नरेन्द्र मोदी, पुतिन, जिनपिंग.. ट्रंप या कमला हैरिस, कौन बने US का राष्ट्रपति? क्या चाहते हैं वर्ल्ड लीडर्स?

US Election 2024: 5 नवंबर को संयुक्त राज्य अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में सर्वेक्षणों से पता चलता है कि डेमोक्रेटिक उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और रिपब्लिकन पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच कड़ी टक्कर है। लेकिन अमेरिकी चुनाव के असर को देखते हुए दुनिया भर की राजधानियों में इस मुकाबले पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

अमेरिका में हो रहे चुनाव पर भारत से लेकर चीन, रूस से लेकर यूरोप, पूरी दुनिया की नजर है। लिहाजा, जानना जरूरी हो जाता है, कि अलग अलग देशों के नेता, व्हाइट हाउस में किसे देखना चाहेंगे?

US Election 2024

व्लादिमीर पुतिन, रूस

हालांकि, रूसी नेता ने शायद मजाक में कहा है, कि वह कमला हैरिस को राष्ट्रपति के रूप में पसंद कर सकते हैं, लेकिन कई संकेत इस ओर इशारा करते हैं, कि पुतिन वास्तव में डोनाल्ड ट्रंप को जीतते हुए देखना पसंद करेंगे। चैथम हाउस में रूस और यूरेशिया कार्यक्रम में एसोसिएट फेलो टिमोथी ऐश ने अल जजीरा से कहा है, कि "पुतिन कई कारणों से ट्रंप को राष्ट्रपति के रूप में देखना पसंद करेंगे।"

उन्होंने कहा, "सबसे पहले, पुतिन को लगता है कि ट्रंप रूस के प्रति नरम हैं और वे यूक्रेन के मामले में उन्हें बड़ी छूट देंगे और यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य सहायता में कटौती करने के साथ और रूस पर लगे कई प्रतिबंधों को हटा लेंगे।"

ऐश ने कहा, "मुझे लगता है कि पुतिन ट्रंप को देखकर खुद की एक छवि देखते हैं, एक सत्तावादी, समाज विरोधी। उन्हें लगता है कि वे ट्रंप को समझते हैं।" इसके अलावा, पुतिन पश्चिमी उदार बाजार लोकतंत्र की प्रणाली से "नफरत" करते हैं, और रूसी नेता "सोचते हैं कि ट्रंप, नाटो और यूरोपीय संघ जैसी संस्थाओं को कमजोर करते हुए, जहां से उन्होंने ट्रंप 1.0 में छोड़ा था, वहीं से आगे बढ़ेंगे।" हालांकि, रूसी विश्लेषकों का कहना है, कि चाहे कोई भी जीते, मॉस्को के अधिकारियों का मानना ​​है, कि रूस के प्रति अमेरिका की नफरत बनी रहेगी। पुतिन पहले भी अमेरिकी राष्ट्रपति राजनीति पर अपने विचारों के बारे में मुखर रहे हैं और 2004 से बार-बार उम्मीदवारों का समर्थन करते रहे हैं।

शी जिनपिंग, चीन

शी जिनपिंग ने सार्वजनिक रूप से कभी भी किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति को लेकर समर्थन नहीं किया है।

रूस की तरह, डेमोक्रेट और रिपब्लिकन, दोनों ने चीन के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। अपने राष्ट्रपति पद के दौरान, ट्रंप ने चीन के साथ व्यापार युद्ध शुरू किया था, और 2018 में 250 बिलियन डॉलर के चीनी आयात पर टैरिफ लगाया था। चीन ने जवाबी हमला करते हुए 110 बिलियन डॉलर के अमेरिकी आयात पर टैरिफ लगा दिया।

ऐसा नहीं लगता कि अगर वे चुने जाते हैं तो वे इससे पीछे हटेंगे, लेकिन डेमोक्रेट्स दुनिया भर में चीन के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ रैली भी कर सकते हैं।

जब बाइडेन राष्ट्रपति बने, तो उन्होंने ट्रंप के टैरिफ को बरकरार रखा। इसके अलावा, इस साल 13 सितंबर को, बाइडेन प्रशासन ने कुछ चीनी-निर्मित उत्पादों पर टैरिफ में वृद्धि की घोषणा की। अगर हैरिस जीतती हैं, तो उनसे चीन के प्रति बाइडेन की नीति के अनुरूप बने रहने की उम्मीद है।

ट्रंप या कमला हैरिस में से किसी ने भी इस बारे में विस्तार से नहीं बताया है, कि अगर वे चुने जाते हैं तो चीन के प्रति उनकी कार्रवाई क्या होगी।

