Donald Trump को झटका, कांग्रेस ने खारिज किया Defense Policy Bill पर वीटो
वाशिंगटन। US Defense Policy Bill: अपने कार्यकाल के आखिरी बचे दिनों कुछ दिनों में डोनाल्ड ट्रम्प को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब शुक्रवार को सीनेट में डिफेंस पॉलिसी बिल पर राष्ट्रपति के वीटो को खारिज करने के लिए डेमोक्रेट के साथ ट्रम्प की अपनी ही पार्टी रिपबल्किन के सीनेटर भी मिल गए। सीनेट ने राष्ट्रपति ट्रम्प के वीटो को दो तिहाई बहुमत से खारिज कर दिया। ये ट्रम्प के कार्यकाल का पहला मौका था जब राष्ट्रपति के वीटो को खारिज किया गया। इसके पहले ट्रम्प आठ बार किसी बिल पर वीटो कर चुके हैं जिन्हें हर बार बरकरार रखा गया था।

राष्ट्रपति के वीटो को खारिज करने के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। ट्रम्प को उम्मीद थी कि रिपब्लिकन के प्रभाव वाली सीनेट में उनका वीटो नहीं खारिज होगा लेकिन जब सीनेट में हैरान करने वाली घटना हुई जब डेमोक्रेट के साथ ही रिपब्लिकन ने भी वीटो को खारिज करने के पक्ष में वोट दिया और इसे 81-13 के वोट से खारिज कर दिया गया।
इसके साथ ही रविवार को नई कांग्रेस के शपथ ग्रहण से पहले अंतिम पूर्ण सत्र भी समाप्त हो गया। इस सत्र में डेमोक्रेट्स ने कोविड राहत चेक को 600 डॉलर से बढ़ाकर 2000 डॉलर तक बढ़ाने के लिए प्रस्ताव दिया। ये प्रस्ताव डोनाल्ड ट्रम्प की एक प्रमुख मांग थी और इसके लिए उन्होंने कई दिनों तक बजट को लटकाए रखा था। डेमोक्रेट के इस बिल के समर्थन में सीनेटर बर्नी सैंडर्स भी आए लेकिन रिपब्लिकन ने इसे रोक दिया था।
हाउस में भी वीटो खारिज
डेमोक्रेट के प्रभाव वाले हाउस ऑफ रिप्रजेंटिव में भी ट्रम्प के वीटो को खारिज कर दिया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति को किसी भी बिल पर वीटो करने का अधिकार है लेकिन कांग्रेस दो तिहाई बहुमत होने पर राष्ट्रपति के वीटो को खारिज कर दे तो बिल बना रह सकता है।
कांग्रेस के दोनों सदनों से राष्ट्रपति का वीटो खारिज होने के बाद अब 740 अरब अमेरिकी डॉलर का डिफेंस पॉलिसी बिल पास हो गया है। डिफेंस पॉलिसी बिल इसलिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे ही अमेरिकी सेना के लिए सैन्य सामान से लेकर सैनिकों के वेतन तक का जिम्मेदारी पूरी की जाती है।
रिपब्लिकन नहीं दे रहे ट्रम्प का साथ
इस सत्र में कई मौके ऐसे आए जब रिपब्लिकन ट्रम्प के साथ खड़े नजर नहीं आए जबकि उनके पूरे कार्यकाल के दौरान उनकी पार्टी के सीनेटर उनके हर फैसले में मजबूती के साथ खड़े रहे थे।
वहीं चुनाव हारने के बाद ट्रम्प ने रिपब्लिकन को उन्हें सपोर्ट न करने को लेकर आलोचना की है। इसमें वोटर फ्रॉड के ट्रम्प के आरोपों के साथ ही राहत चेक की राशि बढ़ाने से इनकार करना भी शामिल है। रिपब्लिकन का मानना है कि राहत चेक राशि बढ़ाने से देश पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा।












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