US Vs Iran: पहले धमकी और अब ट्रंप के अधिकारियों की पिज्जा-पार्टी! ईरान की हवा टाइट, शुरू हुआ पलायन
US Vs Iran: जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच हुई न्यूक्लियर पर बातचीत बेनतीजा रही। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है। ओमान की मध्यस्थता में हुई दूसरे दौर की बातचीत से उम्मीद थी कि कोई ठोस रास्ता निकलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। नतीजतन मिडिल ईस्ट में फिर से मिलिट्री मूवमेंट की चर्चा तेज हो गई है। डिप्लोमैसी की टेबल पर बात अटकी, तो अब सबकी नजरें जमीन और समुद्र पर हो रही हलचलों पर टिक गई हैं।
नई खिड़की या बंद दरवाज़ा?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बातचीत के बाद कहा कि चर्चा के दौरान 'अवसर की एक नई खिड़की' खुली थी। यानी उनके मुताबिक बातचीत में कुछ पॉजिटिव संकेत जरूर थे। लेकिन दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया कि अमेरिका की मांग वही पुरानी है-ईरान यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) को पूरी तरह शून्य करे।

यहीं असली पेंच फंसा है। ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को 'शांतिपूर्ण' बताता है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को शक है कि यह बम बनाने की दिशा में जा सकता है। दोनों की पोजीशन कड़ी है, और इसी वजह से डील फाइनल नहीं हो पाई।
पेंटागन पिज़्ज़ा इंडेक्स: मीम या मिलिट्री सिग्नल?
अब कहानी में थोड़ा इंटरेस्टिंग ट्विस्ट आता है। जैसे ही मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य तैनाती बढ़ी, इंटरनेट पर एक पुराना सिद्धांत फिर ट्रेंड करने लगा-'पेंटागन पिज़्ज़ा इंडेक्स'। ये कोई आधिकारिक थ्योरी नहीं है, बल्कि कोल्ड वॉर (Cold War) के दौर का एक अनौपचारिक ऑब्जर्वेशन है। इसके मुताबिक, जब पेंटागन के आसपास पिज़्ज़ा डिलीवरी अचानक बढ़ जाती है, तो इसका मतलब हो सकता है कि अंदर कुछ बड़ा सैन्य फैसला लिया जा रहा है।
लॉजिक क्या है?
• संकट के समय रक्षा अधिकारी देर रात तक काम करते हैं।
• लंबे शिफ्ट में काम करते हुए वे बाहर से खाना मंगाते हैं।
• पिज़्ज़ा डिलीवरी बढ़ने का मतलब अंदर कुछ इमरजेंसी मूड चल रहा है।
इसे आम भाषा में 'पिज्जिंट' यानी Pizza Intelligence भी कहा गया था।
कैसे बना ये इंटरनेट ट्रेंड?
कोल्ड वॉर के दौर में विदेशी खुफिया एजेंसियां वाशिंगटन डीसी के पिज़्ज़ा आउटलेट्स की गतिविधियों पर नज़र रखती थीं। उनका मानना था कि इससे अमेरिकी सैन्य तैयारियों के बारे में इशारा मिल सकता है। आज के इंटरनेट के दौर में वही आइडिया एक नए अंदाज़ में वापसी कर चुका है। ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) में रुचि रखने वाले लोग और सोशल मीडिया यूज़र्स पेंटागन के आसपास के रेस्टोरेंट्स की ऑनलाइन एक्टिविटी ट्रैक करते हैं-जैसे ऑर्डर वॉल्यूम, डिलीवरी टाइमिंग, और अचानक बढ़ी हलचल। हालांकि, खाने के ऑर्डर और मिलिट्री फैसलों के बीच कोई आधिकारिक या प्रमाणित संबंध नहीं है। यह ज्यादा एक प्रतीक है- लोगों की बढ़ती वैश्विक चिंता का।
तत्काल ईरान छोड़ें भारतीय- विदेश मंत्रालय
धमकी और पिज्जा पार्टी जैसे कई इशारों को डिकोड किया गया तो कई देशों ने बड़े और सख्त फैसले ले लिए। इसी बीच तेहरान स्थिति भारतीय दूतावास ने सभी भारतीयों को तत्काल ईरान छोड़ने की हिदायत दी है। इसके अलावा कई और देशों ने इसी तरह की चेतावन और अलर्ट जारी किए हैं। इसलिए इस पिज्जा पार्टी को और ज्यादा बड़ा संकेत माना जा रहा है। एडवाइजरी जारी होते ही ईरान से बड़ी तादाद में पलायन शुरू हो गया है।
असली टेंशन क्या है?