हालांकि, ट्रंप के व्यापार युद्ध के बावजूद, उन्होंने शी जिनपिंग के साथ अपने अच्छे संबंधों का बखान किया है। 14 जुलाई को एक हत्या के प्रयास में बच निकलने के बाद ट्रंप ने कहा था, कि विश्व के नेताओं ने उनसे संपर्क किया है। ट्रंप ने एक रैली में कहा, "राष्ट्रपति शी के साथ मेरा रिश्ता बहुत अच्छा रहा। वह एक महान व्यक्ति हैं, उन्होंने उस दिन मुझे एक सुंदर नोट लिखा, जब उन्होंने जो कुछ हुआ उसके बारे में सुना।" हालांकि, एनबीसी न्यूज ने पेकिंग विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के पूर्व डीन जिया किंगगुओ के हवाले से कहा, कि पर्दे के पीछे, चीनी अधिकारी कमला हैरिस की ओर थोड़ा झुके हुए हो सकते हैं।

बेंजामिन नेतन्याहू, इजराइल

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से किसी भी उम्मीदवार का समर्थन नहीं किया है। लेकिन, व्यापक तौर पर माना जाता है, कि वो व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप को देखना पसंद करेंगे। ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान भी नेतन्याहू और ट्रंप के बीच अच्छे संबंध थे। 2019 में, इजराइली-अमेरिकी परिषद में, ट्रंप ने कहा था, कि "यहूदी राज्य को व्हाइट हाउस में आपके राष्ट्रपति से बेहतर कोई दोस्त कभी नहीं मिला।"

ये भावनाएं परस्पर थीं। नेतन्याहू ने 2020 के एक बयान में कहा, कि ट्रंप "इजराइल के व्हाइट हाउस में अब तक के सबसे अच्छे दोस्त हैं"। बाइडेन के चुने जाने के बाद ट्रंप और नेतन्याहू के बीच संबंध खराब हो गए। जब ​​बाइडेन ने शपथ ली, तो नेतन्याहू ने उन्हें बधाई दी। ट्रंप ने एक साक्षात्कार में कहा, कि उन्हें इससे धोखा महसूस हुआ।

हालांकि, इजराइली पीएम ने पुराने रिश्ते को फिर से मजबूत करने की कोशिश की है। इस साल जुलाई में अमेरिका की यात्रा के दौरान नेतन्याहू ने फ्लोरिडा में ट्रंप के मार-ए-लागो स्थित आवास पर उनसे मुलाकात की थी। एक्सियोस ने बताया, कि नेतन्याहू के एक सहयोगी ने दोनों नेताओं की वास्तविक मुलाकात से पहले मार-ए-लागो की यात्रा की थी, ताकि ट्रंप की प्रशंसा करते हुए नेतन्याहू की किताब के अंश पढ़े जा सकें। इजराइली पीएम ने जुलाई में पेंसिल्वेनिया में एक रैली में ट्रंप पर हत्या के प्रयास के बारे में आश्चर्य व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी पोस्ट किया था, जिसे ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर फिर से पोस्ट किया था।

हालांकि, बाइडेन प्रशासन ने गाजा पर इजराइल के युद्ध के दौरान नेतन्याहू की सरकार को अटूट कूटनीतिक और सैन्य सहायता दिखाई है। पिछले साल 7 अक्टूबर को गाजा पर इजराइल के युद्ध की शुरुआत के बाद से बाइडेन की सरकार ने इजराइल को अरबों डॉलर की सैन्य सहायता भेजी है। लेकिन, माना जा रहा है, कि बेंजामिन नेतन्याहू, अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करने के इरादे से गाजा में युद्ध नहीं रोक रहे हैं, ताकि कमला हैरिस को चुनावी हार नसीब हो।

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यूरोपीय और नाटो नेता

अधिकांश यूरोपीय नेता कमला हैरिस को अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में पसंद करते हैं।

जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ ने संवाददाताओं से कहा, "मैं उन्हें अच्छी तरह जानता हूं, वह निश्चित रूप से एक अच्छी राष्ट्रपति होंगी।" ट्रंप ने कई बार नाटो छोड़ने की धमकी दी है। हालांकि, पोलिटिको ने बताया है, कि उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और रक्षा विशेषज्ञों का कहना है, कि उनके गठबंधन से बाहर निकलने की संभावना नहीं है।

