अमेरिका ने माना हेरात हमले में लश्कर-ए-तैयबा का हाथ

अमेरिका के मुताबिक उसके पास जो जानकारी है उसमें साफ है कि लश्कर से जुड़े दो समूहों की ओर से ही मई में हेरात हमले को अंजाम दिया गया था।
अमेरिका ने पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा पर सख्ती करने के मकसद से इसके एक और संगठन जमात-उद-दावा को बैन कर इसे आतंकी सूची में डाल दिया है।
इसके साथ ही अमेरिका ने लश्कर के दो पाकिस्तानी नेताओं पर भी बैन लगा दिया है।
अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट की प्रवक्ता मैरी हार्फ ने कहा कि इस बार अमेरिका को जितनी जानकारियां हाथ लगी हैं उनके आधार पर वह इस नतीजे पर पहुंचा है कि हेरात में भारतीय दूतावास पर हुए हमले के पीछे लश्कर का हाथ है।
अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक स्टेट डिपार्टमेंट ने लश्कर-ए-तैयबा के साथ जमात उद दवाह, अल अनफाल ट्रस्ट, तहरीक-ए-हुरमत-ए-रसूल और तहरीक-ए-तहाफुज किबला अव्वाल को जोड़ा है।
इसके साथ ही अमेरिका के फाइनेंस डिपार्टमेंट ने लश्कर के वित्तीय नेटवर्क पर निशाना साधते हुए नजीर अहमद चौधरी और मुहम्मद हुसैन गिल को स्पेशल नोटिफाइड अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी करार दिया।
अहमद और गिल को पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर के लिए या उसके कहने पर काम करने वाला बताया गया है।
अमेरिका के फाइनेंस और स्टेट डिपार्टमेंट ने लश्कर से जुडे 22 लोगों और चार संस्थाओं के नाम शामिल किये हैं।
आतंकवाद और वित्तीय खुफिया जानकारी से जुड़े डिप्टी फाइनेंस सेक्रेटरी डेविड एस कोहन ने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा के नेतृत्व पर लगाम कसने की दिशा में हमारी कार्रवाई आतंकवादी संगठनों की वित्तीय गतिविधियों को
बाधित करके आतंकवाद से लड़ने की अमेरिका की प्रतिबद्धता दिखाती है। कोहेन ने कहा है कि एफबीआई और अमेरिका का डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस भारत के साथ आतंकवाद की लड़ाई में साथ है।
कोहेन के मुताबिक अमेरिका भारत की हर संभव मदद करने को भी तैयार है।
गौरतलब है कि लश्कर-ए-तैयबा ही मुंबई में नवंबर, 2008 में हुए आतंकवादी हमले के लिए जिम्मेदार है। वहीं इस संगठन के मुखिया हाफिज सईद को अमेरिका ने आतंकवादी घोषित किया है।












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