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TikTok: क्या भारत में टिकटॉक से हटेगा प्रतिबंध, फिर से बनेंगे रील्स? अरबपति कारोबारी के फैसले से खुशी की लहर

TikTok News: रील्स बनाने और रील्स देखने वालों को क्रेजी बनाने वाला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक से क्या भारत में प्रतिबंध हट सकता है? अमेरिकी कारोबारी के एक कदम से इस बात को बल मिलने लगे हैं।

अमेरिकी अरबपति कारोबारी और लॉस एंजिल्स डोजर्स के पूर्व मालिक फ्रैंक मैककोर्ट ने घोषणा की है, कि उनका संगठन, प्रोजेक्ट लिबर्टी, टिकटॉक के संयुक्त राज्य अमेरिका के ऑपरेशन को खरीदने के लिए एक कंसोर्टियम का निर्माण कर रहा है।

US billionaire buying TikTok

चीन का नहीं, अमेरिका का होगा टिकटॉक!

दरअसल, अमेरिका में टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल पास हो गया है, लेकिन प्रतिबंध होने से बचाने के लिए बाइडेन प्रशासन की तरफ से टिकटॉक की मूल कंपनी बाइटडांस को एक विकल्प दिया गया है। 24 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जिस कानून पर हस्ताक्षर किए हैं, उसमें कहा गया है, कि टिकटॉक की मूल कंपनी बाइटडांस को 19 जनवरी 2025 तक ऐप बेचना होगा या फिर प्रतिबंध का सामना करना पड़ेगा।

यानि, अगर चीनी कंपनी बाइटडांस टिकटॉक को किसी अमेरिकी कारोबारी के हाथों बेच देती है, तो फिर टिकटॉक पर अमेरिका में प्रतिबंध नहीं लगेगा, लेकिन अगर बेचने से इनकार करती है, तो फिर अमेरिका में भी टिकटॉक पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। अमेरिका की चिंता ये है, कि टिकटॉक के जरिए चीन, अमेरिका के नागरिकों की निजी जानकारियां जुटा रहा है, जो देश की सुरक्षा के लिए खतरा है।

व्हाइट हाउस ने कहा है, कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से प्लेटफॉर्म पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के बजाय टिकटॉक के चीनी स्वामित्व को खत्म करने का विकल्प दे रहा है।

प्रोजेक्ट लिबर्टी की वेबसाइट पर मैककोर्ट ने कहा है, कि "हमारे डिजिटल बुनियादी ढांचे की नींव टूट गई है, और इसे ठीक करने का समय आ गया है। हम अपने बच्चों, परिवारों, लोकतंत्र और समाज के स्वास्थ्य और कल्याण की सुरक्षा के लिए और ज्यादा प्रयास कर सकते हैं और करना भी चाहिए। हम इस संभावित अधिग्रहण को मौजूदा तकनीकी मॉडल के विकल्प को उत्प्रेरित करने के एक अविश्वसनीय अवसर के रूप में देखते हैं, जिसने इंटरनेट का उपनिवेश बना लिया है।"

टिकटॉक खरीदने दिलचस्पी रखने वाले फ्रैंक मैककोर्ट कौन हैं?

70 साल के फ्रैंक एच. मैककोर्ट जूनियर एक प्रभावशाली अमेरिकी बिजनेस एक्जीक्यूटिव हैं। वर्तमान में, वह मैककोर्ट ग्लोबल के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व सीईओ हैं। इसके अलावा वो फ्रांसीसी फुटबॉल क्लब मार्सिले के मालिक और अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी प्रोजेक्ट लिबर्टी के संस्थापक और कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं।

मैककोर्ट को 2004 से 2012 तक लॉस एंजिल्स डोजर्स और डोजर स्टेडियम के मालिक होने के लिए जाना जाता है।

मैसाचुसेट्स के बोस्टन में जन्मे, मैककोर्ट का पालन-पोषण एक कैथोलिक परिवार में हुआ और उन्होंने जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है। उन्होंने 1977 में द मैककोर्ट कंपनी की स्थापना की थी, जिसमें प्रमुख वाणिज्यिक रियल एस्टेट परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें बोस्टन में यूनियन व्हार्फ कॉन्डोमिनियम भी शामिल था।

टिकटॉक में क्या बदल देंगे मैककोर्ट?

प्रोजेक्ट लिबर्टी, गुगेनहाइम सिक्योरिटीज, कानूनी फर्म किर्कलैंड एंड एलिस, टेक्नोलॉजी के जानकारों, शिक्षाविदों और अन्य भागीदारों के साथ मिलकर, टिकटॉक को डिजिटल ओपन-सोर्स प्रोटोकॉल में बदलने का प्रस्ताव रख रही है।

मैककोर्ट ने कहा है, कि अगर वो टिकटॉक खरीदने में कामयाब होते हैं, तो टिकटॉक की संरचना में बदलाव करेंगे और यूजर्स को उनकी डिजिटल पहचान और डेटा पर ज्यादा नियंत्रण देंगे। इसमें पारदर्शिता बढ़ाने के लिए प्लेटफ़ॉर्म को ओपन-सोर्स प्रोटोकॉल में ट्रांसफॉर्म किया जाएगा।

इसमें ये भी बताया जाएगा, कि यूजर्स के डेटा कौन कौन देख रहा है, उनकी डेटा का इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है, उनके कंटेट का किस तरह से इस्तेमाल किया जा रहा है और इसके आधार पर यूजर्स अपनी सेटिंग्स में बदलाव कर सकते हैं।

टिकटॉक खरीदने के लिए प्रोजेक्ट लिबर्टी के तहत अभी 500 मिलियन डॉलर का फंड तैयार किया गया है।

क्या भारत में टिकटॉक से हटेगा प्रतिबंध?

टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाने के पीछे भारत सरकार की दलील इस बात को लेकर थी, कि इस प्लेटफॉर्म से यूजर्स का डेटा चीन भेजे जाने का खतरा है, जो भारत की नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा पैदा करता है। लेकिन, अगर टिकटॉक का कंट्रोल किसी अमेरिकी कारोबारी के हाथ में जाता है, तो फिर ये खतरा हट जाएगा।

टिकटॉक जैसे कई प्लेटफॉर्म, जिसके मालिक अमेरिकी कारोबारी हैं, वो भारत में चल रहे हैं, जैसे इंस्टाग्राम। और अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत एक विशालकाय बाजार है, खासकर टिकटॉक ने भारत में जो प्रसिद्धि हासिल की थी, वो कामयाबी हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए एक सपना ही है। लिहाजा, इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है, कि टिकटॉक खरीदने के बाद अमेरिकी कारोबारी भारत सरकार से प्रतिबंध हटाने की गुजारिश कर सकते हैं।

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