इसके बावजूद, नाटो के बारे में उनकी शिकायतें बनी हुई हैं। उम्मीद है कि वह चाहेंगे कि नाटो सहयोगी अपने रक्षा खर्च लक्ष्य को बढ़ाएं। फरवरी में, ट्रंप ने यूरोप में सहयोगियों के साथ यह सुझाव देकर माहौल गर्म कर दिया, कि वह रूस को उन नाटो सहयोगियों पर हमला करने के लिए कहेंगे जिन्हें वह "अपराधी" मानते हैं।

इसके अलावा, डोनाल्ड ट्रंप की जीत का मतलब नवीकरणीय ऊर्जा पहलों के लिए सहयोग पर यूरोपीय देशों के साथ कम तालमेल हो सकता है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि ट्रंप ने अमेरिका को विदेशी ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने में सक्षम बनाने के लिए अधिक जीवाश्म ईंधन उत्पादन के लिए अभियान चलाया है। जुलाई में पार्टी के नामांकन को स्वीकार करते हुए उन्होंने रिपब्लिकन राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा था, कि "हम ड्रिल करेंगे और खूब ड्रिल करेंगे।" यानि, अमेरिका पेट्रोल डीजल का उत्पादन करेगा। जो यूरोप के लिए एक झटका है।

नरेन्द्र मोदी, भारत

भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान उनके साथ घनिष्ठ संबंध साझा किए थे, लेकिन नरेन्द्र मोदी,2020 के चुनावी जीत पर बाइडेन को बधाई देने वाले पहले विश्व नेताओं में से एक थे।

ब्रिटेन स्थित थिंक टैंक चैथम हाउस में एशिया-प्रशांत कार्यक्रम के दक्षिण एशिया के वरिष्ठ शोध फेलो चिटिग बाजपेई ने अल जजीरा से कहा, "मुझे नहीं लगता कि मोदी को किसी एक उम्मीदवार के लिए दूसरे उम्मीदवार से ज़्यादा तरजीह है।"

बाजपेयी ने चैथम हाउस के लिए लिखे एक लेख में लिखा, "भारत के साथ संबंधों को गहरा करने और इसे दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार के रूप में देखने पर वाशिंगटन में दोनों दलों के बीच उच्च स्तर की सहमति है - यकीनन उतनी ही सहमति, जितनी चीन को दीर्घकालिक रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखने पर है।"

उन्होंने लिखा कि भारत के साथ अमेरिकी जुड़ाव के तीन प्रमुख स्तंभ हैं: भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, अमेरिका, भारत को चीन के खिलाफ एक मजबूत दीवार के रूप में देखता है और भारत की संभावित रूप से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। वाशिंगटन, डीसी स्थित विल्सन सेंटर थिंक टैंक के साउथ एशिया इंस्टीट्यूट के निदेशक माइकल कुगेलमैन ने अल जजीरा को बताया, कि भारत सरकार दोनों उम्मीदवारों के पक्ष और विपक्ष का आकलन करेगी।

कुगेलमैन ने कहा ने कहा, कि ट्रंप की बात करें तो, "नई दिल्ली में यह भावना हो सकती है कि यह भारत के लिए अच्छी बात होगी क्योंकि ऐसी धारणा हो सकती है कि ट्रंप भारत के आंतरिक मामलों, जिसमें मानवाधिकार मुद्दे भी शामिल हैं, उसके बारे में कोई उपद्रव नहीं करेंगे।" लेकिन इसके बावजूद, भारत सरकार ट्रंप की "अप्रत्याशित" शासन शैली के बारे में चिंतित होगी।

बाजपेयी ने अल जजीरा से कहा, "हालांकि, मोदी सरकार, ट्रंप के एक कार्यकाल को देख चुकी है, लेकिन कमला हैरिस के जीतने का मतलब ये होगा, कि बाइडेन प्रशासन के समय से चल रही नीतियों का यूंही बना रहना।"

बाइडेन के कार्यकाल में, अमेरिका और भारत के बीच डिफेंस, टेक्नोलॉजी और अर्थव्यवस्था के मामले में संबंध गहरे हुए। बाइडेन ने भारत को एक प्रमुख रक्षा साझेदार बनाया, जबकि भारत औपचारिक सैन्य सहयोगी नहीं है और सैन्य सहायता के लिए रूस पर निर्भर है, फिर भी अमेरिका ने भारत और रूस के बीच के संबंधों को माना है। लिहाजा, एक्सपर्ट्स का मानना है, कि भारत के लिए डोनाल्ड ट्रंप हों या कमला हैरिस, दोनों के ही प्रशासन से ज्यादा लाभ, और थोड़ी बहुत हानि की संभावना है।

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