US Election 2024: अमेरिका में कैसे होते हैं राष्ट्रपति चुनाव, कौन-कौन हैं उम्मीदवार, भारत से कितना अलग?

US Presidential Election 2024: अमेरिका में 5 नवंबर 2024 को राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहा है, जिसमें डेमोक्रेटिक पार्टी की कमला हैरिस और रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति को भी गहराई से प्रभावित करता है। इस वजह से यहां के चुनाव पर पूरी दुनिया की नजर रहती है।

लिहाजा, हम अमेरिका की चुनाव को लेकर अपने पाठकों के लिए स्पेशल सीरिज चला रहे हैं, जिसमें हम अमेरिकी चुनाव से संबंधित महत्वपूर्ण और दिलचस्प जानकारियां आपसे शेयर कर रहे हैं। आज इस सीरिज का चौथा भाग हम प्रकाशित कर रहे हैं। हमें उम्मीद है, कि हमारी ये सीरिज आपको काफी पसंद आ रही होगी।

US Presidential Election 2024

आपको इस सीरीज के अन्य हिस्से इसी स्टोरी में मिल जाएंगे। आज हम इस बात की चर्चा करने वाले हैं, कि अमेरिका में चुनाव कैसे होते हैं, कैसे उम्मीदवारों का चयन किया जाता है? और अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, भारत में होने वाले चुनाव से कितना अलग होता है?

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया
अमेरिका का चुनावी साल राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारों की घोषणा से शुरू होता है। इसमें प्रमुख राजनीतिक दल - डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन - अपने-अपने उम्मीदवार तय करने के लिए चुनावी अभियान शुरू करते हैं। इसके लिए संभावित उम्मीदवार अपने चुनावी अभियान की शुरुआत संघीय चुनाव आयोग में पंजीकरण से करते हैं।

प्राइमरी और कॉकस
राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का चयन करने के लिए अमेरिकी चुनाव में प्राइमरी और कॉकस की प्रक्रिया होती है।

  • प्राइमरी: इसमें पार्टी के सदस्य अपने पसंदीदा उम्मीदवार के लिए वोट करते हैं, और सबसे ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार पार्टी का प्रतिनिधित्व करता है।
  • कॉकस: इसमें पार्टी के सदस्य मिलकर चर्चा करते हैं और वोट के जरिए उम्मीदवार का चयन करते हैं।

अधिकतर राज्यों में प्राइमरी का आयोजन होता है, जबकि कुछ राज्यों में कॉकस होते हैं। इसके बाद जून में दोनों पार्टियां एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करती हैं, जिसमें पार्टी के चुने हुए प्रतिनिधि अपने पसंदीदा उम्मीदवार को समर्थन देते हैं और राष्ट्रपति पद के लिए अंतिम उम्मीदवार का चयन होता है। यहां पर राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार एक उपराष्ट्रपति उम्मीदवार का भी चयन करते हैं, जिसे "रनिंग मेट" कहा जाता है।

राष्ट्रपति उम्मीदवारों के बीच बहस
सितंबर और अक्टूबर में राष्ट्रपति चुनाव में शामिल उम्मीदवार टीवी पर डिबेट में भाग लेते हैं, जिसमें वे अपनी नीतियों और विचारों को सामने रखते हैं। इन बहसों का उद्देश्य जनता को यह समझाना होता है कि कौन सा उम्मीदवार बेहतर है।

इलेक्टोरल कॉलेज प्रणाली
अमेरिका में चुनाव "इलेक्टोरल कॉलेज" प्रणाली पर आधारित होता है। इसका मतलब यह है कि नागरिक सीधे राष्ट्रपति के लिए वोट नहीं करते हैं, बल्कि "इलेक्टर्स" नाम के प्रतिनिधियों के लिए वोट करते हैं।

  • इलेक्टर्स: अमेरिका के सभी 50 राज्यों के 538 इलेक्टर्स होते हैं।
  • अगर किसी उम्मीदवार को बहुमत वोट मिलता है, तो उसे उस राज्य के सभी इलेक्टोरल वोट मिलते हैं।
  • 270 से ज्यादा इलेक्टोरल वोट पाने वाला उम्मीदवार जीतता है और उसे राष्ट्रपति के रूप में चुना जाता है।

क्या है भारत और अमेरिका के चुनावों में अंतर?
भारत और अमेरिका, दोनों ही दुनिया के बड़े लोकतंत्र हैं, लेकिन इन दोनों की चुनावी प्रक्रियाएं काफी अलग हैं।

भारत की संसदीय प्रणाली

  • भारत में प्रधानमंत्री का चुनाव सीधे नहीं होता है। मतदाता लोकसभा सांसदों के लिए वोट करते हैं और सांसद मिलकर प्रधानमंत्री का चुनाव करते हैं।
  • लोकसभा में कुल 543 सीटों पर चुनाव होते हैं, और जिसे बहुमत मिलता है, वही पार्टी या गठबंधन सरकार बनाती है।

प्रमुख राजनीतिक पार्टियों का फर्क

  • अमेरिका में दो मुख्य पार्टियां - डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन - के बीच सीधा मुकाबला होता है, जबकि भारत में कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियां होती हैं, जिनका चुनावी प्रक्रिया में विशेष योगदान होता है।
  • भारत में चुनाव इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया द्वारा संचालित किए जाते हैं, जबकि अमेरिका में संघीय चुनाव आयोग और अमेरिकी चुनाव सहायता आयोग द्वारा चुनावों की देखरेख की जाती है।

2024 के प्रमुख उम्मीदवार
इस बार के चुनाव में प्रमुख उम्मीदवार हैं...

  • रिपब्लिकन पार्टी: डोनाल्ड ट्रंप, रॉन डेसेंटिस, निक्की हेली और रयान बिंकले।
  • डेमोक्रेटिक पार्टी: कमला हैरिस, मैरिएन विलियमसन और डीन फिलिप्स।
  • इसके अलावा कुछ स्वतंत्र उम्मीदवार भी चुनावी रेस में हैं, जैसे कि रॉबर्ट एफ कैनेडी जूनियर और कॉर्नेल वेस्ट।

अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव केवल अमेरिका के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसके परिणाम वैश्विक राजनीति को प्रभावित करते हैं। भारत के लोकसभा चुनाव की तुलना में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव एक अलग प्रणाली पर आधारित होता है, जहां इलेक्टोरल कॉलेज का महत्व होता है। दोनों देशों की चुनावी प्रक्रियाएं उनके लोकतांत्रिक ढांचे का हिस्सा हैं और इनसे दोनों देशों का भविष्य तय होता है।

दुनिया के 78 देशों में चुनाव
इस साल सबसे दिलचस्प बात ये है, कि दुनिया के 78 देशों में चुनाव हो रहे हैं, जिनमें अमेरिका के अलावा भारत, पाकिस्तान और रूस भी शामिल हैं। ये साल, इस शताब्दी का सबसे बड़ा चुनावी साल होने जा रहा है। अगले महीने पाकिस्तान में संसदीय चुनाव होने वाले हैं, जबकि साल के बीच में भारत में करीब 2 महीने तक चुनावी संग्राम चलेगा।

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