Senatorial report: ताकतवर अमेरिका बने रहने के लिए इंडिया का साथ जरूरी, रूस-भारत संबंध को लेकर आई चेतावनी

अपनी सातवीं एवं आखिरी सिफारिश में ‘मेजर स्टाफ रिपोर्ट’ ने एक मजबूत और लोकतांत्रिक भारत का समर्थन करने का आह्वान किया है।

US Senatorial report

Image: Oneindia

अमेरिका में सीनेट की विदेश मामलों से संबंधित समिति की एक रिपोर्ट में कहा गया कि बाइडेन प्रशासन को रूस के साथ भारत के संबंधों और लोकतांत्रिक मूल्यों और संस्थानों के पतन की प्रवृत्ति पर ध्यान देने की जरूरत है। यह रिपोर्ट ऐसे वक्त में आई है जब अमेरिका हिंद-प्रशांत और क्वाड (QUAD) ग्रुप पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। स्ट्रेटेजी एलाइनमेंट: द इम्पेरेटिव ऑफ रिसोर्सिंग द इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी नाम से यह रिपोर्ट गुरुवार को जारी की गई है। इस रिपोर्ट में एक मजबूत और लोकतांत्रिक भारत का समर्थन करने का भी आह्वाहन किया गया है।

इंडो-पैसिफिक में अधिक खर्च करने की जरूरत

रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि बाइडन प्रशासन को राजनयिक और विकास एजेंसियों के लिए धन में काफी वृद्धि करनी चाहिए और विदेशी सहायता का एक बड़ा हिस्सा इंडो-पैसिफिक में अग्रिम प्राथमिकताओं के लिए समर्पित करना चाहिए। इस क्षेत्र में संसाधनों का पर्याप्त आवंटन सुनिश्चित करने, नए प्राधिकरण उपलब्ध कराने और प्रभावी निगरानी के लिए कांग्रेस को एक सक्रिय भागीदार बनाया जाना चाहिए। सीनेट के विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष सीनेटर रॉबर्ट मेनेंडेज ने कहा कि मेरा मानना है कि राष्ट्रपति बाइडेन की एक साल पहले जारी की गई हिंद-प्रशांत रणनीति इस सरकार के सारे विचारों को अपनाती है, अगर यह रणनीति सफल हुई तो इससे 21वीं सदी में दुनिया के सबसे अधिक परिणामी और गतिशील क्षेत्र में अमेरिका का नेतृत्व मजबूत होगा।

भारत को महत्वपूर्ण सुरक्षा भागीदार मानना सही

रिपोर्ट के अनुसार, बाइडेन प्रशासन अपनी हिंद-प्रशांत रणनीति को पूरी तरह से चीन के खिलाफ न रखने को लेकर सही है। हालांकि इसमें सफलता पाने के लिए अमेरिका को इस प्रतिस्पर्धा की वास्तविकताओं से जूझना होगा और अपने क्षेत्रीय सहयोगियों और भागीदारों की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही बाइडेन प्रशासन का भारत को एक महत्वपूर्ण सुरक्षा भागीदार मानना सही है, लेकिन उसे रक्षा उपकरणों के लिए रूस के साथ भारत के निरंतर संबंधों और निर्भरता की वास्तविक जटिलताओं और हाल ही में उसके लोकतांत्रिक मूल्यों और संस्थानों में आई गिरावट को दूर करने के लिए काम करना होगा।

भारत-अमेरिका व्यापार में आई तेजी

रिपोर्ट के अनुसार, भारत से अमेरिका के साथ व्यापार चीन से अधिक हो गया है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते घनिष्ठ व्यापारिक संबंधों को दर्शाता है। इस रिपोर्ट में कहा गया कि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच संबंध दो दशकों से अधिक समय से काफी बेहतर स्थिति में हैं। दोनों देशों के संबंध कोल्ड वॉर की दुश्मनी, भारत के परमाणु कार्यक्रम और 1998 में परमाणु परीक्षण को लेकर पैदा मतभेद से ऊपर उठ चुके हैं।

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