भी खूब हो रही है। पाकिस्तान की पत्रकार आलिया शाह लिखती हैं कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री सभी हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराना चाहते हैं, यह पाक के अल्पसंख्यकों के लिए चौंकाने वाला और शर्मनाक बयान है।
उनका बयान तब सामने आया है जब मंत्री जलील अब्बास जिलानी ने दावा किया था कि हिंदू धर्म पाकिस्तान में ही पनपा था। पाकिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री जलील अब्बास जिलानी ने न्यूयॉर्क में एशिया सोसायटी शिखर सम्मेलन में हिंदू धर्म को एक बहुत ही महत्वपूर्ण धर्म भी बताया था।












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