अमेरिका के राजकीय अतिथि बनेंगे प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति बाइडेन करेंगे स्वागत, जानिए इसके मायने?
भारत इस साल जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, और ये शिखर सम्मेलन सितंबर महीने में होने वाला है, वहीं ऑस्ट्रेलिया में क्वाड की बैठक में भी पीएम मोदी और जो बाइडेन की मुलाकात होने वाली है।

PM Modi State Guest to America: भारत और अमेरिका के संबंधों में एक नया आयाम लगने वाला है और ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, इस साल गर्मियों में अमेरिका के राजकीय मेहमान बनेंगे। टाइम्स ऑफ इंडिया (टीओआई) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले से परिचित लोगों ने कहा है, कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इस गर्मी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी करने की योजना बनाई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमेरिका की राजकीय यात्रा कई मायनों में काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस साल सितंबर महीने में जो बाइडेन भी जी20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने भारत का दौरा करने वाले हैं और माना जा रहा है, कि इंडो-पैसिफिक को लेकर दोनों देश नये समझौतों में बढ़ सकते हैं, जहां चीन भी अपना दबदबा बनाने की कोशिश कर रहा है।

अमेरिका के स्टेट गेस्ट बनेंगे पीएम मोदी
टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, परिचित लोगों ने कहा, कि व्हाइट हाउस में इस साल जून महीने में राजकीय रात्रिभोज आयोजित किए जाने की संभावना है, हालांकि समय को लेकर अभी फेरबदल हो सकता है। पिछले महीने भी आई एक रिपोर्ट में कहा गया था, कि दोनों देशों के अधिकारी फिलहाल पीएम मोदी के अमेरिका दौरे को लेकर कार्यक्रम तैयार कर रहे हैं और उपयुक्त तारीखों पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, टीओआई की रिपोर्ट में कहा गया है, कि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के एक प्रवक्ता ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। वहीं, पीएम मोदी उस वक्त अमेरिका की यात्रा करेंगे, जब भारत सितंबर महीने में नई दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जहां यूक्रेन पर रूस के आक्रमण को लेकर अहम चर्चा होगी। हालांकि, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है, कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे या नहीं।
ऑस्ट्रेलिया में भी मोदी-बाइडेन मुलाकात
वहीं, पीएम मोदी की अमेरिका की राजकीय यात्रा से पहले ऑस्ट्रेलिया में भी बाइडेन के साथ उनकी मुलाकात हो सकती है। मई महीने में ऑस्ट्रेलिया में क्वाड शिखर सम्मेलन का आयोजन होना है, जिसमें भाग लेने के लिए पीएम मोदी के अलावा जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा और अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन भी जाने वाले हैं। आपको बता दें, कि राष्ट्रपति बाइडेन के कार्यकाल में पीएम मोदी दुनिया के तीसरे ऐसे नेता होने वाले हैं, जिनके लिए अमेरिका में रात्रिभोज का आयोजन किया जाएगा। इससे पहले पिछले साल फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के लिए रात्रिभोज का आयोजन किया गया था। वहीं, इस साल अप्रैल महीने की 26 तारीख को दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक येओल के लिए रात्रिभोज का आयोजन किया गया है। अमेरिका और भारत ने पिछले महीने क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी समझौते की भी घोषणा की है, जिसमें जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी जेट इंजन के संयुक्त उत्पादन सहित एडवांस डिफेंस और कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी पर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने पर समझौता हुआ है। दोनों देशों के बीच हुआ ये एक ऐतिहासिक समझौता है।

यात्रा की तारीख अभी तय नहीं
सूत्रों ने कहा, कि यात्रा की तारीखों को फिलहाल अंतिम रूप नहीं दिया गया है। वहीं, पिछले महीने पीएम मोदी की व्हाइट हाउस की संभावित यात्रा के बारे में उस वक्त चर्चा और तेज हो गई थी, जब भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोलाल ने वॉशिंगटन में अपने समकक्ष जैक सुलिवन के साथ अमेरिका-भारत संबंधों पर बैठक की थी। उस बैठक दौरान अजीत डोभाल ने अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से भी मुलाकात की थी, जिसमें दोनों देशों के बीच सैन्य उपकरण, सेमिकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर संबंधों को गहरा करने के लिए साझेदारी की शुरूआत की गई। हालांकि, खबर ये भी है, कि नई दिल्ली और मॉस्को के बीच सैन्य अभ्यास और भारत का लगातार रूस से तेल खरीदने को लेकर वॉशिंगटन अभी भी निराश है और अभी भी अमेरिका, भारत पर यूक्रेन युद्ध शुरू करने के लिए रूस को दंडित करने के लिए भारत पर जोर दे रहा है।
अमेरिकी संसंद को कर सकते हैं संबोधित
सूत्रों का कहना है, कि अपनी अमेरिका की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित कर सकते हैं। वहीं, पिछले महीने अमेरिका के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने बताया था, कि "राष्ट्रपति बाइडेन का मानना है, कि दुनिया की दो प्रमुख ज्ञान अर्थव्यवस्थाओं के रूप में, भारत और अमेरिका के बीच यह साझेदारी काफी आवश्यक है। उनका (बाइडेन) मानना है, कि आज दुनिया जिन बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है, उनमें से किसी भी बड़ी चुनौती से निपटने के लिए कोई भी सफल और स्थायी प्रयास नहीं किया जा रहा है, चाहे हम खाद्य या ऊर्जा या स्वास्थ्य सुरक्षा, जलवायु संकट, या एक मुक्त और खुले इंडो- पैसिफिक को बनाए रखने की बात कर रहे हों"। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने वाशिंगटन में भारतीय पत्रकारों के एक समूह को बताया, कि इन सभी मुद्दो पर "अमेरिका-भारत साझेदारी के बिना काम हो, ये संभव नहीं है।"












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