India-US: एक तरफ PM मोदी को बनाया खास मेहमान, दूसरी तरफ भारत का किया अपमान... अमेरिका की ये कैसी पॉलिसी?
पीएम मोदी अगले महीने अमेरिका के राजकीय यात्रा पर जाने वाले हैं और उससे एक महीने पहले अमेरिका की इस रिपोर्ट को, भारत पर हमला माना जा रहा है।

US releases religious freedom report: अमेरिका और भारत के बीच पिछले कुछ सालों में दोस्ती काफी तेजी से बढ़ी है और अमेरिका ने पिछले कुछ सालों में बार बार भारत को अपना पार्टनर बताया है, लेकिन अमेरिका दूसरे हाथ से भारत का अपमान भी कर रहा है।
अमेरिका ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अगले महीने राजकीय मेहमान बनाकर आमंत्रित किया है, जहां उनके सम्मान में व्हाइट हाउस में डिनर कार्यक्रम रखा गया है, लेकिन दूसरी तरह अमेरिका की एक रिपोर्ट में भारत का अपमान किया गया है।
भारत पर अपमानजनक रिपोर्ट
अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को कहा है, कि रूस, भारत, चीन और सऊदी अरब सहित कई सरकारें धार्मिक समुदाय के सदस्यों को स्वतंत्र रूप से निशाना बना रही और निशाना बनाने का ये सिलसिला लगातार जारी है।
अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें दुनिया भर के देशों में धार्मिक स्वतंत्रता पर दस्तावेज तैयार किया जाता है। ये रिपोर्ट अमेरिकी कांग्रेस के सामने रखा जाता है।
इस रिपोर्ट को अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता कार्यालय के राजदूत रशद हुसैन ने तैयार किया है। उन्होंने इस रिपोर्ट को जारी करने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, कि "कई सरकारें अपनी सीमाओं के भीतर कई समुदायों की आस्था को स्वतंत्र रूप से निशाना बनाना जारी रखे हुई है।" इस रिपोर्ट को अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने जारी किया है, जिसपर भारत में गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
दावा किया गया है, कि दुनियाभर के करीब सभी 200 देशों में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर उस देश की सरकारों की कार्रवाई को लेकर इसमें रिपोर्ट है। अमेरिका के विदेश मंत्री ने एंटनी ब्लिंकन ने कहा, कि "इस रिपोर्ट का मकसद उन क्षेत्रों को उजागर करना है, जहां जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता का दमन किया जा रहा है।"
उन्होंने कहा, कि "इस रिपोर्ट का मकसद ये है, कि दुनिया के विकास के उस रास्ते पर ले जाएं, जहां धर्म या आस्था की स्वतंत्रता हर जगह हर किसी के लिए एक वास्तविकता हो।"
हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपनी टिप्पणी में भारत का नाम नहीं लिया, लेकिन इस रिपोर्ट में भारत को लेकर उन्हीं तरह की बातें हैं, जो पिछले साल की भी रिपोर्ट में कही गई थी।
भारत को लेकर रिपोर्ट में क्या है?
धार्मिक स्वतंत्रता कार्यालय के राजदूत रशद हुसैन ने भारत का नाम लेकर कहा, कि "भारत के लीगल एक्सपर्ट्स, अलग अलग धर्मों के लीडर्स, और अलग अलग समुदायों ने हरिद्वार शहर में मुस्लिमों को लेकर अत्यधिक घृणास्पद बयान देने की निंदा की, लिहाजा भारत से बहुलवाद और सहिष्णुता की अपनी ऐतिहासिक परंपराओं को बनाए रखने का आह्वान किया गया है।
रशद हुसैन ने अपनी रिपोर्ट में गुजरात में हिन्दू उपासकों को पीटने वाले चार मुस्लिम आरोपियों की सड़क पर की गई पुलिस पिटाई की निंदा की गई है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के खरगोन में सांप्रदायिक हिंसा के आरोपी मुस्लिम परिवारों पर बुलडोजर चलाने की भी निंदा की गई है।
इस रिपोर्ट में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान को लिया गया है, जिसमें उन्होंने गोहत्या को लेकर कहा था, कि "हिन्दुओं और मुस्लिमों को लेकर अलग अलग व्यवहार नहीं करना चाहिए और गोकशी के लिए गैर-हिन्दुओं की हत्या करना हिंदुत्व के खिलाफ काम है।" (फोटो- अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन)

इस रिपोर्ट के क्या हैं मायने?
अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत को लेकर उस वक्त ये रिपोर्ट जारी की है, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमेरिका के राजकीय दौरे पर अगले महीने जाने वाले हैं। लिहाजा, पीएम मोदी के दौरे से सिर्फ एक महीने पहले इस रिपोर्ट को जारी करने को लेकर अमेरिका की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।
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पिछले साल भारत के विदेश मंत्री इसी रिपोर्ट पर अमेरिका की सख्त आलोचना कर चुके हैं और यहां तक कह चुके हैं, कि भारत किसी भी देश के आंतरिक मामलों में तांकझांक नहीं करता है।
आपको बता दें, कि अमेरिका की इस रिपोर्ट में जहां दुनिया के करीब करीब सभी देशों की बात की गई है, वहीं अमेरिका में होने वाले नस्लीय हिंसा और अंधाधुंध होने वाली गोलीबारियों पर कोई रिपोर्ट नहीं है। अमेरिका में हर साल 50 हजार से ज्यादा लोग गोलीबारी में मारे जाते हैं।
वहीं, अमेरिका में अश्वेत निवासियों के साथ कैसा सलूकि किया जाता है, ये पूरी दुनिया जानती है। अमेरिका की पुलिस अश्वेत लोगों के साथ अभी भी जानवरों जैसा सलूक करती है, लेकिन अमेरिका अपना घर छोड़कर दुनिया की ठेकेदारी में लगा हुआ है और अपनी आदत से बाज नहीं आ रहा है।












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