भारत के साथ अमेरिका फिर करेगा विश्वासघात! जो बाइडेन ने पाकिस्तान को लेकर फिर खेला नया दांव
अमेरिका को अलग अलग देशों का इस्तेमाल करने में माहिर माना जाता है और अमेरिका पाकिस्तान के जियो स्ट्रैटेजिक लोकेशन का कई दशक से इस्तेमाल करता रहा है।
वॉशिंगटन, अगस्त 26: अमेरिका भले ही भारत को अपना सबसे महत्वपूर्ण भागीदार बताता रहे या फिर अमेरिकी संसद में भारत को लेकर बड़े बड़े बिल पेश किए जाते हों, जिसमें चीन को रोकने के लिए भारत की सहायता करने और भारतीय आर्मी को मजबूत करने की बात कही जाए, लेकिन असलियत तो ये है, कि अमेरिका भारत को लेकर अभी भी डबल गेम खेल रहा है और जो बाइडेन भी वही नीति अपना रहे हैं, जिस नीति के चलते पाकिस्तान आतंकवादियों का परमानेंट ठिकाना बन गया। भारत के लिए अमेरिका कैसे दोमुंहा सांप बन गया है, आइये समझते हैं।

डिफॉल्ट होने के कगार पर पाकिस्तान
पाकिस्तान इन दिनों काफी खतरनाक आर्थिक संकट से गुजर रहा है और पाकिस्तान डिफॉल्ट होने के कगार पर है। वहीं, आईएमएफ लगातार पाकिस्तान को लोन देने से इनकार करता रहा है, क्योंकि पाकिस्तान आईएमएफ की शर्तों को पूरा करने में नाकाम रहा है। लेकिन, अब पता चल रहा है, कि अमेरिका पाकिस्तान को आईएमएफ से लोन दिलाने के लिए पैरवी कर रहा है और जाहिर सी बात है, कि अमेरिका की पैरवी के बाद पाकिस्तान को आईएमएफ से लोन मिल जाएगा और पाकिस्तान कुछ महीनों तक डिफॉल्ट होने से बच जाएगा। लेकिन, बात आईएमएफ से लोन दिलाने की नहीं है, असल बात आतंकवाद है, जिसको लेकर अमेरिका पाकिस्तान को कुछ नहीं कह रहा है। जबकि, भारत बार बार पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को लेकर आवाजें उठा रहा है।

आतंकवाद पर अमेरिका की चुप्पी
पाकिस्तान में ही ओसामा बिन लादेन मिला और यूनाइटेड नेशंस द्वारा घोषित करीब दर्जन भर आतंकवादी इस वक्त पाकिस्तान में ही रह रहे हैं, जो भारत में बम धमाकों के आरोपी हैं और एक्सपर्ट्स पूछ रहे हैं, कि इस वक्त जब पाकिस्तान डिफॉल्ट होने के कगार पर है, तो फिर अमेरिका आईएमएफ से लोन दिलाने के बदले पाकिस्तान सरकार पर आतंकवादियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने के लिए प्रेशर क्यों नहीं बना रहा है? भारत के प्रमुख जियोपॉलिटिक्स विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने अमेरिका के इस रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं और उन्होंने अपने ट्वीट में अमेरिका की इस नीति को कठघरे में खड़ा किया है।
अमेरिकी नीति पर एक्सपर्ट के सवाल
ब्रह्मा चेलानी ने एक ट्वीट में कहा है, कि ''पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था डिफॉल्ट होने के कगार पर है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादी संस्थाओं के खिलाफ पाकिस्तान कार्रवाई करे, इस बात का प्रेशर बनाने के बजाए टीम बाइडेन पाकिस्तान के साथ अमेरिकी साझेदारी का विस्तार कर रही है और आईएमएफ ऋण संवितरण का समर्थन कर रही है।'' ब्रह्मा चेलानी का साफ कहना है, कि जो बाइडेन का प्रशासन पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों का विस्तार कर रहा है और पाकिस्तान पर आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रेशर नहीं बना रहा है, जबकि अभी अमेरिका के पास पूरा मौका है, कि वो आतंकवादियों पर नकेल कस सके। यानि, इसका मतलब जो समझ में आता है, वो यही है, कि चीन को थामने के लिए अमेरिका भारत का इस्तेमाल कर रहा है और भारत के खिलाफ अमेरिका पाकिस्तान को आगे बढ़ा रहा है और अमेरिका का ये खतरनाक दोहरा रवैया भारत के खिलाफ काफी खतरनाक साबित होता आया है।

