US Iran Peace Talks: अमेरिका और ईरान के बीच आज मस्कट में निर्णायक वार्ता, किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
US Iran Oman Talks 2026: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों के बीच, आज ओमान की राजधानी मस्कट में अमेरिका और ईरान के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण शांति वार्ता होने जा रही है। भारतीय समयनुसार सुबह 11:30 बजे शुरू होने वाली इस बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह सुलह की आखिरी कोशिश मानी जा रही है। एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की सीधी धमकियां और खाड़ी में भारी सैन्य जमावड़ा है, तो दूसरी ओर ईरान का अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर अडिग रुख।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ के बीच होने वाली यह बातचीत तय करेगी कि दुनिया एक नए बड़े युद्ध में झोंकी जाएगी या कूटनीति सफल होगी। मस्कट का चुनाव इस 'लास्ट चांस डिप्लोमेसी' के लिए इसलिए किया गया है ताकि विवादित मुद्दों पर सीधी और गोपनीय चर्चा हो सके।

महाशक्तियों के बीच सुलह या संघर्ष की अंतिम घड़ी
दुनिया की नजरें ओमान की राजधानी मस्कट पर टिकी हैं, जहां आज भारतीय समयनुसार सुबह 11:30 बजे अमेरिका और ईरान के बीच हाई-प्रोफाइल वार्ता शुरू होने जा रही है। एक तरफ खाड़ी में अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती और ट्रंप की सीधी धमकियां हैं, तो दूसरी तरफ ईरान का झुकने से इनकार। यह वार्ता केवल दो देशों के बीच की बातचीत नहीं, बल्कि भविष्य के क्षेत्रीय और वैश्विक समीकरणों को तय करने वाला एक निर्णायक मोड़ है।
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चर्चा के मुख्य मुद्दे: परमाणु से लेकर प्रॉक्सी वार तक
बैठक का एजेंडा दोनों पक्षों के लिए विवाद की सबसे बड़ी जड़ है। ईरान चाहता है कि बातचीत केवल परमाणु (Iran Nuclear Deal) कार्यक्रम और उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने तक सीमित रहे। वहीं, अमेरिका का रुख कड़ा है; ट्रंप प्रशासन चाहता है कि इसमें ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम, मानवाधिकार और हिज़्बुल्लाह व हमास जैसे प्रॉक्सी समूहों को मिलने वाला समर्थन भी शामिल हो। अमेरिका इसे एक 'व्यापक सौदे' के रूप में देख रहा है, जिसे ईरान अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मान रहा है।
बैठक की मेज पर कौन: ट्रंप की खास टीम और अराघची
इस महत्वपूर्ण बैठक में चेहरों का चुनाव काफी कुछ बयां करता है। अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर नेतृत्व कर रहे हैं। कुशनर की मौजूदगी दर्शाती है कि ट्रंप इस मुद्दे को व्यक्तिगत और रणनीतिक रूप से कितनी प्राथमिकता दे रहे हैं। दूसरी ओर, ईरान का पक्ष अनुभवी विदेश मंत्री अब्बास अराघची रख रहे हैं। यह आमने-सामने की बातचीत तनाव को कम करने की एक गंभीर कोशिश मानी जा रही है।
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Trump Iran Threat: बातचीत के बीच 'क्षेत्रीय युद्ध' की चेतावनी
वार्ता शुरू होने से ठीक पहले माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई को चेतावनी देते हुए कहा है कि उन्हें "बहुत चिंतित" होना चाहिए। इसके जवाब में खामेनेई ने स्पष्ट किया है कि यदि अमेरिका ने हमला किया, तो यह केवल एक सीमित टकराव नहीं बल्कि "क्षेत्रीय युद्ध" होगा। इन धमकियों ने वार्ता के सफल होने की उम्मीदों पर अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं, जिससे पूरी दुनिया सहमी हुई है।
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Why Oman is mediating: तुर्किए पर ओमान को प्राथमिकता
शुरुआत में यह बैठक तुर्किए में होनी थी, लेकिन ईरान ने ओमान को चुना। ओमान दशकों से दोनों देशों के बीच एक न्यूट्रल और विश्वसनीय मध्यस्थ रहा है। तुर्किए के NATO सदस्य होने और क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय होने के कारण ईरान वहां सहज नहीं था। ईरान को डर था कि तुर्किए में अन्य क्षेत्रीय देश भी शामिल होंगे, जिससे मुद्दों का दायरा बढ़ जाएगा। ओमान में गोपनीय और द्विपक्षीय बातचीत का पुराना इतिहास रहा है, जो ईरान को अपनी शर्तों पर बात करने का अवसर देता है।












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