बेंगलुरु के एक क्रेच में अमानवीय व्यवहार के आरोपों पर एनएचआरसी ने कर्नाटक सरकार और पुलिस प्रमुख को नोटिस जारी किया
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बेंगलुरु में एक आईटी कंपनी के परिसर में स्थित एक क्रेच में दाइयों द्वारा कथित तौर पर छोटे बच्चों के साथ दुर्व्यवहार की रिपोर्टों के संबंध में कार्रवाई की है। एनएचआरसी ने कर्नाटक सरकार और राज्य के पुलिस प्रमुख को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। यह मानवाधिकारों के उल्लंघन की संभावित रिपोर्टों पर मीडिया की रिपोर्टों के बाद हुआ है।

2 जुलाई की एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे वीडियो सामने आए हैं जिनमें कथित तौर पर दाइयां छोटे बच्चों को वॉशिंग मशीन में डाल रही हैं, टॉयलेट जेट स्प्रे से उनके मुंह में पानी डाल रही हैं, और उन्हें चुप कराने के लिए शौचालयों में बंद कर रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, दाइयों ने बच्चों को पश्चिमी शैली के कमोड पर बैठने के लिए मजबूर किया और रोने पर चुप रहने की धमकी दी।एहतियात के तौर पर क्रेच को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।
एनएचआरसी की प्रतिक्रिया
एनएचआरसी ने मीडिया रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया है, और इसमें उठाए गए गंभीर मानवाधिकार मुद्दों पर चिंता व्यक्त की है। आयोग ने इन आरोपों को दूर करने के लिए कर्नाटक के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से एक व्यापक रिपोर्ट मांगी है।
मध्य प्रदेश में अलग घटना
एक अन्य मामले में, एनएचआरसी ने मध्य प्रदेश के सागर जिले के बांदा सिविल अस्पताल में कथित चिकित्सा लापरवाही से संबंधित एक मीडिया रिपोर्ट पर भी प्रतिक्रिया दी है। सर्दी और लालिमा के इलाज के दौरान कथित तौर पर डॉक्टरों द्वारा नाक की बूंदों को उसकी आंखों में डालने के बाद एक डेढ़ साल के बच्चे की कथित तौर पर दृष्टि चली गई थी। इससे संक्रमण हो गया जिसके परिणामस्वरूप दृष्टि चली गई।
एनएचआरसी ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर इस घटना पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग की कार्रवाइयां ऐसे मामलों में संभावित मानवाधिकारों के उल्लंघन को दूर करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती हैं।
With inputs from PTI












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