US-Iran War: 37 दिनों की जंग में ईरानियों का निकला तेल! 1KG आटा हुआ 1,93,000 रियाल, भारतीय रुपये में कितने का?
US-Iran War: अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान जंग के बीच एक तरफ होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद है, दुनिया तेल-गैस की किल्लत से जूझ रही है। दूसरी तरफ, 37 दिन से जारी जंग ने ईरान में महंगाई बेकाबू कर दी है और रोजमर्रा की चीजें लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। सबसे ज्यादा असर खाने-पीने की चीजों पर पड़ा है। आटा, जो वहां का मुख्य भोजन है, उसकी कीमत 72 हजार से लेकर 1 लाख 93 हजार रियाल प्रति किलो तक पहुंच गई है।
ईरान में रियाल की कीमत लगातार गिर रही है, इसलिए स्थानीय लोगों के लिए यह बेहद महंगा है। सिर्फ आटा ही नहीं, बल्कि चिकन और मटन जैसी चीजें भी आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। चिकन की कीमत लाखों रियाल में पहुंच चुकी है, जबकि दूध जैसी जरूरी चीजें भी काफी महंगी हो गई हैं। ऐसे में प्रोटीन और पोषण लेना आम परिवारों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। आइए जानते हैं विस्तार से...

1 Kg Flour Cost in Iran: ईरान में 1 किलो आटा कितने का हुआ?
- 1 किलो आटा : 72,000 से 1,93,000 रियाल
- भारतीय रुपये में: 390.44 रुपए में हुआ (क्लियर टैक्स करेंसी कनवर्ट के मुताबिक)
तेहरान और मशहद जैसे बड़े शहरों में ऊपरी रेंज ही आम है। भारतीय रुपये में यह सस्ता लगता है, लेकिन ईरानी मजदूर के लिए यह भारी है। उनकी औसत सैलरी सिर्फ 100-150 डॉलर (लगभग 8,500-12,700 रुपये) महीना है, जबकि एक परिवार का खर्च 500 डॉलर से ज्यादा हो गया है।
अन्य जरूरी चीजों की कीमतें (अप्रैल 2026):
- 1 किलो चिकन: 25 लाख से 35 लाख रियाल - 5057.5 रुपये (क्लियर टैक्स करेंसी कनवर्ट के मुताबिक)
- 1 किलो मटन: 2.7 लाख से 7 लाख रियाल - 546.21 रुपये (क्लियर टैक्स करेंसी कनवर्ट के मुताबिक)
- 1 लीटर दूध: 5.7 लाख से 8.2 लाख रियाल - 1153.11 रुपये (क्लियर टैक्स करेंसी कनवर्ट के मुताबिक)
पिछले एक साल में डेयरी प्रोडक्ट्स में 50% से ज्यादा बढ़ोतरी हो चुकी है। खाद्य महंगाई 100% से ऊपर है। कुल महंगाई दर 45-50% के आसपास।

Milk-Bread Chichek Shortages In Iran: ईरानियों की सच्ची मुसीबत: ब्रेड क्यू और प्रोटीन की कमी
ईरान में ब्रेड मुख्य भोजन है। आटे की कीमत बढ़ने और सब्सिडी घटने से लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। कई जगह तनाव और झगड़े भी हो रहे हैं। प्रोटीन खाना अब लग्जरी बन गया है। चिकन-मटन की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे गरीब परिवारों में कुपोषण बढ़ रहा है। पेट्रोल अभी भी सब्सिडी के कारण 5-7 रुपये प्रति लीटर के बराबर है। लेकिन खाने-पीने की चीजें इतनी महंगी कि लोग सोच रहे हैं कि क्या खाएं या गाड़ी चलाएं? ईरानी रियाल लगातार कमजोर हो रहा है। युद्ध ने अर्थव्यवस्था को और तोड़ा है। IMF का कहना है कि युद्ध ने फर्टिलाइजर और फूड सप्लाई चेन को भी प्रभावित किया है, जिससे विकासशील देशों में नई फूड प्राइस शॉक की आशंका है।
Strait of Hormuz Closed: सिर्फ तेल नहीं, मानवीय मदद भी अटक गई
युद्ध का सबसे बड़ा नुकसान होर्मुज स्ट्रेट पर पड़ा। दुनिया का 20% तेल और 80% LNG इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान ने इसे 'दुश्मन देशों' के लिए बंद कर दिया। नतीजा ये हुआ कि मानवीय सहायता एजेंसियां भी फंस गईं।
- WFP (World Food Programme): दसियों हजार टन खाद्य सामग्री रोकी गई। अफगानिस्तान के लिए दुबई से भेजा गया माल वापस आ गया।
- इंटरनेशनल रेस्क्यू कमिटी: सूडान के लिए 1.3 लाख डॉलर की दवाएं दुबई में अटकीं। सोमालिया के कुपोषित बच्चों के लिए 670 पैकेट मेडिकल फूड भारत से नहीं निकल पाए।
- UNFPA: 16 देशों में उपकरणों की डिलीवरी में देरी।
- यूनिसेफ: अब तुर्की के रास्ते सड़क मार्ग से टीके भेज रहा है - लागत 20% बढ़ी, समय 10 दिन बढ़ा।
- सेव द चिल्ड्रन: सऊदी अरब-लाल सागर रूट पर शिफ्ट - लागत 25% बढ़ी, समय 10 दिन बढ़ा।
WFP शिपिंग चीफ का कहना कि होर्मुज बंद होने से कंटेनर और जहाज उपलब्ध नहीं हैं। लागत बढ़ रही है, समय बढ़ रहा है। अफ्रीका के चारों ओर घुमाकर भेजना पड़ रहा है। शिपिंग लागत 20% बढ़ी, समय हफ्तों का हो गया। सूडान में 90 से ज्यादा स्वास्थ्य केंद्र दवाओं की कमी से खतरे में। नाइजीरिया में ईंधन 50% महंगा, स्वास्थ्य दल ऑपरेशन कम कर रहे। WFP ने चेतावनी दी कि अगर जंग जून तक चली तो 45 मिलियन लोग और गंभीर भूख में फंस सकते हैं। यह पहले से ही 32 करोड़ भूखमरी झेल रहे लोगों के साथ जुड़ जाएगा।
जंग आम ईरानियों और दुनिया दोनों को खा रही है
यह युद्ध सिर्फ सैन्य नहीं, आर्थिक और मानवीय भी है। ईरान में आम नागरिक 'तेल निकालने' की कीमत चुकाने को मजबूर हैं। महंगाई, कतारें और कुपोषण। वहीं दुनिया में फूड एड, दवाएं और फर्टिलाइजर अटक गए हैं। ट्रंप का 48 घंटे का अल्टीमेटम अभी भी लटका है। लेकिन जितना समय बीतता जा रहा है, उतना ही नुकसान बढ़ रहा है। ईरान के अंदर और बाहर दोनों जगह। होर्मुज सिर्फ तेल का रास्ता नहीं, बल्कि लाखों जरूरतमंदों की जिंदगी का रास्ता भी था। युद्ध लंबा खिंचा तो भूख का नया संकट खड़ा हो जाएगा।












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