जिनेवा बातचीत का बेनतीजा रहना सिर्फ एक डिप्लोमैटिक फेलियर नहीं है। इसके कई बड़े असर हो सकते हैं। उदाहरण के लिए- मिडिल ईस्ट में सैन्य टकराव का खतरा बढ़ सकता है। तेल बाजार में अस्थिरता आ सकती है। क्षेत्रीय सहयोगी देश अपनी-अपनी सैन्य तैयारी बढ़ा सकते हैं। वैश्विक राजनीति में ध्रुवीकरण और तेज हो सकता है।
जब एक तरफ बातचीत अटकती है और दूसरी तरफ एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात होते हैं, तो दुनिया भर के पॉलिसी सर्कल्स से लेकर ट्विटर और रेडिट जैसे प्लेटफॉर्म्स तक-हर जगह अटकलों का बाजार गर्म हो जाता है।
दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर पहुंचा मिडिल ईस्ट
डिप्लोमैटिक बातचीत के साथ-साथ सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत USS गेराल्ड आर. फोर्ड अब मध्य पूर्व में तैनात कर दिया गया है। ध्यान देने वाली बात ये है कि वहां पहले से ही USS अब्राहम लिंकन मौजूद है। यानी अब अमेरिका के दो बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर उस क्षेत्र में एक्टिव हैं।
एयरक्राफ्ट कैरियर सिर्फ जहाज़ नहीं होते, ये चलते-फिरते एयरबेस होते हैं-जहां से फाइटर जेट उड़ सकते हैं, मिसाइल सिस्टम तैनात हो सकते हैं और बड़ी सैन्य कार्रवाई की तैयारी की जा सकती है।ऐसे में सवाल उठना लाजमी है- क्या ये सिर्फ 'प्रेशर टैक्टिक' है या आने वाले समय में कुछ बड़ा होने वाला है?
आगे क्या?
फिलहाल स्थिति 'वेट एंड वॉच' मोड में है। ईरान और अमेरिका के बीच अगला कदम क्या होगा, यह साफ नहीं है।
क्या बातचीत फिर से शुरू होगी?
क्या अमेरिका और दबाव बढ़ाएगा?
या फिर यह सिर्फ रणनीतिक शक्ति प्रदर्शन है?
एक बात साफ है- डिप्लोमैसी और मिलिट्री मूवमेंट साथ-साथ चल रहे हैं। और जब दोनों एक ही समय पर एक्टिव हों, तो दुनिया की धड़कन थोड़ी तेज होना लाज़मी है। अब देखना यह है कि यह टेंशन सिर्फ 'नैरेटिव वॉर' तक सीमित रहता है या जमीन पर कुछ बड़ा इम्पैक्ट देखने को मिलता है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
डिफेंस एक्सपर्ट की मानें तो अमेरिका जिस तरीके के कदम उठा रहा है उससे ऐसा लग रहा है कि ट्रंप ने जो वक्त दिया है वह खत्म होते ही सैन्य कार्यवाही शुरू हो सकती है। लेकिन यूएस डीप स्टेट इस मामले पर धीरे-धीरे आगे बढ़ने की सलाह दे रहे हैं। इसलिए या तो ईरान-अमेरिका के बीच जंग मार्च के पहले हफ्ते में हो सकती है और अगर, यूं ही मामला खिंचता रहा तो साल 2026 के आखिर तक भी ये मामला खिंच सकता है।
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