पाकिस्तान से कौन सी मूर्तियां मांग रहे हैं विश्व हिंदू परिषद के नेता

वीएचपी नेता
BBC
वीएचपी नेता

पाकिस्तान के दक्षिण पंजाब प्रांत स्थित मुल्तान की एक निर्माणाधीन कचहरी से ख़ज़ाना, सिक्के, पुरावस्तु और कथित तौर पर कुछ मूर्तियाँ मिलने के बाद परिसर में मौजूद 'मालखाने' को सील कर दिया गया है और वहाँ पर पुलिस बल तैनात कर दिए गए हैं.

लाहौर में मौजूद बीबीसी संवाददाता तर्हब असग़र का कहना है कि बरामद की गई सामग्रियों में सिक्कों और आभूषणों के अलावा कुछ मूर्तियां मिलने की बात भी कही जा रही है मगर इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है.

इधर, भारत में विश्व हिंदू परिषद के नेताओं ने पाकिस्तान उच्चायुक्त को ज्ञापन सौंपकर 'खुदाई में मिली मूर्तियां सौंपने' की मांग की है.

जबकि तर्हब असग़र ने ज़िला मुल्तान के प्रशासन के प्रवक्ता राणा अखलाक़ से जब बात की तो उन्होंने कहा कि मूर्तियों की जो तस्वीरें मीडिया पर चलाई गई हैं, वो दो साल पहले की हैं जिन्हें पकिस्तान के पुरातत्व विभाग ने तब ज़ब्त किया था जब उनकी थाईलैंड स्मगलिंग की जा रही थी.

जिला प्रशासन के अधिकारी का कहना था कि अभी तक किसी भी तरह की मूर्ति के मिलने की ख़बर नहीं है.

पाकिस्तान
tarhab asghar/BBC
पाकिस्तान

कैसे मिली ये सामग्री

फ़िलहाल जिला प्रशासन ने बरामद सामग्री को अपने कब्ज़े में ले लिया है.

प्रशासन का कहना है कि बरामद सिक्के और अन्य पुरातात्विक महत्व की चीज़ें किस काल के हैं, इसकी जांच अब पकिस्तान का पुरातत्व विभाग करेगा.

पकिस्तानी अख़बार 'द न्यूज़' का कहना है कि मुल्तान के ज़िला प्रशासन ने मुख्य सचिव को आवेदन भेजा है जिसमें अनुरोध किया गया है कि जो कुछ कचहरी परिसर में खुदाई के दौरान मिला है, उसकी पुरातत्व विभाग जांच करे ताकि पता चल सके कि बरामद वस्तुएं किस काल की हैं.

तर्हब असग़र के अनुसार, ये कचहरी परिसर अंग्रेज़ों के ज़माने से भी पहले का है और अब इसके पुनर्निर्माण का काम चल रहा था जिसके तहत भूमिगत पार्किंग बनाई जानी थी.

पाकिस्तान
tarhab asghar/BBC
पाकिस्तान

इसलिए कुछ बहुत ही पुरानी इमारतों को तोड़ा गया और इसी दौरान जब मालखाने की खुदाई का काम चल रहा था तो मज़दूरों के हाथ ये ख़ज़ाना लगा. इसकी सूचना मुल्तान के ज़िला प्रशासन को मिलते ही इलाके को सील कर दिया गया.

तर्हब कहतीं हैं कि उनके सूत्रों ने बताया है कि सिक्के अंग्रेजों के काल के भी हो सकते हैं या उससे पहले के भी हो सकते हैं. आभूषण किस समय काल के हैं इसका भी अभी तक पता नहीं चल पाया है.

एक ओर मुल्तान का प्रशासन मूर्तियां न मिलेन की बात कर रहा है मगर इधर, भारत में विश्व हिंदू परिषद का दावा है कि कचहरी परिसर में खुदाई के दौरान मूर्तियाँ भी बरामद हुईं हैं जो हिंदू देवी-देवताओं की हो सकती हैं.

इस मामले को लेकर संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने भारत में पकिस्तान के उच्च आयुक्त को एक ज्ञापन सौंपा है.

इस ज्ञापन में मांग की गई है कि पकिस्तान की सरकार बरामद की गई मूर्तियों को पकिस्तान में मौजूद भारत के उच्च आयुक्त को सौंप दे ताकि भारत लाकर उनकी प्राण प्रतिष्ठा की जा सके.

किस आधार पर किया जा रहा है यह दावा

परिषद के विनोद बंसल ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि उन्हें पकिस्तान के मुल्तान के कुछ हिन्दुओं से पता चला है कि मूर्तियाँ गणेश भगवान और लक्ष्मी की हो सकती हैं.

