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US Taiwan Defence Deal: चीन को दबाने के लिए ट्रंप की तैयारी! ताइवान को अमेरिका देगा ये घातक हथियार, देखें लिस्

US Taiwan Defence Deal: ट्रंप सरकार ने ताइवान को 10 अरब डॉलर से अधिक कीमत के हथियार बेचने का ऐलान किया है। इस डील में मध्यम दूरी की मिसाइलें, हॉवित्जर तोपें और ड्रोन शामिल हैं। माना जा रहा है कि इस कदम से चीन नाराज़ होना तय है, क्योंकि वह ताइवान को अपना हिस्सा मानता है।

देर रात हुआ ऐलान

अमेरिकी विदेश विभाग ने बुधवार देर रात इस हथियार बिक्री की घोषणा की। खास बात यह रही कि इसी दिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय टीवी पर भाषण दिया, लेकिन उसमें चीन-ताइवान या विदेश नीति का कोई ज़िक्र नहीं किया गया। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और चीन के बीच तनाव लगातार बढ़ा है, खासकर व्यापार, टैरिफ और ताइवान मुद्दे को लेकर।

US Taiwan Defence Deal

HIMARS और ATACMS जैसे घातक हथियार लिस्ट में शामिल

घोषित आठ अलग-अलग समझौतों में ताइवान को 82 हाई-मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम (HIMARS) और 420 आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम (ATACMS) देने की बात कही गई है। इन हथियारों की कीमत 4 अरब डॉलर से अधिक है। यही सिस्टम अमेरिका पहले यूक्रेन को भी रूस के खिलाफ दे चुका है।

हॉवित्जर, मिसाइलें और सैन्य सॉफ्टवेयर भी पैकेज में

इस डील में 60 स्व-चालित हॉवित्जर और उससे जुड़े उपकरण भी शामिल हैं, जिनकी कीमत 4 अरब डॉलर से ज्यादा बताई गई है। इसके अलावा 1 अरब डॉलर से अधिक का सैन्य सॉफ्टवेयर, 700 मिलियन डॉलर की जेवलिन और TOW मिसाइलें, 96 मिलियन डॉलर के हेलीकॉप्टर पार्ट्स और 91 मिलियन डॉलर के हारपून मिसाइल अपग्रेड किट भी शामिल हैं।

अमेरिका ने क्या दिया तर्क?

अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि यह बिक्री अमेरिका के राष्ट्रीय, आर्थिक और सुरक्षा हितों के लिए ज़रूरी है। इसका मकसद ताइवान की सेना को आधुनिक बनाना और उसकी विश्वसनीय रक्षा क्षमता को मजबूत करना है। अमेरिका का दावा है कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता और सैन्य संतुलन बना रहेगा।

कानूनन ताइवान की मदद को बाध्य है अमेरिका

अमेरिकी कानून के अनुसार, अमेरिका ताइवान को आत्मरक्षा में मदद देने के लिए बाध्य है। लेकिन यही मुद्दा चीन के साथ सबसे बड़ा विवाद है, क्योंकि चीन ने ताइवान को बलपूर्वक अपने कब्जे में लेने की बात कई बार दोहराई है।

वहीं, वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने इस बिल की कड़ी आलोचना की है। चीन ने कहा कि यह कानून "चीन खतरा" नैरेटिव को बढ़ावा देता है, ताइवान को सैन्य समर्थन देता है और चीन-अमेरिका संबंधों को नुकसान पहुंचाता है। बीजिंग ने साफ कहा कि वह इस कदम का कड़ा विरोध करता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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