US एयरफोर्स को मिला B-21 Stealth बॉम्बर, परमाणु बम बरसाने में है माहिर, तोड़ देगा चीन का अभेद्य किला
B-21 Stealth Bomber प्रोग्राम को काफी ज्यादा गोपनीय रखा गया था और इसके निर्माण का खास मकसद चीन ही है, जिसकी वायुसेना ने अपने देश को एक अभेद्य किला बना दिया है।
B-21 Stealth Bomber: दुनिया में टेक्नोलॉजी का लगातार विकास हो रहा है, खासकर डिफेंस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दुनिया के चुनिंदा शक्तियों के बीच आगे निकलने की होड़ लगी हुई है। चीन पिछले कुछ सालों से लगातार स्टील्थ फाइटर जेट्स के निर्माण में लगा हुआ था, लेकिन अब अमेरिका एक ऐसे स्टील्थ फाइटर जेट को लांच कर दिया है, जो दुनिया में बनाए गये तमाम फाइटर जेट्स का 'बाप' है। ये स्टील्थ फाइटर जेट परमाणु बम बरसाने में माहिर है और दुनिया में अभी तक जितने भी स्टील्थ फाइटर जेट बने हैं, उन सबका ये बाप माना जा रहा है। इसके डिजाइन ने डिफेंस की दुनिया में तहलका मचा दिया है। मिलिट्री एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अमेरिका का ये स्टील्थ फाइटर जेट दुश्मनों की फौज में भयानक नुकसान पहुंचा सकता है।

30 साल बाद स्टील्थ की लॉन्चिंग
अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, 30 सालों में पहली बार अमेरिका की वायुसेना एक नये स्टील्थ बॉम्बर का अनावरण किया है और इस स्टील्थ फाइटर जेट को खासकर परमाणु बमों की बारिश करने के लिए ही बनाया गया है। अमेरिका का ये B-21 Raider स्टील्थ फाइटर जेट नेक्स्ट जेनरेशन का फाइटर जेट है, जिसे अमेरिका के अपने पिछले बी-1 लांसर और बी-2 स्पिरिट विमान को बदलने के लिए डिजाइन किया है और अगले कुछ सालों में ये फाइटर जेट अमेरिकी बमवर्षक विमानों के बेड़े का रीढ़ की हड्डी बन जाएगा। B-21 Stealth Bomber के डिजाइन के पीछे खासतौर पर चीन को को ध्यान में रखा गया है, क्योंकि चीन ने अपने एयर डिफेंस को किले की तरह अभेद्य बना लिया है, लिहाजा अमेरिका को एक ऐसे फाइटर जेट की जरूरत थी, जो उस किले को तोड़ सके।

अमेरिका का लार्ज वीपन प्रोग्राम
अमेरिका पिछले साल अपने लार्ज वीपन प्रोग्राम लेकर आया था और विध्वंसक हथियारों के निर्माण और उनके रिसर्च के लिए 25.1 अरब डॉलर का पैकेज अमेरिकी एयरफोर्स को दिया था और ऐसे ही वक्त में B-21 Stealth Bomber विमान को अमेरिका दुनिया के सामने लाया है। खासकर ये लॉन्चिंग चीन का होश उड़ाने वाला है। इससे पहले अमेरिका अपने हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम के तहत F-35 और B-2 बमवर्षक विमानों को भी दुनिया के सामने ला चुका है। B-2 बमवर्षक को अमेरिका ने 34 साल पहले अपने वायुसेना के बेड़े में शामिल किया था और उस वक्त ये विमान दुनिया की सबसे एडवांस और विध्वंसक विमान बन गया था। उस विमान को बनाने के लिए भी उस वक्त एडवांस मैटेरियल्स का इस्तेमाल किया गया था और विमान को ऐसे मैटेरियल्स से कोट किया गया था, वहीं इसके एयरफ्रेम और इंजन को बेहद खास डिजाइन दिया गया था, जिसकी वजह से ये बमवर्षक दुनिया के किसी भी रडार के लिए 'अदृश्य' साबित हो गया था। अमेरिका ने अपने B-2 बमवर्षक के जरिए काफी लंबी दूरी तक स्ट्राइक करने की क्षमता हासिल कर ली थी, वो भी अत्यधिक डिफेंस के साथ। रडार इसे पकड़ नहीं सकता था, लिहाजा अमेरिका अपने B-2 बमवर्षक के जरिए बिना किसी पूर्व चेतावनी के दुश्मन तके इलाके में काफी अंदर घुसकर लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम हो गया था, जिसका काफी फायदा अमेरिका को मिला।

