अमेरिकी चुनाव: जो बाइडेन की जीत होगी चीन की हार, क्यों ट्रंप को ही व्हाइट हाउस में चाहते हैं जिनपिंग
वॉशिंगटन। अमेरिका में 3 नवंबर को राष्ट्रपति के लिए वोट डाले गए और अब नतीजों का इंतजार है। डेमोक्रेट पार्टी के जो बाइडेन कई जगह पर रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। इस बार राष्ट्रपति चुनाव सिर्फ अमेरिका के लिए ही नहीं कुछ और देशों के लिए भी काफी अहम हो गए हैं। दूसरे कार्यकाल पर नजर गड़ाए ट्रंप अगर व्हाइट हाउस नहीं पहुंचते हैं तो फिर यह न सिर्फ उनकी हार होगी बल्कि कुछ और देशों के कई सपने भी चकनाचूर हो सकते हैं। वहीं अगर जो बाइडेन चुनाव जीत गए तो फिर जो लोग चीन पर नरमी बरतने के लिए उन्हें कठघरे में खड़ा करते हैं, वो भी उनकी नीतियों से चौंक सकते हैं।

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बाइडेन की वजह से बढ़ेगी टेंशन
विशेषज्ञ मानते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप हाल के कुछ वर्षों में पहले ऐसे अमेरिकी राष्ट्रपति हैं जो चीन पर काफी आक्रामक हैं। उन्होंने चीनी सामानों पर आयात शुल्क लगाया तो अहम टेक्नोलॉजी पर प्रतिबंध लगाया। इसके बाद भी कुछ चीनी अधिकारियों की मानें तो चीन का नेतृत्व ट्रंप को ही व्हाइट हाउस में चाहता है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका के साथियों के बीच बने एक तंत्र को हिला दिया। चीन, अभी तक मानता है कि ट्रंप का व्हाइट हाउस में रहना उसके लिए फायदे का सौदा है। ट्रंप ने 'अमेरिका फर्स्ट' का नारा दिया और अपनी नीतियों को आगे बढ़ाया। इसकी वजह से चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को सबसे ज्यादा फायदा हुआ। ट्रंप की वजह से जिनपिंग के लिए वह रास्ता खुल गया जहां पर वह अपने नेतृत्व के दम पर ट्रेड और क्लाइमेट चेंज जैसी डील्स में बड़ा रोल अदा कर सके। जिनपिंग के सामने बड़ा मौका है कि वह खुद को वर्ल्ड लीडर साबित कर सकते हैं। चीन, बाइडेन की वजह से टेंशन में है और उसकी अहम चिंता है कि डेमोक्रेट बाइडेन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन के खिलाफ आपसी सहयोग के और ज्यादा मोर्चों को खोल सकते हैं। इसके साथ ही वह ट्रेड और टेक्नोलॉजी पर लगातार दबाव बनाकर रखेंगे। नानजिंग यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय रिश्तों के प्रोफेसर झू फेंग के मुताबिक अगर ट्रंप हार जाते हैं तो फिर बीजिंग को वॉशिंगटन से कोई फायदा नहीं हो सकेगा।
बाइडेन अपनाएंगे कड़ी नीतियां!
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में जीत चाहे ट्रंप की हो या बाइडेन की, दोनों ही विस्तारवादी नीति अपनाने में लगे चीन के खिलाफ सख्त रुख अपनाएंगे। ट्रंप के चीन को लेकर हमलावर होने के बाद बाइडेन ने भी चीन को सबक सीखाने का वादा किया है। चीनी मामलों के अमेरिकी विशेषज्ञ मैरियान स्मिथ के मुताबिक चीन आज अमेरिका के लिए सुरक्षा, आर्थिक और मूल्यों के लिहाज से सबसे बड़ा खतरा बन गया है। स्मिथ ने कहा कि बाइडेन का चीन पर काफी बोझ है। सीनेटर से लेकर उपराष्ट्रपति के अपने 45 साल के राजनीतिक कार्यकाल में जो बाइडेन ने चीन और अमेरिका के बीच एकजुटता पर जोर दिया था। वर्ष 2013 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने जो बाइडेन को अपना पुराना मित्र करार दिया था। इसके बाद भी बाइडेन, चीन के प्रति सख्त रुख अपना सकते हैं। इससे पहले से चला रहा चीन के साथ तनाव और ज्यादा बढ़ सकता है।












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