US military Leak: यूक्रेन को मारने NATO से हथियार खरीद रहा था वैगनर ग्रुप, पुतिन के प्लान में फंसा US?
रूस ने पिछले साल 24 फरवरी को यूक्रेन में आक्रमण किया था और अब युद्ध के एक साल बीत चुके हैं। इस युद्ध में दोनों तरफ से हजारों सैनिक मारे गये हैं, लेकिन फिलहाल युद्ध के खत्म होने की उम्मीद नहीं है।

US military Leak: अमेरिकी रक्षा एजेंसी पेंटागन के लीक हुए सीक्रेट दस्तावेज लगातार राज खोल रहे हैं और सीएएन ने उन टॉप सीक्रेट दस्तावेजों के हवाले से एक और बड़ा दावा किया है।
सीएनएन ने लीक दस्तावेजों के हवाले से कहा है, कि खुफिया दस्तावेज के अनुसार, व्लादिमीर पुतिन की ओर से यूक्रेन में लड़ रहे एक रूसी अर्धसैनिक समूह, जिसे वैगनर ग्रुप कहा जाता है, उसने नाटो के सदस्य देश तुर्की से हथियार खरीदने की कोशिश की।
लीक हुए दस्तावेजों से पता चलता है, कि रूस के भाड़े के लड़ाके, वैगनर ग्रुप यूक्रेन में युद्ध अपनी ताकत बढ़ाने के लिए हथियार खरीदने की कोशिश में जुटा हुआ था। आपको बता दें, कि वैगनर ग्रुप यूक्रेन युद्ध में रूस के लिए लड़ रहा है और काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
वैगनर ग्रुप ने एक दिन पहले दावा किया है, कि यूक्रेन के बखमुत शहर के 80 प्रतिशत हिस्सों पर उसका नियंत्रण स्थापित हो गया है।

तुर्की से हथियार खरीद रहा था वैगनर ग्रुप
यूएस सीक्रेट लीक में कहा गया है, कि तुर्की, जो यूक्रेन को प्रत्यक्ष तौर पर हथियारों की मदद दे रहा है और जो नाटो का एक प्रमुख देश है, वैगनर ग्रुप ने उससे हथियार खरीदने की कोशिश की।
आपको बता दें, कि तुर्की में नाटो देशों का सैन्य हवाई अड्डा भी है, जहां पर कई परमाणु हथियार भी तैनात किए गये हैं। वहीं, रूस की आक्रामकता को देखते हुए, तुर्की में सैन्य अड्डे पर और तरह के हथियार भी जमा किए गये हैं।
यूएस लीक में कहा गया है, कि वैगनर ग्रुप के लड़ाकों ने "तुर्की से हथियार और उपकरण खरीदने" के इरादे से फरवरी की शुरुआत में "तुर्की संपर्कों" के साथ मुलाकात की थी। इस मुलाकात का मकसद तुर्की से हथियार हासिल करना था, जिसका इस्तेमाल वैगनर ग्रुप और संभवत: रूसी सेना भी यूक्रेन के खिलाफ करती।
हालांकि, ये साफ नहीं हो पाया है, कि किन लोगों से संपर्क किया गया था और इस मुलाकात के बारे में तुर्की की सरकार को जानकारी थी या नहीं।
वहीं, ऐसा कोई सबूत भी नहीं है मिला है, जिससे पता चलता हो, कि तुर्की की हथियार कंपनियों ने वैगनर ग्रुप को हथियार बेचे हैं।
फिर भी, नाटो सहयोगी द्वारा रूसी भाड़े के सैनिकों को हथियार बेचने की संभावना वाशिंगटन में गंभीर चिंता पैदा कर रही है और तुर्की के अन्य नाटो सदस्यों के साथ संबंधों को काफी जटिल बनाएगी।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि ये मुलाकात फरवरी महीने में की गई थी। लीक हुए दस्तावेज़ के मुताबिक, वैगनर ने माली में तुर्की से हथियारों और उपकरणों का उपयोग करने की भी योजना बनाई थी, जहां समूह की महत्वपूर्ण उपस्थिति है।
वहीं, अमेरिकी अधिकारियों ने सीएनएन को संकेत दिए हैं, कि जो दस्तावेज लीक हुए हैं, वो सही हैं और उनमें दर्ज जानकारियां भी सही हैं। वहीं, तुर्की की तरफ से इस मामले पर अभी तक कोई जवाब नहीं दिया गया है।

