अमेरिकी मध्यावधि चुनाव: डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडन, दोनों के लिए अग्निपरीक्षा

अमेरिकी चुनाव
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अमेरिका में इस वक्त पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वही बोल रहे हैं, जो बराक ओबामा और मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन बोल रहे हैं. ऐसा शायद ही होता है. पेनसिलवेनिया में एक चुनाव प्रचार के दौरान एक ही दिन ओबामा और बाइडन ने वही कहा, जो ट्रंप कह रहे थे.

इन राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने मतदाताओं से एक ही अपील की. और वे ये कि वो निकलें और वोट दें.

बाइडन,ओबामा और ट्रंप मध्यावधि चुनाव में मतदाताओं से वोट देने की अपील कर रहे थे.

मंगलवार को अमेरिका में हो रहे मध्यावधि चुनाव ये तय करेगा कि कांग्रेस में किसका वर्चस्व होगा.

हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की सभी 435 सीटों के लिए चुनाव होंगे. वहीं सीनेट की 35 सीटों पर जोर-आजमाइश होगी.

पेनसिलवेनिया में सीनेट के लिए डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जॉन फेटरमैन और रिपब्लिकन उम्मीदवार मेहमेट ओज़ के बीच काफी कम मार्जिन है. पेनसिलवेनिया के इस महत्व को देखते हुए ही तीनों दिग्गज (दो पूर्व राष्ट्रपति और मौजूदा राष्ट्रपति) यहां मैदान में कूद पड़े हैं.

पेनसिलवेनिया में जीत से ही ट्रंप को व्हाइट हाउस में एंट्री में मदद मिली थी. उस दौरान उनके जोरदार भाषण ब्लू-कॉलर वर्कर्स को काफी पसंद आते थे.

इसके बाद 2020 में इसके उलट भावनाओं और उदारवादी राजनीति ने शहरी इलाकों में जो बाइडन को बढ़त दिलाई. बाइडन अपने होम स्टेट में दो फीसदी से कम मतों के अंतर से जीत गए.

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फिलाडेल्फिया में शनिवार को बाइडन ने कहा कि अपने होम स्टेट में होना बेहतर महसूस कराता है. यहां उन्होंने गवर्नर पद के लिए अपनी पार्टी के जोश शेपिरो के पक्ष में प्रचार किया.

उन्होंने भीड़ को चेताया कि अगर हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव और सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत नहीं मिला तो अबॉर्शन राइट्स और पब्लिक हेल्थकेयर में मिल रही सुविधा में और कटौती हो सकती है.

हालांकि इस समय डेमोक्रेटिक पार्टी का कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत है लेकिन सर्वेक्षणों के मुताबिक यहां उनकी हार भी हो सकती है. फिलाडेल्फिया में बाइडन ने कहा कि डेमोक्रेटिक पार्टी को दिया गया वोट महिलाओं के स्वास्थ्य, गन कंट्रोल और हेल्थकेयर को दिया गया वोट होगा.

आखिर 8 नवंबर को होने वाले इन चुनावों को इतनी अहमियत क्यों दी जा रही है. दरअसल ये चुनाव ऐसे हैं, जिसके नतीजे देश पर काफी बड़ा प्रभाव डालेंगे. अमेरिकी अर्थव्यवस्था इस वक्त संकट से गुजर रही है. ऐसे में चुनाव के नतीजे बाइडन पर भारी भी पड़ सकते हैं. बहरहाल इन पांच वजहों पर एक नज़र डालना जरूरी है, जो उन्हें बेहद अहम बना रहे हैं.

गर्भपात का अधिकार या प्रतिबंध


अगर कांग्रेस का स्वरूप बदलता है. यानी चुनाव के नतीजे इसे प्रभावित करते हैं तो अमेरिकियों की रोजमर्रा की ज़िंदगी भी प्रभावित होगी. अबॉर्शन इसका सबसे अच्छा उदाहरण है. जून में सुप्रीम ने कोर्ट गर्भपात के अधिकार को मिली संवैधानिक सुरक्षा को हटा दिया था. कांग्रेस में जिस पार्टी का बहुमत होगा वह इसके लिए नए सिरे से कानून बनाएगी.