देशों का इस्तेमाल करने में माहिर अमेरिका
अमेरिका को अलग अलग देशों का इस्तेमाल करने में माहिर माना जाता है और अमेरिका पाकिस्तान के जियो स्ट्रैटेजिक लोकेशन का कई दशक से इस्तेमाल करता रहा है और फिर से करना चाहता है। 2001 में अमेरिका में हुए आतंकवादी हमले से पहले भारत चीख-चीखकर पाकिस्तानी आतंकवाद के खिलाफ हर वैश्विक मंच पर आवाज उठाता था, लेकिन अमेरिकी प्रशासन कान में तेल डाले लगातार अरबों डॉलर पाकिस्तान भेजता था, जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान की एजेंसियां भारत के खिलाफ आतंकवाद को प्रायोजित करने में करती थीं, लेकिन जब अमेरिका पर हमला हुआ, तो पहली बार उसे आतंकवाद का मतलब समझ में आया और उसने अफगानिस्तान पर हमला किया। हालांकि, इसमें भी देखा जाए, तो अमेरिका ने बहुत बड़ा गेम खेला हुआ है। अमेरिका ने तालिबान के साथ समझौता कर और अलकायदा को करीब करीब न्यूट्रल कर अपने घर को तो सुरक्षित कर लिया, लेकिन अमेरिका ने पाकिस्तानी आतंकवादियों को वैसे ही छोड़ दिया, ताकि भारत परेशान होता रहे।

जनरल बाजवा ने मांगी थी मदद
आपको बता दें कि, पाकिस्तान लगभग कंगाल ही हो चुका है। कंगाली से जूझ रहे पाकिस्तान को डिफाल्टर बनने से रोकने के लिए अब सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने पिछले दिनों अमेरिकी विदेश विभाग के एक बड़े अधिकारी से बात की थी और माना जा रहा है, कि अमेरिका ने इस दौरान जनरल बाजवा के साथ बड़ा 'डील' किया है। जानकारी के मुताबिक, बाजवा ने अमेरिका से कहा था, कि वो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से कर्ज दिलवाने में पाकिस्तान की मदद करे। जिसके बाद अब अमेरिका पाकिस्तान को डिफॉल्ट होने से बचाने के लिए लोन दिलवाने के लिए तैयार हो गया है और माना जा रहा है, कि बहुत जल्द पाकिस्तान को आईएमएफ से लोन मिल जाएगा।

टॉप यूएस जनरल का पाकिस्तान दौरा
इतना ही नहीं, पिछले हफ्ते एक शीर्ष अमेरिकी जनरल ने रावलपिंडी में स्थिति पाकिस्तान सेना के मुख्यालय का दौरा किया था और 1.5 साल के अंतराल के बाद किसी अमेरिकी जनरल का पहला पाकिस्तान दौरा था। सेंटकॉम के प्रमुख माइकल ई कुरिल्ला ने सीओएएस जनरल कमर जावेद बाजवा से मुलाकात की थी। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों सैन्य अधिकारियों के बीच आतंकवाद विरोधी कार्यक्रमों पर चर्चा की गई है। लेकिन, एक्सपर्ट्स बताते हैं, कि तालिबान को लेकर दोनों सैन्य अधिकारियों के बीच बात हुई है, जबकि पाकिस्तानी आतंकवादियों का जिक्र भी नहीं किया गया। पिछले 18 महीनों में किसी भी अमेरिकी जनरल ने पाकिस्तान का दौरा नहीं किया था, जो अफगानिस्तान से अमेरिका की अराजक वापसी के कारण द्विपक्षीय संबंधों में रुकावट का संकेत दे रहा था, लेकिन एक बार फिर अमेरिका ने पाकिस्तान से संबंध सुधारने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं, भले ही अमेरिकी कदम से भारतीय हितों का नुकसान हो रहा है, उससे अमेरिका को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।












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