अमेरिका ने हटाए प्रतिबंध, क्या भारत करेगा ईरानी तेल की खरीद? समंदर में छिपा है विशाल खजाना!
US lifts ban on Iranian Oil: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच अमेरिका ने बड़ा दांव खेला है। ईरानी तेल पर लगी पाबंदियों में ढील देकर उसने न सिर्फ वैश्विक बाजार को राहत देने की कोशिश की है, बल्कि एशियाई देशों-खासतौर पर भारत-के लिए सस्ते तेल के दरवाजे भी खोल दिए हैं। अब सवाल यह है कि क्या भारत इस मौके का फायदा उठाएगा?
अमेरिका का बड़ा फैसला, प्रतिबंधों में दी ढील
अमेरिका ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी छूट दी है। यह कदम ऊर्जा संकट को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है, जो अमेरिका-इजरायल तनाव के कारण और गहरा गया था। इस छूट के बाद अब ईरानी तेल एशियाई बाजारों के लिए फिर से उपलब्ध हो गया है।

सस्ते तेल पर है भारत की नजर
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रिफाइनरियां ईरानी तेल की खरीद पर विचार कर रही हैं। तीन रिफाइनर्स ने संकेत दिया है कि वे खरीदारी के लिए तैयार हैं, लेकिन अंतिम फैसला सरकार के निर्देश और भुगतान शर्तों पर निर्भर करेगा। भारत, जहां कच्चे तेल का भंडार सीमित है, इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहता।
एशिया में बढ़ी दिलचस्पी
भारत ही नहीं, एशिया की अन्य रिफाइनरियां भी इस छूट का फायदा उठाने की रणनीति बना रही हैं। अब तक ईरानी तेल का मुख्य खरीदार चीन था, लेकिन प्रतिबंधों में ढील के बाद बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है।
समंदर में तैरता तेल का खजाना
डेटा एजेंसी केप्लर के अनुसार, करीब 17 करोड़ बैरल ईरानी कच्चा तेल समुद्र में स्टोर है, जो मध्य-पूर्व की खाड़ी से लेकर चीन के जलक्षेत्र तक फैला हुआ है। यह विशाल भंडार वैश्विक सप्लाई को तुरंत बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
ऊर्जा संकट का विश्व पर वैश्विक असर
कंसल्टेंसी एनर्जी एस्पेक्ट्स के मुताबिक, समुद्र में मौजूद तेल का यह स्टॉक मिडिल ईस्ट के लगभग 14 दिनों के उत्पादन के बराबर है। वहीं, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधाओं के चलते रिफाइनरियों को उत्पादन घटाना पड़ा, जिससे ईंधन निर्यात भी प्रभावित हुआ है। ऐसे में ईरानी तेल पर छूट वैश्विक बाजार के लिए राहत का संकेत है।












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