तुर्की और रूस का अबीज रिश्ता
हालांकि, तुर्की नाटो का हिस्सा है, फिर भी नाटो के सदस्य तुर्की और रूस के बीच के जटिल संबंधों की वास्तविकता से जूझते रहते हैं।
तुर्की सरकार ने यूक्रेन पर रूस के आक्रमण का विरोध किया है। हालांकि, कई नाटो सहयोगियों के विपरीत, इसने मास्को में सरकार के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखा है।
कई बार, तुर्की सरकार ने उन संबंधों का उपयोग युद्ध को समाप्त करने के लिए रूसी सरकार के साथ अपनी दोस्ताना रिश्ते का हवाला भी दिया है। पिछले सप्ताह भी तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुत कैवासोग्लू ने अंकारा में अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से मुलाकात की थी।
तुर्की सरकार ने यूक्रेनी अनाज को रूसी खतरे के बिना काला सागर के माध्यम से सुरक्षित रूप से पारगमन करने की अनुमति देने के लिए एक सौदे को करवाने में अहम भूमिका निभाई है।
वहीं, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन, रूस-यूक्रेन संघर्ष को रोकने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर चुके हैं। जनवरी में, अर्दोआन ने पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के साथ अलग-अलग बातचीत की थी।

फरवरी में हुई थी वैगनर और तुर्की के लोगों की मुलाकात
रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन की पुतिन और जेलेंस्की से टेलीफोन पर हुई बातचीत के एक महीने बाद वैगनर ग्रुप और तुर्की के लोगों के बीच हथियारों को लेकर बातचीत की गई थी।
अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के डायरेक्टर बिल बर्न्स ने मंगलवार को कहा, कि उनकी खुफिया एजेंसी का आकलन है, कि पुतिन यूक्रेन युद्ध से इस स्टेज पर फिलहाल बातचीत को लेकर गंभीर नहीं हैं।
वहीं, लीक हुए खुफिया दस्तावेजों को लेकर, जिसमें इस बात की संभावना जताई गई है कि फिलहाल यूक्रेन युद्ध खत्म होने वाला नहीं है, सीआईए डायरेक्टर ने कहा, कि 'यूक्रेन योजनाबद्ध तरीके से बड़े आक्रमण कर रहा है और आने वाले दिनों में बहुत कुछ दांव पर लगा है।'
वहीं, अमेरिका ने अब अपने सहयोगी देशों पर नकेल कसना शुरू किया है, ताकि कोई नाटो देश, वैगनर समूह तक हथियार या उपकरण ना पहुंचा सके।
बुधवार को, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने तुर्की की दो कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिनके बारे में कहा गया कि वे मौजूदा प्रतिबंधों की अवहेलना में रूस के सैन्य औद्योगिक परिसर का समर्थन कर रही हैं।

वैगनर ग्रुप... रूस की प्राइवेट आर्मी
आपको बता दें, कि रूस ने यूक्रेन युद्ध में 'भाड़े के लड़ाकों' को भी उतार रखा है।
रूस के बड़े कारोबारी और पुतिन के करीबी येवगेनी प्रिगोझिन ने वैगनर ग्रुप की स्थापना साल 2014 में की थी और वैगनग ग्रुप अभी तक कई लड़ाईयों में हिस्सा ले चुकी है।
सीरिया, लीबिया और मध्य अफ्रीकी देशों, जैसे माली में भी वैगनर ग्रुप ने लड़ने के लिए अपने सैनिकों को भेजे हैं। और इस वक्त यूक्रेन में वैगनर ग्रुप के लड़ाके पुतिन के लिए जंग लड़ रहे हैं।
वैगनर ग्रुप के ऊपर रूस के अंदर भी पुतिन के पक्ष में चुनाव को प्रभावित करने के आरोप लगते रहे हैं।
वैगनर को मसनरी भी कहा जाता है और ये युद्ध में जाने के लिए मोटा पैसा वसूलते हैं। हालांकि, जिनेना कन्वेंशन में मसनरी सैनिकों को आम सैनिकों की तरह वैध लड़ाका नहीं माना जाता है और उन्हें आम सैनिकों की तरह अधिकार भी नहीं मिले हुए हैं।
टाइम्स की एक रिपोर्ट में पिछले साल दावा किया गया था, कि यूक्रेन युद्ध में लड़ने वाले किराए के सैनिकों को हर दिन 2000 डॉलर मिलते हैं। यानि, भारतीय रुपये के हिसाब से हर दिन करीब डेढ़ लाख रुपये प्रतिदिन।
Recommended Video

हालांकि, ये आंकड़ा अनुमानों और अलग अलग सूत्रों के हवाले से है, और वास्तविक तौर पर एक वैगनर सैनिक को कितने रुपये मिलते हैं, इसका सटीक अंदाजा या जानकारी नहीं है।












Click it and Unblock the Notifications