उनका कहना था, "हमें पहले पकिस्तान के समाचार पत्रों के माध्यम से ये जानकारी मिली. ये पता है कि मूर्तियाँ भी मिलीं हैं. मगर ये पता नहीं चल पाया है कि मूर्तियाँ किनकी हैं क्योंकि इलाक़े को सील कर दिया गया है और मुल्तान के प्रशासन ने इन्हें अपने क़ब्ज़े में लेकर जांच शुरू कर दी है."

सदाक़त हुसैन वरिष्ठ वकील हैं जिनका चैम्बर कचहरी के पास ही है.

उन्होंने समाचार पत्र 'द न्यूज़' को बताया कि परिसर के जिस हिस्से में पुनर्निर्माण का काम चल रहा था, वो पिछले 80 वर्षों से बंद पड़ा हुआ है यानी आज़ादी के पहले से ही वो इमारत वीरान रही. उन्होंने ये भी बताया कि इसके अलावा कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़ भी मलबे के नीचे से मिले हैं.

पकिस्तान के दैनिक समाचार पत्र 'द नेशन' ने मुल्तान के ज़िला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के हवाले से लिखा है कि जिस जगह खुदाई का काम चल रहा रहा है, उस भवन पर एक तख्ती लगी है जिसपर 'मालखाना नंबर 1' लिखा हुआ है जिसे अब सील कर दिया गया है.

समाचार पत्र ने मुल्तान जिला परिषद् के एक सदस्य के हवाले से ये भी लिखा है कि ये मालखाना ठीक उस इमारत के पीछे हैजहां पर एंटी करप्शन के विशेष जज की अदालत हुआ करती थी.

ये भी कहा गया कि घटना की जानकारी मिलते ही निर्माण स्थल पर जिला जज अन्य अधिकारियों के साथ पहुंचे थे और उन्होंने इलाके की नाकेबंदी का आदेश भी दिया था. फिलहाल परिसर में किसी भी तरह की तोड़फोड़ पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है.

पाकिस्तान
tarhab asghar/BBC
पाकिस्तान

क्या चाहती है वीएचपी

विश्व हिंदू परिषद के विजय शंकर तिवारी उस प्रतिनिधि मंडल में थे जिसने पकिस्तान के उच्चायुक्त को ज्ञापन सौंपा था. बीबीसी से बात करते हुए उनका कहना था कि पाकिस्तान से मांग की गई है कि वह भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों को इलाक़े का मुआयना करने की इजाज़त दे.

तिवारी कहते हैं कि जो बरामद हुआ है, उससे प्रथम दृष्टया यही लगता है कि पुरावस्तु भारत के किसी राजा के काल के रहे होंगे. वो कहते हैं कि विश्व हिंदू परिषद को सिर्फ वहां मिलीं मूर्तियों से ही ज़्यादा मतलब है और वो चाहते हैं कि इन्हें भारत को सौंप दिया जाए.

परिषद की तरफ से पकिस्तान उच्चायोग को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है, "अगर पकिस्तान की तरफ़ से बरामद की गई मूर्तियाँ भारत को सौंप दी जाती हैं तो इसके लिए संगठन पकिस्तान का तहे दिल से शुक्रगुज़ार होगा. इस क़दम से दोनों देशों के बीच भाईचारा और शांति भी पैदा होगी."

संगठन चाहता है कि पकिस्तान ऐसा कर एक मिसाल पेश करे. मगर लाहौर में मौजूद बीबीसी संवाददाता तर्हब असग़र कहतीं हैं अभी तो यही पता करने में समय लगेगा कि वहां पर मिला क्या है.

वह बताती हैं कि स्थानीय प्रशासन ने अभी बरामद सामग्री को ज़ब्त किया है और अगली प्रक्रिया के तहत सबकुछ पकिस्तान के पुरातत्व विभाग को सौंपा जाएगा. यह विभाग पता लगाएगा कि बरामद सोने या चांदी के सिक्के, पुरावस्तु या पुराने हथियार वगैरह किस काल के हैं. ये सबकुछ इतनी जल्दी नहीं हो पाएगा.

तर्हब असग़र का कहना है कि सोमवार को पकिस्तान के पुरातत्व विभाग के कर्मियों ने बरामद सामग्री की जांच शुरू की और वो उनकी सूची बनाने का काम कर रहे हैं.

हालांकि वो कहती हैं अभी तक जितने भी अधिकारियों से बातचीत हुई है, उसमे उन्होंने मूर्तियों का कोई ज़िक्र नहीं किया. हो सकता है कि बाद में जांच में मूर्तियां भी मिलें मगर अभी तक ऐसा नहीं है.

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+