हाइपरसोनिक हथियार बनाएंगे आकुस देश - यूके, यूएस और ऑस्ट्रेलिया

पिछले साल सितंबर में हुई थी आकुस की घोषणा

वॉशिंगटन, 06 अप्रैल। अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया मिलकर हाइपरसोनिक हथियार बनाएंगे और इलेक्ट्रॉनिक युद्धक क्षमताएं बढ़ाएंगे. इन तीनों देशों ने पिछले साल आकुस (AUKUS) नाम का एक संगठन बनाया था, जिसे चीन से संभावित खतरे के खिलाफ तैयारी के रूप में देखा जा रहा है.

तीनों देशों ने कहा है कि हाइपरसोनिक हथियार बनाने का यह संयुक्त उपक्रम उन कोशिशों में और ज्यादा ऊर्जा लाएगा, जो तीनों देशों ने आकुस के रूप में पिछले साल सितंबरमें शुरू की थीं. एक साझा बयान में आकुस ने कहा, "हमने आज एक नए त्रिशंकु सहयोग की शुरुआत की है, जो हाइपरसोनिक और काउंटर-हाइपरसोनिक और इलेक्ट्रॉनिक युद्धक क्षमताओं को बढ़ाने में होगा. साथ ही, हम सूचनाएं साझा करने और रक्षा नवोन्मेष में भी सहयोग बढ़ाएंगे."

आकुस ने पहले ही साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वॉन्टम टेक्नोलॉजी और समुद्र की सतह के नीचे की क्षमताओं में सहयोग का समझौता कर लिया था और मंगलवार की घोषणा इस समझौते का नया आयाम होगी. साझा बयान के मुताबिक, "जैसे-जैसे इन महत्वपूर्ण रक्षा और सुरक्षा क्षमताओं पर हमारा काम बढ़ेगा, हम अन्य सहयोगियों और साझीदारों को भी शामिल करेंगे."

इस घोषणा को चीन ने आग में घी डालने जैसी हरकत बताया है. संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत जांग जुन ने चेतावनी दी कि ऐसी गतिविधियों से बचा जाना चाहिए जो दुनिया के अन्य हिस्सों में यूक्रेन जैसे विवाद भड़का सकती हैं. उन्होंने कहा, "जो भी यूक्रेन जैसा संकट और ज्यादा नहीं देखना चाहता, उसे ऐसा कुछ भी करने से बचना चाहिए जिससे दुनिया के दूसरे हिस्सों में ऐसा ही संकट भड़क सकता है. चीन में एक कहावत है कि जो आपको खुद पसंद नहीं, वह दूसरों पर भी मत थोपो."

क्या है हाइपरसोनिक तकनीक?

मंगलवार की घोषणा को हाल ही मेंरूस द्वारा यूक्रेन पर पहली हाइपरसोनिक मिसाइलदागने के संदर्भ में भी देखा जा रहा है. रूस, चीन और अमेरिका के अलावा उत्तर कोरिया भी हाइपरसोनिक मिसाइलों का परीक्षण कर चुका है. पारपंरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तरह हाइपरसोनिक मिसाइल भी परमाणु हाथियारों को दागने में सक्षम होती हैं. ये ध्वनि की गति से पांच गुना ज्यादा रफ्तार से उड़ सकती हैं.

बैलिस्टिक मिसाइल अपने लक्ष्य पर पहुंचने से पहले हवा में काफी अधिक ऊंचाई तक जाती है और एक चाप बनाती हुई लक्ष्य तक पहुंचती है. इसके उलट, हाइपरसोनिक मिसाइल वातावरण में कम ऊंचाई पर जाती है और लक्ष्य तक ज्यादा तेजी से पहुंच सकती है.

हाइपरसोनिक मिसाइल के मामले में एक अहम बात यह मानी जाती है कि इनका रास्ता बदला जा सकता है, जिस वजह से इनका पता लगाना और इनसे बच पाना ज्यादा मुश्किल हो जाता है.

हाइपरसोनिक मिसाइलों के क्षेत्र में रूस को सबसे आगेमाना जाता है जबकि अमेरिकी संसद की कांग्रेशनल रिसर्च सर्विस (CRS) के अनुसार चीन भी इस तकनीक को पूरी आक्रामकता से विकसित करने में लगा है. सीआरएस का कहना है कि भारत, जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और जापान भी हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने में लगे हुए हैं जबकि ईरान, इस्राएल और दक्षिण कोरिया ने इस तकनीक पर शुरुआती काम कर लिया है.

क्या है आकुस?

सितंबर में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और युनाइटेड किंग्डम ने मिलकर एक नया रक्षा समूह बनाने की घोषणा की थी जो विशेषकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर केंद्रित होगा. इस समूह के समझौते के तहत अमेरिका और ब्रिटेन अपनी परमाणु शक्तिसंपन्न पनडुब्बियों की तकनीक ऑस्ट्रेलिया के साथ साझा करेंगे.

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के साथ ऑनलाइन बैठक के बाद नए गठबंधन का ऐलान एक वीडियो के जरिए किया था जिसने चीन के अलावा अमेरिका के सहयोगी फ्रांस को भी नाराज कर दिया था.

नए समझौते के तहत अमेरिका परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी बनाने की तकनीक ऑस्ट्रेलिया को देगा जिसके आधार पर ऐडिलेड में नई पनडुब्बियों का निर्माण होगा. ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के एक प्रवक्ता ने बताया कि नए समझौते के चलते फ्रांस की जहाज बनाने वाली कंपनी नेवल ग्रुप का ऑस्ट्रेलिया के साथ हुआ समझौता खत्म हो गया है. इससे फ्रांस नाराज हो गया थाऔर उसने कैनबरा से अपने राजदूत को वापस बुला लिया था.

वीके/एए (एपी, एएफपी, रॉयटर्स)

Source: DW

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