B-21 Stealth Bomber क्यों है स्पेशल?
B-21 Stealth Bomber प्रोग्राम को काफी ज्यादा गोपनीय रखा गया है और इस फाइटर जेट को बनाने वाली कंपनी नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन ने अपनी इस परियोजना को काफी ज्यादा गु्प्त रखा है। हालांकि, फिर भी डिफेंस इंडस्ट्री पर गिद्ध की नजर बनाकर रखने वाले डिफेंस एक्सपर्ट्स ने इस विमान को लेकर कुछ जानकारियों का खुलासा किया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, B-21 Raider कुछ हद तक पुराने B-2 बमवर्षक की तरह ही डिजाइन के साथ है, लेकिन इसके इंजनों और फ्लाइंग विंग्स को अलग ही कंसेप्ट और टेक्नोलॉजी के साथ डिजाइन किया गया है, लिहाजा मौजूदा वक्त में दुनिया के पास जो रडार टेक्नोलॉजी है, उनके लिए B-21 Raider की पहचान करना संभव नहीं होगा। इस बमवर्षक विमान का एयरफ्रेम B-2 बमवर्षक के मुकाबले थोड़ा छोटा है, जबकि इसका पेलोड, ऑर्डिनेंस, बम और मिसाइलों की मात्रा लगभग आधी हो गई है।

B-21 Stealth Bomber की रफ्तार कम
अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, B-21 Stealth Bomber की रफ्तार खास तौर पर उतनी तेज नहीं है, लेकिन फिर भी इसे सबसोनिक स्पीड पर उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया है। वहीं, ये विमान क्वांटम लीप नहीं है, जबकि जब साल 1988 में B-2 बॉम्बर को पेश किया गया था, तो उसमें क्वांटम लीप को शामिल किया गया था। हालांकि, इस विमान को खरीदने और बेचने के खास मकसद से डिजाइन किया गया है, क्योंकि इसकी कीमत काफी कम है। B-2 बॉम्बर के उड़ान से लेकर उसके मेंटिनेंस में काफी खर्च आता था, लिहाजा उसे काफी महंगा जेट माना जाता है, जबकि B-21 विमान का रखरखाव और इसके संचालन में लगने वाला इंसानी श्रम भी काफी कम होगा। लिहाजा, B-21 की खरीद बिक्री होने की संभावना काफी रहेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, शुरू में एक सौ विमानों का उत्पादन किया जाएगा और इसके लागत को कम रखा जाएगा, ताकि इसकी बिक्री को बढ़ाया जा सके।

B-21 Stealth में नया क्या है?
B-21 Stealth में पुराने B-2 बमवर्षक के मुकाबले कई क्षमताएं हैं, जो इस विमान को काफी खास बनाती है। ये अपने वजन के साथ काफी लंबे वक्त तक उड़ान भरने में सक्षम है। इसके साथ ही इसके सेंसर की क्षमता काफी लंबी दूरी की है। वहीं, इसका स्ट्राइक प्लेटफॉर्म दुनिया में मौजूद सभी विमानों से ज्यादा शक्तिशाली है और इसकी सबसे बड़ी क्षमता ये है, कि लड़ाई के मैदान में ये बमवर्षक विमान दुश्मन के फाइटर जेट्स की तमाम क्षमताओं की जानकारी हासिल कर लेगा, जिससे दुश्मन के ऊपर बढ़त बनाई जा सकती है। इसके साथ ही बी-21 स्टील्थ फाइटर जेट स्ट्रैटजिक नेटवर्क में पूरी तरह से फिट बैठता है और दुश्मन के क्षेत्र की तमाम खुफिया जानकारियों के बारे में डेटा हासिल करता है। इसके अलावा ये बम वर्षक विमान दोस्त देशों के सैटेलाइट, रडार के साथ भी आसानी से कनेक्शन बनाने में सक्षम है और इनके अलावा ये एक काफी आक्रामक हथियार भी है, जो काफी विध्वंसक क्षमता के साथ दुश्मन के टारगेट को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर सकता है। संक्षेप में कहा जाए, तो इस विमान के 'दिमाग' की क्षमता इस वक्त दुनिया में मौजूद तमाम विमानों से काफी ज्यादा है।

चीन को ध्यान में रखकर निर्माण
चीन ने अपने एयरफोर्स के जरिए अपने आप को अभेद्य किला बना लिया है और B-21 Stealth का निर्माण चीन के अभेद्य किले को तोड़ने के लिए ही किया गया है। दक्षिण चीन सागर में चीनियों के पास 'घरेलू लाभ' मौजूद है और उसके पास ऐसी मिसाइलें हैं, जो अमेरिकी इन्वेंट्री में मौजूद किसी भी विमान को पीछे छोड़ देती हैं। चीन का YJ-18 एंटी-शिप क्रूज मिसाइल (रेंज 540 किलोमीटर) और PL-15 बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (300 किलोमीटर) अमेरिका की 240 किलोमीटर रेंज हार्पून और 161 किलोमीटर AIM 190D को पीछे छोड़ती है, जबकि DF-21D मिसाइल से अमेरिकी विमानवाहक पोतों को खतरा है। यहां तक कि चीन की अन्य बैलिस्टिक मिसाइलें भी पहले और दूसरे द्वीप श्रृंखला में अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई नौसैनिक संपत्ति को निशाना बनाने में सक्षम है। चीन की DF-16 शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (SRBM) की क्षमता 1000 किलोमीटर है, जिससे भी चीन और ऑस्ट्रेलिया को खतरा है। लिहाजा, अमेरिका को एक ऐसे स्टील्थ फाइटर जेट की जरूरत थी, जिससे वो चीन के अभेद्य किले को तोड़ सके।
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