डेमोक्रेटिक पार्टी ने गर्भपात की कानूनी मंजूरी को बरकरार रखने का वादा किया है वहीं रिपब्लिकन पार्टी ने 15 सप्ताह के गर्भ के बाद गर्भपात को कानूनी तौर पर प्रतिबंधित करने का वादा किया है.

अगर प्रांतों की बात करें तो गवर्नरों और स्थानीय चुनावों में कुछ अहम प्रदेशों में क्या होगा, इसका काफी प्रभाव पड़ेगा. पेनसिलवेनिया, विस्कॉन्सिन और मिशगन के नतीजों का इस पर असर पड़ सकता है और अबॉर्शन पर और अधिक सख्ती देखने को मिल सकती है.

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क्या रिपब्लिकन डेमोक्रेट्स की जांच करवाएंगे?


अगर रिपब्लिकन जीतते हैं तो इमिग्रेशन, धार्मिक अधिकार और हिंसक अपराधों से जुड़े मुद्दों पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकता है.

डेमोक्रेट्स के लिए पर्यावरण, हेल्थकेयर, मताधिकार और गन-कंट्रोल जैसे मुद्दे प्राथमिकता में होंगे.

हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में जीत की उम्मीद लगाए रिपब्लिकन पार्टी का कहना है कि अगर वो जीते वो 6 जनवरी को कैपिटल हिल पर हुए हमले की जांच को बंद कर देंगे और जो बाइडन के बेटे हंटर के चीन से कारोबारी संबंधों की जांच शुरू कर देंगे.

रिपब्लिकन पार्टी बाइडन प्रशासन की आप्रवास नीति को भी बदलने की कोशिश कर सकती है. वह अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज की वापसी और कोरोना वायरस के लिए चीन को भी घेरने की कोशिश कर सकती है.

अगर रिपब्लिकन जीते तो पार्टी उन लोगों की नियुक्तियों पर रोक लगा सकती है, जिन्हें बाइडन फेडरल अदालतों और अहम सरकारी एजेंसियों में काम करने के लिए चुना है.

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जो बाइडन का भविष्य


आम तौर पर मध्यावधि चुनाव को किसी भी राष्ट्रपति के पहले दो साल के कार्यक्रम पर जनमत सर्वेक्षण के तौर पर देखा जाता है. अमूमन सत्ताधारी पार्टी को इस मामले में निराशा का सामना करना पड़ा है. पिछले एक साल से बाइडन की अप्रूवल रेटिंग काफी खराब रही है.

पिछले कुछ समय में डेमोक्रेटिक पार्टी का सितारा थोड़ा चमकता नजर आ रहा था लेकिन महंगाई दर में बढ़ोतरी और अर्थव्यवस्था से जुड़ी दूसरी चिंताओं ने इसे मुश्किल में डाल दिया है. कांग्रेस में दोनों सदनों में उसका दबदबा बनाए रखना कठिन नजर आ रहा है.

अपने दो साल के अब तक के कार्यकाल में बाइडन ने जलवायु परिवर्तन, गन-कंट्रोल और इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश से जुड़े नए कानूनों को पारित कराया है वो भी कांग्रेस में बहुत कम अंतर से बहुमत होने के बावजूद.

अगर दोनों सदनों में किसी भी एक सदन रिपब्लिकन बहुमत में आए तो कांग्रेस में डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से लाए जाने वाले बिलों में अड़चन आ सकती है.

अगर ऐसा हुआ तो इसे बाइडन की लगातार चली आ रही राजनीतिक कमजोरी की तरह देखा जाएगा और फिर 2024 के चुनाव में उन्हें किसी दूसरे डेमोक्रेट्स नेता को मौका देने की मांग उठ सकती है .

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क्या ट्रंप फिर चुनाव लड़ेंगे?


