US Iran War: ईरान की तगड़ी चोट से फूले ट्रंप के हाथ-पांव, Netanyahu से कहा- 'हमले रोको', तेवर हुए एक दम ठंडे!

US Iran War: मिडिल ईस्ट की जंग अब सिर्फ मिसाइल और बॉर्डर तक सीमित नहीं रही, अब ये सीधे दुनिया की एनर्जी सप्लाई पर असर डाल रही है। Iran ने Qatar के रास लाफान एनर्जी हब पर जो हमला किया उससे पूरा ग्लोबल गैस मार्केट हिल गया है। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इजरायली पीएम को बेंजामिन नेतन्याहू को फोन पर हिदायत दी है। जिसके बाद ऐसा लग रहा है कि ट्रंप इस हमले से घबरा गए हैं। जानिए दोनों में क्या बातचीत हुई।

क्या है रास लाफान, जिस पर हुआ हमला?

इस हमले के बाद Global Energy Markets में हलचल मच गई। Qatar Energy ने confirm किया कि मिसाइलें रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर गिरीं। यह वही जगह है जहां दुनिया के सबसे बड़े LNG (Liquefied Natural Gas) प्लांट और Pearl GTL (Gas-to-Liquids) facility मौजूद हैं। यानी इस पर हमला करने से कई देशों की गैस सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

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कंपनी के फूले हाथ-पांव

कंपनी ने 'X' (ट्विटर) पर जानकारी देते हुए कहा- "18 मार्च 2026 को हुए हमले में Pearl GTL प्लांट को भारी नुकसान हुआ था। इसके बाद 19 मार्च की सुबह कई LNG facilities को भी निशाना बनाया गया।" मतलब साफ है, ये कोई एक बार की घटना नहीं, बल्कि लगातार टारगेटेड स्ट्राइक हो रही हैं। हमलों के बाद बड़े स्तर पर आग लग गई और काफी नुकसान हुआ। हालांकि राहत की बात ये है कि अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

ट्रंप के बदले सुर

दिलचस्प बात ये है कि हमले के बाद ट्रंप के सुर धीमे पड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका को इजरायल के अटैक की पहले से जानकारी नहीं थी। साथ ही ईरान की जवाबी कार्यवाही गलत है। बयान को समझे तो ऐसा लगता है कि US खुद को इस विवाद से दूर रखने की कोशिश कर रहा है।

कतर को दिलासा दे रहे ट्रंप

अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने लिखा- इजरायल अब इस गैस प्लांट पर तब तक हमला नहीं करेगा, जब तक ईरान खुद कतर पर हमला नहीं करता। इसके आगे ट्रंप ने धमकी देते हुए कहा कि अगर आगे अटैक हुआ, तो अमेरिका, ईरान के गैस इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा जवाब देगा।

क्या दुनिया में होगा गैस का संकट?

रास लाफान दुनिया के सबसे बड़े LNG export hubs में से एक है। अगर यहां हमले जारी रहे, तो पूरी दुनिया में गैस की किल्लत होगी जिससे दाम आसमान छू सकते हैं। यूरोप समेत एशिया में गैस की किल्लत हो सकती है।

आर्थिक चोट पर हो रहा युद्ध

अब ये जंग सिर्फ सैन्य नहीं रही बल्कि दोनों पक्ष एक-दूसरे को आर्थिक चोटें दे रहे हैं। दोनों तरफ से एक-दूसरे एनर्जी सोर्स और कमाई के साधनों पर बम बरसाए जा रहे हैं। वहीं ईरान कोशिश कर रहा है कि पूरी दुनिया की सप्लाई चेन पर हमले करे ताकि अमेरिका पर इसका दबाव पड़े।

कतर का रिएक्शन

कतर ने इस हमले को अंतर्राष्ट्रीय कानून का बड़ा उल्लंघन बताया है। उसने कहा कि यह Global Energy Security के लिए खतरे के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण के लिए भी खतरनाक है।

यह हमला क्यों हुआ? पूरी कहानी समझिए

इस पूरे हमले को ईरान के गुस्से से भी जवाबी कार्यवाही के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल इजरायल ने पहले ईरान के एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया था, जिसमें South Pars Gas Field और Asaluyeh facilities पर हमले किए थे। South Pars दुनिया का सबसे बड़ा नैचुरल गैस रिजर्व है और ईरान की इकोनॉमी के लिए रीढ़ जैसा है।

कतर क्यों बन रहा निशाना?

South Pars Gas Field कतर के साथ बनी है, जहां इसे North Field कहा जाता है। इसका मतलब अगर ईरान के हिस्से पर हमला होता है, तो कतर इनडायरेक्टली उसी सिस्टम का हिस्सा है। एक्सपर्ट का कहना है कि अब दोनों देश एक-दूसरे की इकोनॉमिक लाइफलाइन को टारगेट कर रहे हैं। कुल मिलाकर अगर ईरान पर इजरायल और अमेरिकी हमले जारी रहते हैं तो वह ऐसे हमलों को अंजाम देगा।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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