Venezuela Crisis: मादुरो की गिरफ्तारी पर अमेरिका में बवाल, ट्रंप के खिलाफ न्यूयॉर्क से लॉस एंजेलिस तक प्रदर्शन
Venezuela Crisis: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की नाटकीय गिरफ्तारी ने अमेरिका के भीतर एक भीषण राजनीतिक युद्ध छेड़ दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिस सैन्य ऑपरेशन को अपनी सबसे बड़ी जीत बताया, अब वही उनके लिए गले की फांस बनता दिख रहा है। न्यूयॉर्क से लेकर वॉशिंगटन तक, ट्रंप के इस 'बोल्ड' कदम की तीखी आलोचना शुरू हो गई है।
न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी और पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस जैसे दिग्गजों ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन और युद्ध जैसा कृत्य करार दिया है। अमेरिका अब दो गुटों में बंट गया है, जहां एक तरफ ट्रंप की ताकत का प्रदर्शन है तो दूसरी तरफ संविधान और सुरक्षा पर उठते गंभीर सवाल।

मेयर ममदानी का ट्रंप को सीधा फोन: 'यह युद्ध की कार्रवाई है'
न्यूयॉर्क के नवनियुक्त मेयर जोहरान ममदानी (Zohran Mamdani on venezuela) ने शपथ लेने के महज दो दिन बाद राष्ट्रपति ट्रंप को फोन कर हड़कंप मचा दिया। ममदानी ने मादुरो की गिरफ्तारी को एक संप्रभु राष्ट्र पर "एकतरफा हमला" बताया। उन्होंने ट्रंप को चेतावनी दी कि मादुरो को न्यूयॉर्क की संघीय हिरासत में रखने से शहर की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। मेयर का मानना है कि सत्ता परिवर्तन की यह कोशिश अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है और इससे न्यूयॉर्क में रहने वाले वेनेजुएला मूल के लोगों में भारी आक्रोश पैदा हो सकता है।
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कमला हैरिस की चेतावनी: तेल के लिए युद्ध और अराजकता
पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस (Kamala Harris on Maduro Arrest) ने ट्रंप प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए इस ऑपरेशन को "अवैध और खतरनाक" बताया है। हैरिस ने कहा कि इतिहास गवाह है कि सत्ता परिवर्तन और तेल के लालच में शुरू किए गए युद्ध अंत में केवल आर्थिक बोझ और सैनिकों की शहादत का कारण बनते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप के पास इस सैन्य कार्रवाई के बाद का कोई 'एग्जिट प्लान' नहीं है। हैरिस के मुताबिक, इस कदम से अमेरिका मजबूत नहीं, बल्कि और अधिक असुरक्षित हो गया है।
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संवैधानिक संकट: बिना संसद की मंजूरी के सैन्य बल का इस्तेमाल
अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में भी ट्रंप के खिलाफ सुर तेज हो गए हैं। हाउस इंटेलिजेंस कमेटी के सदस्य राजा कृष्णमूर्ति ने तर्क दिया कि मादुरो भले ही तानाशाह हों, लेकिन राष्ट्रपति को कांग्रेस की मंजूरी के बिना किसी दूसरे देश में सेना भेजने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है। सांसदों का डर है कि ट्रंप का यह रवैया शक्तियों के संतुलन को बिगाड़ रहा है और यह एक ऐसी खतरनाक मिसाल पेश करेगा, जिसका इस्तेमाल भविष्य में दूसरे देश अमेरिका के खिलाफ कर सकते हैं।
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Venezuela Crisis: न्यूयॉर्क से लॉस एंजेलिस तक विरोध
ट्रंप के इस एक्शन के खिलाफ अमेरिका के बड़े शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। वॉशिंगटन डीसी, शिकागो और बोस्टन की सड़कों पर लोग वेनेजुएला के झंडे लेकर उतरे हैं और "नो मोर वॉर फॉर ऑयल" के नारे लगा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अमेरिका एक बार फिर लैटिन अमेरिका के प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करने के लिए युद्ध की राह पर लौट रहा है। घरेलू विरोध के साथ-साथ यूरोपीय सहयोगियों की चुप्पी ने भी ट्रंप की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।












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