पिछले कुछ सालों में जो राष्ट्रपति हारे हैं वे चुपचाप राजनीति से किनारे हो गए. लेकिन ट्रंप 2024 में दोबारा व्हाइट हाउस में एंट्री का मंसूबा पाले हुए हैं. ऐसे में मध्यावधि चुनाव में उनकी पार्टी के उम्मीदवारों को सफलता मिलती है तो उनकी उम्मीदों को पर लग सकते हैं. उनकी ओर से चुने गए दर्जन भर उम्मीदवार पूरे अमेरिका में हाई-प्रोफाइल सीटों पर लड़ रहे हैं.

ट्रंप जॉर्जिया पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी हर्शल वॉकर, पेनसिलवेनिया में मेहमट ओज़ और ओहियो में लोकप्रिय लेखक जेडी वन्स को आगे बढ़ाने में सफल रहे हैं. इन्हें पुराने रिपब्लिक नेताओं की तुलना में तवज्जो मिली है. पुराने नेताओं के विरोध के बावजूद ट्रंप ने इन नए उम्मीदवारों का साथ दिया है.

अगर ये जीतते हैं तो माना जाएगा कि ट्रंप राजनीतिक रूप से काफी चतुर हैं. उनकी कंजर्वेटिव राजनीति की राष्ट्रीय अपील बढ़ेगी. लेकिन अगर रिपब्लिकन कांग्रेस में बहुमत से दूर रहते हैं तो नए उम्मीदवारों के उनके चुनाव को दोषी ठहराया जाएगा. हालांकि पूर्व राष्ट्रपति ये जिम्मेदारी अपने ऊपर ले सकते हैं.

अगर नतीजे ट्रंप के मनमाफिक नहीं हुए तो पार्टी में उनके प्रतिद्वंद्वियों को मौका मिल जाएगा. फ्लोरिडा को गवर्नर रोन डीसेंटिस और टैक्सस के गवर्नर नवंबर में दोबारा मतदान के लिए तैयार हैं. रिपब्लिक पार्टी का प्रदर्शन खराब रहा तो वो खुद को 2024 में राष्ट्रपति के उम्मीदवार के तौर पर पेश कर सकते हैं.

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क्या ट्रंप समर्थक ये कदम भी उठा सकते हैं?


2022 का मध्यावधि चुनाव 6 जनवरी को कैपिटल हिल पर हमले के बाद का पहला चुनाव है. उस वक्त ट्रंप के समर्थक जो बाइडन की जीत का विरोध करते हुए यहां घुस आए थे. लेकिन ट्रंप इस हिंसा पर सवाल उठाने के बजाय अभी भी चुनाव के नतीजों पर सवाल उठाते हैं. वो उन रिपब्लिकन उम्मीदवारों का भी खुल कर समर्थन करते हैं जो कहते रहे हैं कि ट्रंप को चुनाव हरवाया गया.

इनमें से कई उम्मीदवार जैसे अरिजोना के मार्क फिंचमैन, नेवेडा के जिम मर्चेंट और पेनसिलवेनिया के डॉ मेस्टरियो भी उम्मीदवार हैं. अगर ये जीते तो उनका राज्य के चुनावी सिस्टम पर कुछ नियंत्रण रहेगा. ऐसे में 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में वो नजदीकी मुकाबले वाली सीटों पर नतीजों का खुलासा करने से इनकार कर सकते हैं.

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वे चुनाव में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाकर मुकदमेबाजी शुरू कर सकते हैं. इसके साथ ही वह वोटिंग के नए तरीके भी सुझा सकते हैं. जैसे डाक से वोटिंग और बैलट ड्रॉप बॉक्स का तरीका .

2020 में ट्रंप ने कुछ नतीजों का बदलने का दबाव डाला था. रिपब्लिकन पदाधिकारी कई राज्यों में अपनी इस मांग से पीछे हटते नहीं दिख रहे थे.

दो साल बाद रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रिटिक पार्टी के बीच इसी तरह का नजदीकी मुकाबला तो इस तरह की मांगों के कुछ और नतीजे हो सकते हैं.

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